प्रिंसिपल को साढ़े आठ लाख पेनल्टी, आवास खाली न करने पर हुई कार्रवाई
डॉ. राधाकृष्णन राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल हमीरपुर के प्रिंसिपल डॉ. अनिल चौहान को साढ़े आठ लाख रुपये से अधिक की पेनल्टी लगी है। मेडिकल कॉलेज टांडा में प्रधानाचार्य रहते डॉ. चौहान को टाइप-6 यानी छह कमरों का आलीशान सरकारी आवास आवंटित हुआ था। वर्ष 2016 में टीएमसी के प्रधानाचार्य पद से पदोन्नत होने पर उन्हें शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश मेडिकल एजूकेशन विभाग का निदेशक लगाया गया।
विभागीय नियमों के तहत उन्हें टीएमसी कांगड़ा से स्थानांतरण के बाद 31 जनवरी 2017 तक टीएमसी में आवंटित सरकारी आवास खाली करना था। इस बीच मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कई बार उनसे आवास खाली करने को लेकर पत्राचार भी किया। लेकिन उन्होंने आवास खाली नहीं किया। विभाग ने डॉ. चौहान को दिसंबर 2017 तक 11 महीनों तक सरकारी आवास न छोड़ने पर 4.79 लाख पेनल्टी लगाई थी।
प्रत्येक महीने 43.578 पेनल्टी जुड़ती रही। डॉ. चौहान ने डेढ़ साल बाद इसी वर्ष सितंबर 2018 को टीएमसी में मिला सरकारी आवास खाली किया। उन्होंने करीब 20 महीने अतिरिक्त सरकारी आवास पर कब्जा जमाए रखा। इसके चलते अब स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें साढ़े आठ लाख रुपये से अधिक की पेनल्टी लगाई है।
डॉ. अनिल चौहान ने बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने शिमला में निदेशक मेडिकल एजूकेशन के पद पर ज्वाइन किया। शिमला में कोई सरकारी आवास उपलब्ध नहीं था। वहां किराये के मकान में रहे। टीएमसी में पुराने आवास पर ढेर सारा सामान था, जिसे रखने की व्यवस्था नहीं थी।
टीएमसी में सरकारी आवास का निर्धारित किराया सितंबर 2018 तक चुकाया है। अब बकाया राशि का नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव आरडी धीमान ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।