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Shimla News: भूतपूर्व सैनिक से लिए 7 रुपये लाख लौटाने होंगे
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सिविल जज अपूर्व राज ने सुनाया फैसला
न्यू शिमला निवासी ने जमीन बेचने के एवज में ली थी धनराशि
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने भूतपूर्व सैनिक को एक व्यक्ति से ऋण राशि की वसूली करने का हकदार ठहराया है। सिविल जज अपूर्व राज की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
अदालत ने माना कि घनश्याम लाल (वादी), पवन कुमार (प्रतिवादी) से 7 लाख रुपये की ऋण राशि वसूल करने का हकदार है। साथ ही अदालत ने शिकायत दायर करने की तिथि से लेकर वसूली तक 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज वसूलने के निर्देश दिए हैं। न्यू शिमला निवासी पवन कुमार ने जमीन बेचने के लिए बयाना राशि के रूप में 7 लाख रुपये लिए थे। यह मामला मार्च 2022 को राजधानी के मुहाल खलीनी का है। सुन्नी तहसील निवासी घनश्याम लाल भूतपूर्व सैनिक हैं। आरोप है कि मार्च 2022 में प्रतिवादी पवन कुमार ने अपनी जमीन-जायदाद 35 लाख रुपये में उससे खरीदने का आग्रह किया था। समझौते के मुताबिक प्रतिफल राशि में से 7 लाख रुपये की राशि 15 मार्च को प्रतिवादी को बयाना राशि के रूप में दी थी। शेष 28 लाख रुपये बिक्री विलेख के पंजीकरण के समय भुगतान किए जाने थे। इसके अलावा बिक्री विलेख 15 सितंबर को या उससे पहले पंजीकृत होना था लेकिन प्रतिवादी बिक्री विलेख पंजीकृत कराने में विफल रहा। एक कानूनी नोटिस भी जारी किया था जिसमें उसे समझौते के अपने हिस्से को पूरा करने के लिए कहा था। लेकिन नोटिस के बावजूद उसने अनुपालन नहीं किया। इसके बाद वादी ने प्रतिवादी से 7 लाख रुपये की बयाना राशि की वसूली के लिए अदालत के समक्ष मुकदमा दायर किया था।
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न्यू शिमला निवासी ने जमीन बेचने के एवज में ली थी धनराशि
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने भूतपूर्व सैनिक को एक व्यक्ति से ऋण राशि की वसूली करने का हकदार ठहराया है। सिविल जज अपूर्व राज की अदालत ने यह फैसला सुनाया है।
अदालत ने माना कि घनश्याम लाल (वादी), पवन कुमार (प्रतिवादी) से 7 लाख रुपये की ऋण राशि वसूल करने का हकदार है। साथ ही अदालत ने शिकायत दायर करने की तिथि से लेकर वसूली तक 6 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज वसूलने के निर्देश दिए हैं। न्यू शिमला निवासी पवन कुमार ने जमीन बेचने के लिए बयाना राशि के रूप में 7 लाख रुपये लिए थे। यह मामला मार्च 2022 को राजधानी के मुहाल खलीनी का है। सुन्नी तहसील निवासी घनश्याम लाल भूतपूर्व सैनिक हैं। आरोप है कि मार्च 2022 में प्रतिवादी पवन कुमार ने अपनी जमीन-जायदाद 35 लाख रुपये में उससे खरीदने का आग्रह किया था। समझौते के मुताबिक प्रतिफल राशि में से 7 लाख रुपये की राशि 15 मार्च को प्रतिवादी को बयाना राशि के रूप में दी थी। शेष 28 लाख रुपये बिक्री विलेख के पंजीकरण के समय भुगतान किए जाने थे। इसके अलावा बिक्री विलेख 15 सितंबर को या उससे पहले पंजीकृत होना था लेकिन प्रतिवादी बिक्री विलेख पंजीकृत कराने में विफल रहा। एक कानूनी नोटिस भी जारी किया था जिसमें उसे समझौते के अपने हिस्से को पूरा करने के लिए कहा था। लेकिन नोटिस के बावजूद उसने अनुपालन नहीं किया। इसके बाद वादी ने प्रतिवादी से 7 लाख रुपये की बयाना राशि की वसूली के लिए अदालत के समक्ष मुकदमा दायर किया था।
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