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राजधानी में तबाही, बर्फबारी थमते ही घरों-गाड़ियों पर कहर बन टूटे 70 पेड़
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आठ भवन और छह वाहन क्षतिग्रस्त, दर्जनों बिजली पोल टूटे, सड़कें और रास्ते हुए बंद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में शुक्रवार देर शाम बर्फबारी का दौर थमने के बाद शहर में तबाही का सिलसिला शुरू हो गया। बर्फ से लकदक पेड़ लोगों के घरों और गाड़ियों पर गिरने से भारी नुकसान हुआ है। शनिवार सुबह दस बजे तक शहर में 70 से ज्यादा पेड़ कहर बनकर टूट चुके थे।
इससे आठ भवनों और आधा दर्जन गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा दर्जनों बिजली पोल टूट गए हैं जबकि सड़कें और रास्ते बंद हो गए हैं। घरों और गाड़ियों पर कहर बनकर टूटे इन पेड़ों को लेकर सुबह आठ बजे से ही वन विभाग के अफसरों को फोन घनघनाने लगे। अचानक इतने पेड़ ढहने की रिपोर्ट मिलने के बाद वन अधिकारी भी परेशान हैं। शहरी इलाके में ढहे पेड़ काटने के लिए चार टीमें बनाई गई थीं लेकिन यह तैयारी कम पड़ गई। सड़कों, घरों और गाड़ियों पर ढहे पेड़ हटाने के लिए वन विभाग को पूरा दिन लग गया। वन विभाग के अनुसार शहर के जाखू, बैनमोर में दस से ज्यादा पेड़ ढहे हैं। संजौली, छोटा शिमला, कसुम्पटी, कनलोग, बालूगंज, रामनगर, फागली, नाभा, कैथू, विकासनगर में भी पेड़ ढहने से भारी नुकसान हुआ है। बेम्लोई भी में एक मकान को पेड़ गिरने से नुकसान हुआ है। शिमला शहर में 50 जबकि शिमला ग्रामीण क्षेत्र में 20 से अधिक पेड़ ढहने की सूचना है। वन विभाग के अनुसार सीपीआरआई कालोनी, बैनमोर के मालबर हाउस, बीरखाना, कैथू में भी पेड़ भवनों पर गिरे हैं। रामनगर के पास एक बस पर भी पेड़ ढह गया।
आज भी तबाही मचा सकते हैं पेड़
वन विभाग के अनुसार जमीन गीली होने और बर्फ से लकदक हुए पेड़ रविवार को भी ढह सकते हैं। शहर में कई जगह पेड़ टेढ़े हो गए हैं। डीएफओ शिमला शहरी अनिता भारद्वाज के अनुसार खतरनाक हुए पेड़ों को काटा जा रहा है। घरों और गाड़ियों पर ढहे पेड़ हटा दिए गए हैं।
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पहले काटते तो न होती इतनी तबाही
शहर में ढहे कई खतरनाक पेड़ों की लोग पहले भी नगर निगम और वन विभाग को शिकायत दे चुके थे। इनका निरीक्षण भी हो चुका है लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। बालूगंज, मालबर हाउस, नाभा में कई पेड़ ऐसे ढहे हैं जो खतरनाक चिन्हित होने के बावजूद नहीं काटे गए थे।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में शुक्रवार देर शाम बर्फबारी का दौर थमने के बाद शहर में तबाही का सिलसिला शुरू हो गया। बर्फ से लकदक पेड़ लोगों के घरों और गाड़ियों पर गिरने से भारी नुकसान हुआ है। शनिवार सुबह दस बजे तक शहर में 70 से ज्यादा पेड़ कहर बनकर टूट चुके थे।
इससे आठ भवनों और आधा दर्जन गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा दर्जनों बिजली पोल टूट गए हैं जबकि सड़कें और रास्ते बंद हो गए हैं। घरों और गाड़ियों पर कहर बनकर टूटे इन पेड़ों को लेकर सुबह आठ बजे से ही वन विभाग के अफसरों को फोन घनघनाने लगे। अचानक इतने पेड़ ढहने की रिपोर्ट मिलने के बाद वन अधिकारी भी परेशान हैं। शहरी इलाके में ढहे पेड़ काटने के लिए चार टीमें बनाई गई थीं लेकिन यह तैयारी कम पड़ गई। सड़कों, घरों और गाड़ियों पर ढहे पेड़ हटाने के लिए वन विभाग को पूरा दिन लग गया। वन विभाग के अनुसार शहर के जाखू, बैनमोर में दस से ज्यादा पेड़ ढहे हैं। संजौली, छोटा शिमला, कसुम्पटी, कनलोग, बालूगंज, रामनगर, फागली, नाभा, कैथू, विकासनगर में भी पेड़ ढहने से भारी नुकसान हुआ है। बेम्लोई भी में एक मकान को पेड़ गिरने से नुकसान हुआ है। शिमला शहर में 50 जबकि शिमला ग्रामीण क्षेत्र में 20 से अधिक पेड़ ढहने की सूचना है। वन विभाग के अनुसार सीपीआरआई कालोनी, बैनमोर के मालबर हाउस, बीरखाना, कैथू में भी पेड़ भवनों पर गिरे हैं। रामनगर के पास एक बस पर भी पेड़ ढह गया।
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आज भी तबाही मचा सकते हैं पेड़
वन विभाग के अनुसार जमीन गीली होने और बर्फ से लकदक हुए पेड़ रविवार को भी ढह सकते हैं। शहर में कई जगह पेड़ टेढ़े हो गए हैं। डीएफओ शिमला शहरी अनिता भारद्वाज के अनुसार खतरनाक हुए पेड़ों को काटा जा रहा है। घरों और गाड़ियों पर ढहे पेड़ हटा दिए गए हैं।
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पहले काटते तो न होती इतनी तबाही
शहर में ढहे कई खतरनाक पेड़ों की लोग पहले भी नगर निगम और वन विभाग को शिकायत दे चुके थे। इनका निरीक्षण भी हो चुका है लेकिन मंजूरी नहीं मिली है। बालूगंज, मालबर हाउस, नाभा में कई पेड़ ऐसे ढहे हैं जो खतरनाक चिन्हित होने के बावजूद नहीं काटे गए थे।