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यहां एक दिन में कटेंगे 40 हजार बकरे, जश्र में डूबेंगे लोग

Sat, 12 Jan 2019 11:10 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 12 Jan 2019 11:10 AM IST
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40 Thousand Goats To Be Sacrificed On Maghi Festival At shillai sirmour himachal pradesh

हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के गिरिपार की सौ से अधिक पंचायतों में माघी पर्व पर लगभग चार करोड़ रुपये से अधिक के बकरे काटे जाएंगे। शुक्रवार शाम से गिरिपार में माघी पर्व का जश्र शुरू हो गया है। पारंपारिक पकवानों की खुशबू से गिरिपार की वादियां महक उठी हैं। शनिवार से बकरों के काटने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इस पर्व को मनाने की परंपरा यहां सदियों से चली आ रही है।

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11 जनवरी को पारंपारिक व्यंजन बनाए गए, जबकि 12 को बकरे काटे जाएंगे। गिरिपार क्षेत्र में माघी पर्व 12 जनवरी से शुरू होगा। इस दिन गिरिपार क्षेत्र के लगभग हर घर में बकरा काटा जाएगा। गिरिपार क्षेत्र में करीब 137 पंचायतें आती हैं। इलाके की आबादी पौने तीन लाख है, जबकि परिवारों की संख्या लगभग 40 हजार। इस हिसाब से 40 हजार बकरे कटेंगे। वर्तमान में बकरों की कीमत पांच हजार से शुरू है।
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इस लिहाजा से गिरिपार क्षेत्र में लगभग चार करोड़ रुपये बकरों के काटे जाने का अनुमान है। यदि पांच हजार रुपये प्रति बकरे की औसत को ही लें तो इनकी कीमत लगभग दो करोड़ रुपये बैठती है। जबकि बकरों की कीमत पांच हजार से शुरू होकर 35-40 हजार रुपये तक भी पहुंच गई है। हाटी समिति के महामंत्री कुंदन शास्त्री ने बताया कि गिरिपार के लगभग 95 फीसदी परिवार माघी पर्व पर बकरे काटते हैं। जो परिवार शाकाहारी हैं वे बकरे नहीं काटते।

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जौनसार बाबर में भी मनाया जाता है पर्व

40 Thousand Goats To Be Sacrificed On Maghi Festival At shillai sirmour himachal pradesh

गिरिपार क्षेत्र के साथ-साथ पड़ोसी राज्य उतराखंड के जौनसार बाबर में भी माघी पर्व मनाने की परंपरा है। पर्व पर गिरिपार क्षेत्र का हर व्यक्ति अपने घर में मौजूद रहता है। जो लोग गिरिपार क्षेत्र से बाहर नौकरी कर रहे हैं, वह भी इस दिन घर लौटते हैं। 11 जनवरी को सभी घरों में पहाड़ी व्यंजन उलौले, तेलपक्की, बडोली बनाई जाती है। जबकि अगले दिन 12 जनवरी से बकरों के काटने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

महाकाली की होती है विशेष पूजा
हाटी समिति के उपाध्यक्ष सुरेंद्र हिंदुस्तानी ने बताया कि गिरिपार क्षेत्र में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। लगभग प्रत्येक परिवार में इस पर्व पर बकरे काटे जाएंगे। इस दिन बाकायदा महाकाली की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बकरे खरीदकर काटते हैं तो कुछ बकरे के बदले में कुछ और सामान देते हैं। जबकि कुछ लोग स्वयं बकरों को माघी के लिए विशेष रूप से पालते हैं।

विवाहिता और मेहमानों को रखा जाता है हिस्सा
माघी पर पर्व बनने वाले पकवान और बकरे के काटे गए मांस का हिस्सा बेटी, बहन आदि को रखा जाता है। जबकि मेहमानों के लिए भी इसी प्रकार से हिस्सा रखा जाता है। हाटी समिति के महामंत्री कुंदन शास्त्री ने बताया कि माघी पर्व पर अपनी बेटी या बहन आदि को गुड़ भेजा जाता है। जबकि उसके लिए मांस अलग से रखा जाता है। जो मायके आने पर उसे परोसने की परंपरा है।

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