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65 साल के बौद्ध भिक्षु ने बर्फीला पहाड़ काट बनाई सड़क

Mon, 19 Jan 2015 10:00 AM IST
Updated Mon, 19 Jan 2015 10:00 AM IST
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65 year old man make a road to padum shinkla darcha kelang on his own expenses.

कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो..। ये जुमला 65 वर्षीय बौद्ध भिक्षु छुलटिम छोंजोर पर एकदम फिट बैठता है। सामरिक महत्व के मनाली-लेह मार्ग के बर्फ से अकसर बंद रहने के चलते उन्होंने वैकल्पिक मार्ग पदुम-शिंकुला-दारचा सड़क को खुद ही बनाने की ठान ली है।

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शून्य से कई डिग्री नीचे तापमान के बीच बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में लेह के लिए इस शार्टकट मार्ग को बनाने में उन्होंने सारी जमा पूंजी लगा दी है। इतना ही नहीं, सड़क के लिए ये बौद्ध भिक्षु चंदा जुटा रहे हैं। तीन साल से इस सपने को पूरा करने में लगे छुलटिम ने बड़ी-बड़ी बर्फीली चट्टानों को काटकर 13 किमी सड़क निकाल दी। इस सड़क से एक जीप निकल सकती है।

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33 लाख रुपये से एक जेसीबी और डोजर खरीदा

65 year old man make a road to padum shinkla darcha kelang on his own expenses.

इस मार्ग के लिए उन्होंने जुटाए पैसे से 33 लाख रुपये से एक जेसीबी और डोजर खरीदा है जो सड़क निर्माण में लगे हैं। इसके लिए डीजल, चालक और मजदूर उनके अपने हैं। स्थानीय लोग भी उनकी मदद कर रहे हैं। हालांकि, पदुम से शिंकुला (हिमाचल) तक 120 किलोमीटर लंबे इस मार्ग को बनाने का जिम्मा बीआरओ के विंग दीपक और शिंकुला से दारचा (लेह-लद्दाख) तक हिमांक के पास है।

हिमाचल की ओर से बीआरओ ने सड़क का काम लाहौल के दारचा के पास शुरू किया है, लेकिन बौद्ध भिक्षु ने बीच में शिंकुला दर्रा के आसपास सड़क निर्माण का जिम्मा संभाला है। बौद्ध भिक्षु की ओर से शिंकुला दर्रा से सड़क निर्माण करने की पुष्टि उपायुक्त लाहौल-स्पीति हंसराज चौहान ने की है।

नेशनल एसटी कमीशन ने नवाजा

65 year old man make a road to padum shinkla darcha kelang on his own expenses.

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को जब बौद्ध भिक्षु छुलटिम छोंजोर के इस नेक कार्य का पता चला तो उन्होंने जज्बे को सलाम करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर हाल ही में  सम्मानित किया है। नेशनल एसटी कमीशन के उपाध्यक्ष एवं विधायक रवि ठाकुर ने कहा कि चंदा जुटा कर बार्डर रोड निकालना राष्ट्रीय निर्माण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। आयोग से उनको सहयोग मिलता रहेगा।

दीपक प्रोजेक्ट के कमांडर कर्नल केपी सिंह ने कहा कि मुझे भी इस तरह की सूचना मिली है। बर्फबारी के कारण फिलहाल वहां तक पहुंचना संभव नहीं है। रोहतांग खुलने के बाद फील्ड अधिकारियों से इसकी पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। चंदे  से  इस कठिन रास्ते पर सड़क निकालना सराहनीय काम है।

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नेकी कर दरिया में डाल

65 year old man make a road to padum shinkla darcha kelang on his own expenses.

लामा छुलटिम छोंजोर लद्दाख के जंसकर क्षेत्र के निवासी हैं। इसके बावजूद उन्होंने लद्दाख के बजाय हिमाचल के पदुम से सड़क निकालने की शुरुआत की। अमर उजाला से बातचीत में छोंजोर ने बताया कि उनकी तमन्ना है कि चीन बार्डर से सटी भारतीय चौकियों तक देश के सैनिक बिना किसी रुकावट के पहुंचे।

वे चाहते हैं कि लेह की तरह जंसकर में भी पर्यटन कारोबार चमके। मेरी तरफ से प्रयास जारी हैं। बस यही कहना चाहता हूं कि लोग भी इस काम के लिए आगे आएं। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए फाइनैंस की जरूरत है। मेरी लोगों से बस यही अपील है कि वो जितना चंदा दे सकते हैं दिल खोल के दें। हमारा भारत देश किसी से कम नहीं है।

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