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चिनाब नदी पर बनेंगी 2500 मेगावाट की बिजली परियोजनाएं
Sat, 06 Feb 2021 11:12 AM IST
Krishan Singh
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल-स्पीति)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 06 Feb 2021 11:12 AM IST
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चंद्रा और भागा नदियों का संगम स्थल।
विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही जयराम सरकार ने अब जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में बहने वाली चंद्रा और भागा नदी के दोहन की तैयारी कर ली है। चंद्रा और भागा नदी के संगम से चिनाब नदी बनती है, जो कि हिमाचल की सबसे गहरी और अधिक जल क्षमता वाली नदी है। सरकार ने इस नदी से 2500 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की योजना बनाई है। पहले चरण में सरकार ने 1600 मेगावाट के आधा दर्जन प्रोजेक्ट आवंटित कर दिए हैं। ज्ञात रहे कि चंद्रा और भागा नदी पर अभी तक कोई भी बिजली प्रोजेक्ट नहीं बना है।
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प्रारंभिक चरण में सरकार ने सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन), नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कारपोरेशन (एनएचपीसी), हिंदुस्तान पावर कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन (एनटीपीसी) जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की नामी बिजली कंपनियों को लगभग 1600 मेगावाट क्षमता के आधा दर्जन प्रोजेक्ट आवंटित किए हैं।
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इनमें लाहौल में 104 मेगावाट के तांदी, 130 मेगावाट के राशिल और 126 मेगावाट के बरदंग विद्युत प्रोजेक्ट एसजेवीएन को आवंटित किए गए हैं। 400 मेगावाट का शैली और 120 का मयाड़ प्रोजेक्ट एनटीपीसी, 300 मेगावाट का जिस्पा प्रोजेक्ट एचपीसीएल को आवंटित किया है। इसके अलावा एनएचपीसी को चंबा के किलाड़ में चिनाब नदी पर ही 400 मेगावाट का डोगरी प्रोजेक्ट दिया गया है। (संवाद)
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बिजली प्रोजेक्टों से बिगड़ेगा पर्यावरण संतुलन
लाहौल-स्पीति में हिमाचल ही नहीं, देश के सबसे बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं। 25 किमी लंबा बड़ा शिगड़ी के अलावा, गंगस्टांग, कांगला, घेपन, कगटी समेत कई अन्य ग्लेशियर उत्तरी भारत के लिए पानी मुहैया करते हैं। जिस्पा बांध संघर्ष समिति के संयोजक रिगजिन हायरपा कहते हैं कि चंद्रभागा नदी पर बिजली प्रोजेक्टों के निर्माण से घाटी का पर्यावरण संतुलन बिगड़ेगा। शैली बांध संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट सुदर्शन ठाकुर का कहना है कि लाहौल घाटी पहले ही भूकंप संवेदनशील क्षेत्र में आता है। विद्युत परियोजनाओं के निर्माण से इलाके में बड़ी प्राकृतिक आपदा आ सकती है।
पुलवामा हमले के बाद लिया गया प्रोजेक्ट बनाने का फैसला
बता दें कि चिनाब नदी लाहौल से जम्मू-कश्मीर और वहां से पाकिस्तान में पहुंचती है। लाहौल में प्रोजेक्ट इस कारण भी नहीं बने कि पाकिस्तान इस मसले को उठाता रहा है कि इससे नदी का पानी कम हो जाएगा। भारत पड़ोसी देश होने का धर्म निभाता भी रहा, लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने तय किया था कि अब हम चिनाब नदी पर बिजली प्रोजेक्ट बनाएंगे।