Lok Adalat: नेशनल लोक अदालत में 29433 मामलों का निपटारा कर दावेदारों को दिए 53 करोड़
प्रदेश में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में 36,383 मुकदमों का निपटारा किया गया। सूबे की 133 लोक अदालत बेंचों में 2,85,605 मामले चिह्नित किए गए थे।
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हिमाचल प्रदेश में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में 36,383 मुकदमों का निपटारा किया गया। सूबे की 133 लोक अदालत बेंचों में 2,85,605 मामले चिह्नित किए गए थे। प्रीलीटिगेशन के 85500 मामलों में से 29433 मामलों को निपटारा किया गया। निपटाए गए मामलों के दावेदारों को 53 करोड़ की राशि आवंटित की गई। दो लाख वाहन चालान के मामलों में से सिर्फ 6950 मामलों को निपटाया गया। चालान के कंपाउंडिंग शुल्क के रूप में सरकार को 69,80,100 रुपये की राशि प्राप्त हुई। विशेष ऑनलाइन लोक अदालत के दौरान आम जनता को कंपाउंडिंग शुल्क/जुर्माने के ऑनलाइन भुगतान की सुविधा दी गई थी। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान के मार्गदर्शन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने शनिवार को हिमाचल की सभी अदालतों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया। प्राधिकरण के सचिव प्रेम पाल रांटा ने बताया कि लोक अदालत में लोगों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
समय और पैसा बचाती है लोक अदालत
मामलों का त्वरित विचारण नागरिक का मूल अधिकार है। विचारण अथवा न्याय में विलंब से व्यक्ति की न्यायपालिका के प्रति आस्था में गिरावट आने लगती है। लोक अदालत के जरिये त्वरित विचारण की दिशा में कदम उठाने की अनुशंसा की गई है। यह निर्विवाद है कि लोगों को वर्षों तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। कई बार तो स्थिति यह बन जाती है कि पक्षकार मर जाता है, लेकिन कार्यवाही जीवित रहती है। मुफ्त कानूनी सहायता के प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 39ए में वर्णित किया गया है। वर्ष 1987 में समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं देने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम बनाया गया था। इसके तहत आर्थिक या कमजोर वर्गों को कानूनी सेवा के लिए लोक अदालत का प्रावधान रखा गया है। यह एक जनता की अदालत है जहां आपसी सुलह एवं समझौते से मामले का शीघ्र एवं सस्ते में निपटारा किया जाता है।
लोक अदालत के फैसले को नहीं दे सकते चुनौती
लोक अदालत के निर्णय को सर्वोपरि माना जाता है। इसे किसी भी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। इस निर्णय को सिविल अदालत के निर्णय के समान माना जाता है। 11 मार्च को आयोजित लोक अदालत में निपटाए गए थे 34,978 मामले 11 मार्च को हुई ऑनलाइन लोक अदालत में रिकॉर्ड 34,978 मामले आपसी सहमति से निपटाए गए। 63.73 करोड़ की राशि मामलों के आपसी निपटारे से सक्षम वादियों को उचित मुआवजा भी दिया गया था। वाहन चालान के सिर्फ 4000 मामलों को निपटाया गया, जिससे कंपाउंडिंग शुल्क के रूप में सरकार को 41,42,900 रुपये की राशि मिली थी।