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Shimla News: ऋण न चुकाने पर 3 महीने की कैद, 1.90 लाख का जुर्माना
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अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का फैसला
सिरमौर के व्यक्ति ने व्यवसाय चलाने के लिए था ऋण
अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से लिया था ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में जिला सिरमौर के तहसील पांवटा साहिब निवासी अशोक कुमार को दोषी करार देते हुए तीन महीने की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 2.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। दोषी ने 5 लाख रुपये का ऋण लिया था जिसे वह ब्याज सहित चुकाने में असमर्थ रहा।
एनआई एक्ट का यह मामला कसुम्पटी स्थित हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम का है। साल 2021 में आरोपी ने व्यवसाय चलाने के लिए निगम से ऋण लिया था। आरोपी ने 6 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ ऋण चुकाने पर सहमति व्यक्त की। 8 फरवरी 2021 को आरोपी ने ऋण चुकाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के पक्ष में 1,99,706 राशि का चेक जारी किया, लेकिन बैंक खाते में अपर्याप्त धन के कारण चेक बाउंस हो गया। 15 दिन की अवधि के भीतर कानूनी नोटिस देने के बावजूद राशि के भुगतान नहीं किया। 17 अप्रैल 2021 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने एनआई एक्ट के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते फैसला सुनाया है।
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सिरमौर के व्यक्ति ने व्यवसाय चलाने के लिए था ऋण
अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम से लिया था ऋण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिला अदालत ने चेक बाउंस मामले में जिला सिरमौर के तहसील पांवटा साहिब निवासी अशोक कुमार को दोषी करार देते हुए तीन महीने की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही 2.70 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कुमार की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। दोषी ने 5 लाख रुपये का ऋण लिया था जिसे वह ब्याज सहित चुकाने में असमर्थ रहा।
एनआई एक्ट का यह मामला कसुम्पटी स्थित हिमाचल प्रदेश अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम का है। साल 2021 में आरोपी ने व्यवसाय चलाने के लिए निगम से ऋण लिया था। आरोपी ने 6 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ ऋण चुकाने पर सहमति व्यक्त की। 8 फरवरी 2021 को आरोपी ने ऋण चुकाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक के पक्ष में 1,99,706 राशि का चेक जारी किया, लेकिन बैंक खाते में अपर्याप्त धन के कारण चेक बाउंस हो गया। 15 दिन की अवधि के भीतर कानूनी नोटिस देने के बावजूद राशि के भुगतान नहीं किया। 17 अप्रैल 2021 को निर्धारित समय में कर्ज न चुकाने पर शिकायतकर्ता ने एनआई एक्ट के तहत न्यायालय के समक्ष केस दायर किया था। न्यायालय में केस के दौरान दोनों पक्षों की ओर दलीलें दी गई और सबूतों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते फैसला सुनाया है।
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