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Shimla News: जिले में बारिश से 300 करोड़ का नुकसान, 500 सड़कें बंद
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पांच सौ ट्रांसफार्मर खराब, सैकड़ों गांव में बिजली गुल
300 छोटी बड़ी पेयजल परियोजनाएं भी बंद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में बारिश से 48 घंटे के भीतर करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पांच सौ संपर्क मार्ग भूस्खलन के कारण बंद पड़े हैं। इसके अलावा बिजली के पांच सौ ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं जिस वजह से सैकड़ों गांव में बिजली गुल है।
पानी की तीन सौ बड़ी और छोटी पेयजल परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। इस वजह से जिले में पानी का संकट भी गहरा गया है। ऊपरी शिमला में संपर्क मार्ग बंद होने से बागवानों को चिंता सताने लगी है। सेब सीजन शुरू हो चुका है और फल मंडी तक सेब पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। मंगलवार को मौसम साफ होने के बाद प्रशासन की ओर से व्यवस्था को पटरी पर लाने की मुहिम शुरू कर दी है। जिले में मौजूदा समय में जनजीवन अस्तव्यस्त है और इसे ठीक होने में तीन से चार सप्ताह का समय लग सकता है। कई जगह पुल टूट चुके हैं और सड़कें बंद हैं। इन सड़कों को पूरी तरह दुरुस्त करने में तीन से चार माह का वक्त लग सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह बजट का न होना। जिले को राज्य सरकार की ओर से इस संकट से उभारने के लिए कोई विशेष पैकेज जारी नहीं किया है। अब इस आपदा से पार पाने के लिए राज्य सरकार केंद्र से मदद मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। केंद्र से जब राहत राशि जारी होगी उसी के बाद मरम्मत कार्य शुरू हो पाएंगे। लिहाजा जिले के लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है।
बिजली और पानी बहाल करना प्राथमिकता : डीसी
उपायुक्त आदित्य नेगी ने कहा कि अब तक की जानकारी के मुताबिक करीब तीन सौ करोड़ का नुकसान हुआ है। सड़कों को खोला जा रहा है। बिजली बोर्ड और जल शक्ति विभाग को निर्देश जारी किए हैं कि वह व्यवस्था जल्द से जल्द पटरी पर लाएं।
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300 छोटी बड़ी पेयजल परियोजनाएं भी बंद
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिले में बारिश से 48 घंटे के भीतर करीब 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। पांच सौ संपर्क मार्ग भूस्खलन के कारण बंद पड़े हैं। इसके अलावा बिजली के पांच सौ ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं जिस वजह से सैकड़ों गांव में बिजली गुल है।
पानी की तीन सौ बड़ी और छोटी पेयजल परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। इस वजह से जिले में पानी का संकट भी गहरा गया है। ऊपरी शिमला में संपर्क मार्ग बंद होने से बागवानों को चिंता सताने लगी है। सेब सीजन शुरू हो चुका है और फल मंडी तक सेब पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा। मंगलवार को मौसम साफ होने के बाद प्रशासन की ओर से व्यवस्था को पटरी पर लाने की मुहिम शुरू कर दी है। जिले में मौजूदा समय में जनजीवन अस्तव्यस्त है और इसे ठीक होने में तीन से चार सप्ताह का समय लग सकता है। कई जगह पुल टूट चुके हैं और सड़कें बंद हैं। इन सड़कों को पूरी तरह दुरुस्त करने में तीन से चार माह का वक्त लग सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह बजट का न होना। जिले को राज्य सरकार की ओर से इस संकट से उभारने के लिए कोई विशेष पैकेज जारी नहीं किया है। अब इस आपदा से पार पाने के लिए राज्य सरकार केंद्र से मदद मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। केंद्र से जब राहत राशि जारी होगी उसी के बाद मरम्मत कार्य शुरू हो पाएंगे। लिहाजा जिले के लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम है।
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बिजली और पानी बहाल करना प्राथमिकता : डीसी
उपायुक्त आदित्य नेगी ने कहा कि अब तक की जानकारी के मुताबिक करीब तीन सौ करोड़ का नुकसान हुआ है। सड़कों को खोला जा रहा है। बिजली बोर्ड और जल शक्ति विभाग को निर्देश जारी किए हैं कि वह व्यवस्था जल्द से जल्द पटरी पर लाएं।
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