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दादा-पिता की राह पर चले राजीव गौतम
Updated Mon, 23 Oct 2017 06:18 PM IST
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पंकज चब्बा
संतोषगढ़ (ऊना)।
कांग्रेस प्रत्याशी के रूप मे ऊना विस क्षेत्र से टिकट न मिलने से खिन्न कांग्रेसी नेता और कांगड़ा सहकारी बैंक के निदेशक राजीव गौतम ने सोमवार को आजाद प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस से टिकट न मिलने से इससे पहले राजीव गौतम के दादा और पिता ऊना विस क्षेत्र से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के वफादारों में गिने जाते रहे कांग्रेसी नेता स्व. वीरेंद्र गौतम के पुत्र एडवोकेट राजीव गौतम ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिया है। गौतम परिवार के पुराने इतिहास पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो साफ जाहिर है कि कांग्रेस से टिकट न मिलने की सूरत में आजाद प्रत्याशी के रूप में ही गौतम परिवार के लोगों ने आजाद तौर पर चुनाव लड़े । 1977 में देश में इमरजेंसी के समय चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार रहे देसराज ठाकुर के खिलाफ सुरेंद्र नाथ गौतम ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। इसमें जनता पार्टी के देसराज ने 2687 मतों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल की। सुरेंद्र नाथ गौतम के बेटे वीरेंद्र गौतम ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत 1985 के विस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में की। इस चुनाव में गौतम ने बीजेपी के देसराज को हरा कर पहली बार विधानसभा में कदम रखा। 1990 का चुनाव गौतम भाजपा के देसराज से हार गए। 1993 में प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के बाद हुए चुनाव में गौतम कांग्रेस का टिकट हासिल नहीं कर पाए। कांग्रेस ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के प्रेस सचिव रहे ओपी रतन को टिकट दे दिया। दूसरी ओर वीरेंद्र गौतम ने इस चुनाव में कांग्रेस का दामन छोड़ कर आजाद तौर पर चुनाव लड़ा। इसमें गौतम कांग्रेस के ओपी रतन से 702 मतों के अंतर से चुनाव हार गए। कांग्रेस में वापसी के बाद गौतम 1998 का चुनाव जीते। 2003 एवं 2007 का चुनाव भाजपा के सतपाल सत्ती से हार गए। 2017 के चुनाव में पूर्व विधायक के पुत्र राजीव गौतम इसी सियासी राह पर चल पड़े हैं।
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संतोषगढ़ (ऊना)।
कांग्रेस प्रत्याशी के रूप मे ऊना विस क्षेत्र से टिकट न मिलने से खिन्न कांग्रेसी नेता और कांगड़ा सहकारी बैंक के निदेशक राजीव गौतम ने सोमवार को आजाद प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया। कांग्रेस से टिकट न मिलने से इससे पहले राजीव गौतम के दादा और पिता ऊना विस क्षेत्र से आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के वफादारों में गिने जाते रहे कांग्रेसी नेता स्व. वीरेंद्र गौतम के पुत्र एडवोकेट राजीव गौतम ने पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ नामांकन दाखिल कर दिया है। गौतम परिवार के पुराने इतिहास पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो साफ जाहिर है कि कांग्रेस से टिकट न मिलने की सूरत में आजाद प्रत्याशी के रूप में ही गौतम परिवार के लोगों ने आजाद तौर पर चुनाव लड़े । 1977 में देश में इमरजेंसी के समय चुनाव में जनता पार्टी के उम्मीदवार रहे देसराज ठाकुर के खिलाफ सुरेंद्र नाथ गौतम ने आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। इसमें जनता पार्टी के देसराज ने 2687 मतों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल की। सुरेंद्र नाथ गौतम के बेटे वीरेंद्र गौतम ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरूआत 1985 के विस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में की। इस चुनाव में गौतम ने बीजेपी के देसराज को हरा कर पहली बार विधानसभा में कदम रखा। 1990 का चुनाव गौतम भाजपा के देसराज से हार गए। 1993 में प्रदेश में राष्ट्रपति शासन के बाद हुए चुनाव में गौतम कांग्रेस का टिकट हासिल नहीं कर पाए। कांग्रेस ने पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के प्रेस सचिव रहे ओपी रतन को टिकट दे दिया। दूसरी ओर वीरेंद्र गौतम ने इस चुनाव में कांग्रेस का दामन छोड़ कर आजाद तौर पर चुनाव लड़ा। इसमें गौतम कांग्रेस के ओपी रतन से 702 मतों के अंतर से चुनाव हार गए। कांग्रेस में वापसी के बाद गौतम 1998 का चुनाव जीते। 2003 एवं 2007 का चुनाव भाजपा के सतपाल सत्ती से हार गए। 2017 के चुनाव में पूर्व विधायक के पुत्र राजीव गौतम इसी सियासी राह पर चल पड़े हैं।