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नशामुक्त समाज को सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत : विवेक
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प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ने लोगों से किया नशे के खात्मे के लिए संकल्प लेने का आह्लवान
बोले, नशा बुद्धि को भ्रष्ट कर ले जाता है पतन की ओर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे समाज और सभ्यता का निर्माण करना होना चाहिए जिसमें मानव कल्याण सर्वोपरि हो तथा नशे के लिए कोई स्थान न हो। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सभी को संकल्प लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है।
यह बात हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष विवेक सिंह ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि नशा मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर उसे पतन की ओर ले जाता है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (एचपीयूआईएलएस) शिमला और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
उन्होंने कहा कि संगोष्ठी से सभी को कुछ संकल्प लेकर जाना चाहिए और उन्हें अपने जीवन में अपनाना चाहिए। नशे की समस्या का समाधान केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर प्रयास करने होंगे। समापन सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव एवं वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश विक्रांत कौंडल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ललित मोहन डडवाल और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), शिमला के सचिव एवं वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उमेश वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) ललित मोहन डडवाल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी एवं हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के पूर्व संयोजक-सह-परामर्शदाता डॉ. ओपी शर्मा, प्रो. (डॉ.) ममता मोक्टा, पंजाब विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र, लुधियाना के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के प्रो. अमन अमृत चीमा और प्रो. एसएन घोष ने भी अपने विचार रखे।
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संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। इनमें एम्स बिलासपुर के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) भूपेंद्र यादव, पंजाब विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र, लुधियाना के निदेशक प्रो. डॉ. आशीष विर्क, हिमाचल प्रदेश किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य अर्चना फुल, एएसपी गौरव जीत सिंह, डीडीयू जोनल अस्पताल, शिमला की क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. दीपा राठौर, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, शिमला के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सचिन शर्मा, एसएफएसएल, शिमला के उपनिदेशक डॉ. कपिल शर्मा और आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. निधि शर्मा शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान संगोष्ठी की थीम पर आधारित शॉर्ट फिल्म निर्माण, कैरिकेचर और पॉलिसी ड्राफ्टिंग सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर ने पुरस्कार वितरित किए।
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बोले, नशा बुद्धि को भ्रष्ट कर ले जाता है पतन की ओर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। शिक्षा का उद्देश्य ऐसे समाज और सभ्यता का निर्माण करना होना चाहिए जिसमें मानव कल्याण सर्वोपरि हो तथा नशे के लिए कोई स्थान न हो। नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए सभी को संकल्प लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है।
यह बात हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष विवेक सिंह ठाकुर ने कही। उन्होंने कहा कि नशा मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर उसे पतन की ओर ले जाता है। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (एचपीयूआईएलएस) शिमला और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नशामुक्ति एवं मानसिक स्वास्थ्य विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
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उन्होंने कहा कि संगोष्ठी से सभी को कुछ संकल्प लेकर जाना चाहिए और उन्हें अपने जीवन में अपनाना चाहिए। नशे की समस्या का समाधान केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर प्रयास करने होंगे। समापन सत्र में हिमाचल प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के अतिरिक्त सचिव एवं वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश विक्रांत कौंडल, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विधि विभाग के अधिष्ठाता एवं अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) ललित मोहन डडवाल और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), शिमला के सचिव एवं वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश उमेश वर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) ललित मोहन डडवाल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के पूर्व अधिकारी एवं हिमाचल प्रदेश नशा निवारण बोर्ड के पूर्व संयोजक-सह-परामर्शदाता डॉ. ओपी शर्मा, प्रो. (डॉ.) ममता मोक्टा, पंजाब विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र, लुधियाना के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ के प्रो. अमन अमृत चीमा और प्रो. एसएन घोष ने भी अपने विचार रखे।
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संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। इनमें एम्स बिलासपुर के मनोचिकित्सा विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) भूपेंद्र यादव, पंजाब विश्वविद्यालय क्षेत्रीय केंद्र, लुधियाना के निदेशक प्रो. डॉ. आशीष विर्क, हिमाचल प्रदेश किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य अर्चना फुल, एएसपी गौरव जीत सिंह, डीडीयू जोनल अस्पताल, शिमला की क्लिनिकल मनोवैज्ञानिक डॉ. दीपा राठौर, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, शिमला के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सचिन शर्मा, एसएफएसएल, शिमला के उपनिदेशक डॉ. कपिल शर्मा और आईजीएमसी के मनोचिकित्सा विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. निधि शर्मा शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान संगोष्ठी की थीम पर आधारित शॉर्ट फिल्म निर्माण, कैरिकेचर और पॉलिसी ड्राफ्टिंग सहित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर ने पुरस्कार वितरित किए।