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कचरा प्रबंधन में 12 सरकारी महकमे फेल
Updated Tue, 12 Dec 2017 10:38 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में सफाई व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। प्लास्टिक और गैर बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल शहर में जगह-जगह फैला है, जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा हैं। 2009 में पर्यावरण, विज्ञान प्रौैद्योगिकी विभाग ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें 11 विभागों को प्लास्टिक और गैर बायोडिग्रेडेबल कूूड़े कचरे की व्यवस्था का जिम्मा सौंपा था, लेकिन कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर ये सरकारी महकमे फेल हो गए हैं।
बायोडिग्रेडेबल गाबरेज एक्ट 1995 के अनुसार पर्यावरण विभाग की ओर से जिला प्रशासन (उपायुक्त, एडीसी, एडीएम, एसडीएम तहसीलदार, नायब तहसीलदार), पुलिस विभाग (एसपी, एएसपी, डीएसपी), नगर निगम (आयुक्त, सहायक आयुक्त), अस्पताल (मुख्य चिकित्सा अधिकारी), आबकारी एवं कराधान अधिकारी, वन विभाग (डीएफओ, रेंज अधिकारी, उप रेेेेेंज अधिकारी), पर्यटन विभाग (सहायक असिस्टेंट), भोजन और आपूर्ति नियंत्रण विभाग, नगरपालिका काउंसिल (कार्यकारी अधिकारी), पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड (पर्यावरण अभियंता, सहायक पर्यावरण अभियंता) अधिकारियों को किसी भी प्रकार के प्लास्टिक और गैर बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल कूड़ा कचरा फैलाने वालों के चालान करने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इसके अलावा इन विभागों को हर महीने पर्यावरण विभाग को संबंधित रिपोर्ट देनी आवश्यक है, लेकिन विभागों की ओर से पिछले पांच साल में इस संबंध में एक भी चालान नहीं किया गया है। मौजूदा समय में शहर में बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल जंगलों में फेंका जा रहा है।
जिलाधीश को किया गया सूचित
विभागों के अधिकारियों को बायोडिग्रेडेबल कचरा फैलाने वालों के खिलाफ चालान करने की शक्तियां दे रखी हैं। बावजूद इन विभागों की ओर से पिछले पांच सालों में इन कचरा फैलाने वालों का एक भी चालान नहीं किया गया है। वहीं, जिलाधीश को समय-समय पर पत्राचार के माध्यम से इसके बारे में सूचित किया जाता है।
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अर्चना धवन, निदेशक पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग।
उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि बायोडिग्रेडेबल गारबेज एक्ट में चालान करने का अधिकार नगर निगम को दे रखा है। उधर, आयुक्त नगर निगम शिमला जीसी नेगी ने कहा कि नगर निगम एक्ट के तहत चलान किए गए हैं। पर्यावरण विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग को जाने वाली रिपोर्ट के बारे में नहीं बता पाऊंगा।
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शिमला। शहर में सफाई व्यवस्था बद से बदतर होती जा रही है। प्लास्टिक और गैर बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल शहर में जगह-जगह फैला है, जिसका सीधा असर पर्यावरण पर पड़ रहा हैं। 2009 में पर्यावरण, विज्ञान प्रौैद्योगिकी विभाग ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर एक अधिसूचना जारी की थी जिसमें 11 विभागों को प्लास्टिक और गैर बायोडिग्रेडेबल कूूड़े कचरे की व्यवस्था का जिम्मा सौंपा था, लेकिन कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर ये सरकारी महकमे फेल हो गए हैं।
बायोडिग्रेडेबल गाबरेज एक्ट 1995 के अनुसार पर्यावरण विभाग की ओर से जिला प्रशासन (उपायुक्त, एडीसी, एडीएम, एसडीएम तहसीलदार, नायब तहसीलदार), पुलिस विभाग (एसपी, एएसपी, डीएसपी), नगर निगम (आयुक्त, सहायक आयुक्त), अस्पताल (मुख्य चिकित्सा अधिकारी), आबकारी एवं कराधान अधिकारी, वन विभाग (डीएफओ, रेंज अधिकारी, उप रेेेेेंज अधिकारी), पर्यटन विभाग (सहायक असिस्टेंट), भोजन और आपूर्ति नियंत्रण विभाग, नगरपालिका काउंसिल (कार्यकारी अधिकारी), पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड (पर्यावरण अभियंता, सहायक पर्यावरण अभियंता) अधिकारियों को किसी भी प्रकार के प्लास्टिक और गैर बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल कूड़ा कचरा फैलाने वालों के चालान करने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। इसके अलावा इन विभागों को हर महीने पर्यावरण विभाग को संबंधित रिपोर्ट देनी आवश्यक है, लेकिन विभागों की ओर से पिछले पांच साल में इस संबंध में एक भी चालान नहीं किया गया है। मौजूदा समय में शहर में बायोडिग्रेडेबल मैटीरियल जंगलों में फेंका जा रहा है।
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जिलाधीश को किया गया सूचित
विभागों के अधिकारियों को बायोडिग्रेडेबल कचरा फैलाने वालों के खिलाफ चालान करने की शक्तियां दे रखी हैं। बावजूद इन विभागों की ओर से पिछले पांच सालों में इन कचरा फैलाने वालों का एक भी चालान नहीं किया गया है। वहीं, जिलाधीश को समय-समय पर पत्राचार के माध्यम से इसके बारे में सूचित किया जाता है।
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अर्चना धवन, निदेशक पर्यावरण, विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग।
उपायुक्त रोहन चंद ठाकुर ने कहा कि बायोडिग्रेडेबल गारबेज एक्ट में चालान करने का अधिकार नगर निगम को दे रखा है। उधर, आयुक्त नगर निगम शिमला जीसी नेगी ने कहा कि नगर निगम एक्ट के तहत चलान किए गए हैं। पर्यावरण विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग को जाने वाली रिपोर्ट के बारे में नहीं बता पाऊंगा।