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ग्रामीण क्षेत्र का पानी शहर को दिया तो आंदोलन : विक्रमादित्य
Updated Fri, 11 May 2018 09:48 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में पेयजल संकट को दूर करने के लिए सरकार और निगम के सैंज-घंडल पेयजल परियोजना से पानी की आपूर्ति किए जाने के फैसले पर सियासत गर्मा गई है। शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य ने दोटूक कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र की 45 पंचायतों की पेयजल परियोजना से शहर को स्थायी रूप से पेयजल आपूर्ति किसी सूरत में मंजूर नहीं होगी। फिलहाल जब तक उनके ग्रामीण क्षेत्र की पंचायतों में पेयजल संकट नहीं है, तब तक नगर निगम के टुटू, कच्चीघाटी, बालुगंज और मज्याठ में संकट से निपटने के लिए अस्थायी व्यवस्था करेगा तो इस पर कोई आपत्ति नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल संकट बढ़ने से इस परियोजना से पानी नहीं दिया जाएगा। यदि सरकार ने ऐसा करने का प्रयास किया तो वे क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इन चार वार्डों में पेयजल की नियमित और स्थायी तौर पर आपूर्ति देना भाजपा शासित नगर निगम और प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। प्रदेश सरकार और नगर निगम पूर्व प्रदेश सरकार के कार्यकाल में वर्ल्ड बैंक के अनुदान से बनाई गई 800 करोड़ की पेयजल परियोजना का कार्य जल्द पूरा करे और शहर को पानी की आपूर्ति करे। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र की 45 पंचायतों के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने 105 करोड़ रुपये खर्च कर सैंज खड्ड-घरोग -घंडल परियोजना का कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा करवाकर इसे जनता को समर्पित किया था। इससे शहर को पानी दिए जाने पर उनके क्षेत्र में संकट गहरा सकता है। जो मंजूर नहीं होगा।
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आईपीएच मंत्री से भी कर चुके हैं बात
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस मामले को लेकर वे आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर से बात कर चुके हैं। बावजूद यदि शिमला ग्रामीण की जनता के संकट की अनदेखी की गई और शहर को आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था करने का प्रयास हुआ तो जनता सड़कों पर उतरेगी।
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शिमला। शहर में पेयजल संकट को दूर करने के लिए सरकार और निगम के सैंज-घंडल पेयजल परियोजना से पानी की आपूर्ति किए जाने के फैसले पर सियासत गर्मा गई है। शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य ने दोटूक कहा है कि ग्रामीण क्षेत्र की 45 पंचायतों की पेयजल परियोजना से शहर को स्थायी रूप से पेयजल आपूर्ति किसी सूरत में मंजूर नहीं होगी। फिलहाल जब तक उनके ग्रामीण क्षेत्र की पंचायतों में पेयजल संकट नहीं है, तब तक नगर निगम के टुटू, कच्चीघाटी, बालुगंज और मज्याठ में संकट से निपटने के लिए अस्थायी व्यवस्था करेगा तो इस पर कोई आपत्ति नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल संकट बढ़ने से इस परियोजना से पानी नहीं दिया जाएगा। यदि सरकार ने ऐसा करने का प्रयास किया तो वे क्षेत्र की जनता के साथ मिलकर आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इन चार वार्डों में पेयजल की नियमित और स्थायी तौर पर आपूर्ति देना भाजपा शासित नगर निगम और प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। प्रदेश सरकार और नगर निगम पूर्व प्रदेश सरकार के कार्यकाल में वर्ल्ड बैंक के अनुदान से बनाई गई 800 करोड़ की पेयजल परियोजना का कार्य जल्द पूरा करे और शहर को पानी की आपूर्ति करे। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र की 45 पंचायतों के लिए पूर्व कांग्रेस सरकार ने 105 करोड़ रुपये खर्च कर सैंज खड्ड-घरोग -घंडल परियोजना का कार्य रिकॉर्ड समय में पूरा करवाकर इसे जनता को समर्पित किया था। इससे शहर को पानी दिए जाने पर उनके क्षेत्र में संकट गहरा सकता है। जो मंजूर नहीं होगा।
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आईपीएच मंत्री से भी कर चुके हैं बात
विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि इस मामले को लेकर वे आईपीएच मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर से बात कर चुके हैं। बावजूद यदि शिमला ग्रामीण की जनता के संकट की अनदेखी की गई और शहर को आपूर्ति की स्थायी व्यवस्था करने का प्रयास हुआ तो जनता सड़कों पर उतरेगी।
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