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रिज टैंक को बचाने की कवायद, शिमला पहुंची बेल्जियम और दिल्ली की कंपनियां

Thu, 02 May 2019 11:28 AM IST
शिमला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Thu, 02 May 2019 11:28 AM IST
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रिज टैंक को बचाने के लिए शिमला पहुंची दो कंपनियां
फाइल फोटो

ऐतिहासिक रिज मैदान पर हो रहे धंसाव के चलते स्टोरेज टैंक को पैदा खतरे का समाधान निकालने के लिए दो कंपनियां शिमला पहुंच गई हैं। यह कंपनियां अगले दो दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट पेयजल कंपनी को देंगी। बुधवार को भी इन कंपनियों की टीमों ने रिज मैदान का जायजा लिया। पेयजल कंपनी के अनुसार निरीक्षण पर आई एक कंपनी एडी कोज बेल्जियम की है जबकि दूसरी शिल्पी टेक नई दिल्ली की है।

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बुधवार को इन टीमों के विशेषज्ञों ने टैंक के अलावा रिज के उन हिस्सों का भी निरीक्षण किया है जिनके लगातार धंसने से रिज मैदान को खतरा पैदा हो गया है। लक्कड़ बाजार और रिवोली वाले हिस्से में लगातार धंसाव के चलते टैंक को भी खतरा पैदा हुआ है। रिज टैंक में पड़ी दरारें भरने के लिए पेयजल कंपनी ने ऐसी फर्मों को टेंडर देने की तैयारी की है जिन्हें पहले भी इस तरह के काम का अनुभव हो। इसलिए कंपनियों को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट देने को कहा गया है। अभी दो कंपनियां शिमला पहुंची हैं।
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रिज टैंक की छत और दीवारों में पड़ी हैं दरारें
टैंक की छत और दीवारों में बड़ी दरारें पड़ने से रिज टैंक को खतरा पैदा हो गया है। यह दरारें साल 2018 में टैंक की सफाई के दौरान पहली बार देखी गई थी। लेकिन छत से शुरू हुई ये दरारें अब दीवारों पर भी देखी जा सकती हैं। हालांकि, पेयजल कंपनी दावा कर रही है कि अब दरारें स्थिर हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर इसे भरना जरूरी है। इसीलिए कंपनियां बुलाई जा रही हैं। टैंक पर रैलियां करने पर भी रोक लगाने की मांग की है। पेयजल कंपनी के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र गिल का कहना है कि दो कंपनियों ने संपर्क किया है। इनके प्रपोजल देखने के बाद आगामी फैसला लिया जाएगा।
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अंग्रेजों ने बनाया था रिज टैंक
ऐतिहासिक रिज मैदान स्थित यह स्टोरेज टैंक अंग्रेजों ने साल 1880 में बनाया था। टैंक को इतनी मजबूती से बनाया गया है कि 140 सालों से यह शिमला के कोर एरिया के हजारों लोगों की प्यास बुझाता आ रहा है। करीब 45 लाख लीटर क्षमता वाले इस टैंक के अंदर अलग-अलग चैंबर बने हैं। रिज के एक हिस्से के धंसने, भारी वाहनों के चलने के कारण टैंक के एक हिस्से में दरारें देखी गई हैं।

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