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मनोरोग से उबरने के बाद घर लौटा तेलंगाना का दामोदर
Wed, 06 Feb 2019 10:54 AM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Wed, 06 Feb 2019 10:54 AM IST
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सड़कों पर चार साल गुजारने वाला दामोदर मंगलवार को अपने घर तेलंगाना लौट गया। अब वह ठीक है। करीब पौने दो साल पहले मानसिक रूप से बीमार दामोदर को सड़क किनारे किसी लावारिस हालत में घूमते देखा था। इसके बाद उसे शिमला के बालूगंज स्थित मनोरोगी अस्पताल में दाखिल करवाया गया। यहां चिकित्सकों की मेहनत रंग लाई और दामोदर ठीक हो गया।
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तेलंगाना के रहने वाले दामोदर की भाषा न समझने के कारण चिकित्सकों को उसके बारे में जानने में दिक्कत हुई। लेकिन एक दिन दामोदर ने महबूबनगर का नाम लिया। इसके बाद चिकित्सकों ने गूगल सर्च इंजन के जरिये इस जगह का पता लगाया और फिर उसके परिजनों की तलाश की। मंगलवार को वह घर लौट गया। दामोदर अब अपने परिवार के साथ रहेगा।
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अस्पताल में मनोरोगी का उपचार करने वाले चिकित्सक डॉ. विकेश गुप्ता ने मरीज को उसके परिजनों से मिलाने के लिए काफी मेहनत की। डॉ. विकेश के मुताबिक करीब दो माह से मरीज अस्पताल से परिवार के सदस्यों से वीडियो कॉल की मदद से बातचीत कर रहा था। इसके बाद मंगलवार को तेलगांना से शिमला पहुंचे एएसआई जयना, कांस्टेबल स्वामी तथा मरीज के भांजे देवेंद्र गोड के साथ दामोदर को घर भेज दिया।
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उन्होंने बताया कि दामोदर तेलगांना के जिला उनापरती कस्बा महबूबनगर से छह साल पहले गायब गया था। इसके बाद भटकते हुए शिमला पहुंचा। 8 अप्रैल 2017 को उसे बालूगंज स्थित मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास केंद्र लाया गया। दो माह में ही मरीज ठीक हो गया था। लेकिन भाषा की दिक्कत के चलते वह अपनी बात नहीं रख पा रहा था। नवंबर 2018 में मेडिकल स्टेटस एग्जामिनेशन के बीच दामोदर ने महबूबनगर नाम लिया। इसके बाद डॉक्टर ने इस नाम को सर्च किया तो मरीज के परिजनों का पता चला। दामोदर के विदाई के दौरान डॉ. रवि शर्मा भी मौजूद रहे।
तीन लोगों को भेज चुके हैं घर : डॉ. पाठक
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय पाठक ने बताया कि तेलगांना के मरीज को घर भेज दिया है। तीन माह में इस रोगी को मिलाकर तीन लोगों को उनके घर पहुंचाया जा चुका है। पांच सालों में अस्पताल से 86 मरीजों को छुट्टी दी जा चुकी है। इसमें 34 मरीज अपने घर गए हैं जबकि 52 को ओल्ड ऐज होम तथा नारी निकेतन भेजा है।
खुश हूं, अब रहूंगा परिवार के साथ: दामोदर
दामोदर को हिंदी बोलने में थोड़ी समस्या है। मीडिया ने जब सवाल पूछा कि अब घर जा रहे तो अपनी भाषा में कहा कि वह खुश हैं। परिचित देवेंद्र ने कहा कि वह कह रहा है कि खुश हूं और अब परिवार के साथ रहूंगा।
परिजन के घर से हुआ गायब
बिहार का रहने वाला आलोक कुमार 2009 में हरियाणा के बल्लभगढ़ में परिचित के घर से गायब हो गया था। पिछले वर्ष जनवरी में आईजीएमसी लाया गया। इसके बाद यह मेंटल अस्पताल दाखिल किया। डॉक्टरों ने मरीज के बताए एड्रेस पर एक चिट्ठी भेजी। इसके बाद दिसंबर में आलोक के पिता उन्हें घर ले गए। दूसरे मामले में एमपी के रहने वाले अजय को भी इसी तरह घर भेजा गया।