पहले की माफ, अब वसूल रहे गारबेज कलेक्शन फीस

Shimla Bureau Updated Fri, 13 Oct 2017 11:07 PM IST
शिमला। सितंबर माह की गारबेज कलेक्शन की फीस न वसूलने के एलान से नगर निगम मुकर गया है। हजारों शहरवासियों से हड़ताल के दिनों की भी फीस वसूली जा रही है। सैहब कर्मचारी एक से 22 सितंबर तक ज्यादातर दिन हड़ताल पर रहे थे। इनमें 11 से 22 तक तो लगातार काम ठप रहा था। लोग घरों से खुद कूड़ा उठाने को मजबूर हुए थे। इसी दौरान 14 सितंबर को नगर निगम की मेयर कुसुम सदरेट ने साफ कहा था कि सफाई कर्मियों की हड़ताल के चलते घरों से कूड़ा नहीं उठा है।। इसलिए शहर के लोगों से सितंबर की गारबेज कलेक्शन फीस नहीं वसूली जाएगी।
लेकिन अब इसके उल्ट नगर निगम शहर के लोगों से धोखा कर रहा है। सैहब सुपरवाइजर लोगों के घरों पर गारबेज कलेक्शन फीस वसूलने पहुंच रहे हैं। अगस्त माह के 50 रुपये और सितंबर माह के 25 से 30 रुपये वसूले जा रहे हैं। मेयर के एलान के बाद शहर के लोगों ने राहत महसूस की थी, लेकिन अब लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। कई लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं।

मेयर बोलीं, सिर्फ अगस्त की फीस वसूलने के निर्देश
गारबेज कलेक्शन के एवज में लोगों से सिर्फ अगस्त माह की फीस वसूलने के निर्देश दिए गए हैं, सितंबर माह में सफाई कर्मी हड़ताल पर थे। इसलिए सितंबर की फीस माफ करने का पहले ही घोषणा कर दी गई थी। फीस वसूली में की जा रही मनमानी की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
- कुसुम सदरेट मेयर, नगर निगम शिमला

इनसेट
बोनस चाहिए तो पैसा इकट्ठा करके लाओ
गारबेज कलेक्शन फीस वसूली के लिए लोगों के घरों पर पहुंच रहे सुपरवाइजरों का कहना है कि नगर निगम की ओर से दो टूक कह दिया गया है कि बोनस चाहिए तो दो महीने का पैसा इकट्ठा करके लाओ। पिछले हफ्ते निगम के ये सुपरवाइजर अगस्त माह की कुल 5 लाख फीस इकट्ठा कर पाए थे। दिवाली के बोनस के लिए इन्हें 15 अक्तूबर तक हर घर से कलेक्शन करनी है। ऐसे में ये सुपरवाइजर शहरवासियों से सितंबर माह का भी शुल्क वसूल रहे हैं।


नहीं उठाएंगे जीएसटी का बोझ, जारी रखेंगे बहिष्कार
नगर निगम और लोनिवि के ठेकेदारों ने बैठक कर लिया फैसला
शहर में नहीं हो पाएंगे करोड़ों के नए निर्माण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में बरसात के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा। साथ ही करोड़ों रुपये के नए निर्माण कार्य भी नहीं हो पाएंगे। नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने टेंडरों का बहिष्कार जारी रखा है।
ठेकेदारों का कहना है कि वे जीएसटी और ईपीएफ का बोझ नहीं उठाएंगे। सरकार और निगम को यह खर्च खुद वहन करना होगा। नगर निगम ठेकेदार यूनियन और जय मां तारा ठेकेदार यूनियन की शुक्रवार को अहम बैठक हुई। इसमें 100 से ज्यादा ठेकेदारों ने हिस्सा लिया। सबसे पहले जीएसटी पर चर्चा की गई। ठेकेदारों ने कहा कि 12 फीसदी जीएसटी लगने से उन्हें घाटा उठाना पड़ेगा। यह दर काफी ज्यादा है। एस्टीमेट में शामिल न होने से जीएसटी और ईपीएफ का पैसा उन्हें अपनी जेब से भरना पड़ेगा। ठेकेदार इसके लिए कतई तैयार नहीं हैं।
ठेकेदारों ने कहा कि जीएसटी को लेकर निगम और लोक निर्माण विभाग खुद ही स्पष्ट नहीं हैं। अफसर समझ ही नहीं पा रहे हैं कि कैसे और कितना जीएसटी लगाया जाना है। लंबी चर्चा के बाद यूनियन अध्यक्ष पीएन शर्मा ने कहा कि निगम और सरकार जीएसटी को एस्टीमेट में शामिल कर इसका खर्च वहन करे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे मुख्य सलाहकार अनिल कुमार शर्मा ने कहा कि जब तक सरकार और नगर निगम जीएसटी और ईपीएफ से जुड़ी उनकी मांगों को नहीं मान लेते, तब तक टेंडरों का बहिष्कार जारी रहेगा। ठेकेदार यूनियन सोमवार को इस मसले पर नगर निगम मेयर कुसुम सदरेट से भी मुलाकात करने वाले हैं।

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