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रिपोर्ट में खुलासा, शिमला के जंगल पर है इतने अवैध कब्जे
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 01 Sep 2015 10:54 AM IST
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सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर सेब के पेड़ उगाने के मामले में सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष ताजा रिपोर्ट दायर की है। राज्य सरकार ने रिपोर्ट के माध्यम से अदालत को बताया कि शिमला में 72-22-80 हेक्टेयर वन भूमि की डिमार्केशन कर दी है। डीसी शिमला ने अपने शपथ पत्र के माध्यम से रिपोर्ट दायर की है कि शिमला में 57 लोगों ने वन भूमि पर अवैध कब्जा किया है।
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इनमें से 28 लोगों ने वन भूमि पर अस्थाई घर बनाकर कब्जे कर रखे हैं। इन लोगों ने 315.18 बीघा जमीन पर कब्जा किया है। रिपोर्ट में बताया है कि ठियोग तहसील के मोही राम ने दस बीघे से अधिक वन भूमि पर कब्जा किया है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। गौरतलब है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा कर सेब के बगीचे लगाए जाने और अवैध निर्माण के मुद्दे पर हाईकोर्ट द्वारा संज्ञान लिए जाने के मामले पर राज्य सरकार ने आवेदन दायर कर अदालत के पिछले आदेशों को संशोधन करने की गुहार लगाईं थी।
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सरकार के आवेदन पर हाई कोर्ट ने पिछले आदेशों को संशोधित करने से साफ इनकार कर दिया था। प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रधान सचिव वन को आदेश दिए थे कि वे सेब को तोड़कर बेचे और इसकी आमदनी से सिर्फ जंगली फलदार पौधे लगाए जाएं। अदालत ने आदेश दिए थे कि सेब तुड़ान के बाद इन पौधों की काट छांट की जाए। अदालत ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह फसलों को हटाने के बाद तुरंत जंगली पौधे लगाएं और कांटेदार तारों से भी बाड़ा लगाएं।
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अदालत ने मुख्य सचिव, प्रधान सचिव वन और डीएफओ को इन आदेशों और इस मामले में अदालत द्वारा समय-समय पर दिए आदेशों की अक्षरश: पालना करने के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेवार ठहराया है। अदालत ने अपने पिछले आदेशों में स्पष्ट किया था कि आदेशों की अनुपालना में बरती गई लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए थे कि वह छह महीनों के भीतर प्रदेश भर की सरकारी भूमि पर सभी अवैध कब्जों को हटाएं।
सिंचाई और पेयजल विभाग तथा विद्युत बोर्ड को आदेश दिए थे कि वे सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण की बिजली और पानी तुरंत प्रभाव से काट दें। बिजली बोर्ड ने अदालत को बताया कि अतिक्रमणकारियों की बिजली काटी जा रही है। वन विभाग की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकारी भूमि पर लगाए गए पौधों को काट कर कब्जा छुड़वा लिया है। इस पर आए खर्चे को अतिक्रमणकारियों से वसूला जाएगा। यह कार्यवाही हाईकोर्ट के पिछले आदेशों पर अमल पर लाई जा रही है।