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Kangra: प्रकटोत्सव पर मां ज्वाला को लगाया 56 प्रकार का भोग, उमड़े श्रद्धालु
Thu, 07 Jul 2022 06:42 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 07 Jul 2022 06:42 PM IST
सार
पुजारी सौरभ शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्रों की आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन मां ज्वाला का प्रकटोत्सव मनाया जाता है।
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मां ज्वाला को लगाया 56 प्रकार का भोग
- फोटो : संवाद
विस्तार
प्रसिद्ध शक्तिपीठ ज्वालामुखी में आषाढ़ मास की अष्टमी पर बुधवार अर्ध रात्रि को माता ज्वाला का प्रकटोत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। गुरुवार सुबह से ही दर्शनों के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना, जप-पाठ और मां ज्वाला के 16 शृंगार किए। इस दौरान माता को 56 भोग और ऋतुफल का भोग लगाया गया। पुजारी सौरभ शर्मा ने बताया कि गुप्त नवरात्रों की आषाढ़ शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन मां ज्वाला का प्रकटोत्सव मनाया जाता है। माता की भव्य चौकी का तीन दिन तक भव्य आयोजन किया गया।
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ज्वालामुखी में गुप्त नवरात्र का समापन भी 8 जुलाई को पूर्णाहुति के साथ किया जाएगा। इस दौरान विशाल भंडारा लगाया जाएगा। मंदिर एसीएफ राजेंद्र कुमार ने बताया कि मां ज्वाला का प्रकटोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी इंतजाम किए थे। दिल्ली, हरियाणा और गुरुग्राम से आए श्रद्धालु राजेश, मोहन, पार्थिव और अर्चना ने बताया कि मां ज्वाला के प्रकटोत्सव पर दर्शन कर उन्होंने माता से आशीर्वाद लिया।
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मंदिर में विद्यमान हैं ज्योतियां
मंदिर में 7 ज्योतियां विद्यमान हैं। इनमें सबसे बड़ी महाकाली ज्योति है। यह सोने के आले में विद्यमान है। इसे ज्वाला की मुख्य ज्योति के रूप में जाना जाता है। शहर का नाम भी इसी ज्योति के नाम से ज्वालामुखी है। महालक्ष्मी, महासरस्वती, मां चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी और माता अन्नपूर्णा की ज्योति भी विद्यमान है। बताया जाता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था।
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