{"_id":"5b1423fd4f1c1ba36e8b608e","slug":"181528046589-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आईजीएमसी के चिकित्सकों ने 15 मिनट में कर दिया दिल के छेद का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आईजीएमसी के चिकित्सकों ने 15 मिनट में कर दिया दिल के छेद का इलाज
Updated Sun, 03 Jun 2018 10:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला।
आईजीएमसी के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने सोलह साल की लड़की के दिल में छेद का इलाज महज पंद्रह मिनट में बिना सर्जरी के किया। लड़की का दिल उल्टी दिशा में था। इसमें छेद था। डॉक्टरों ने लड़की के दिल के छेद को भरने के लिए सेप्टल आक्यूलेडर डिवाइस फिट किया है। कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों का दावा है इस तकनीक से इलाज का यह पहला मामला है।
मंडी जिले की रहने वाली नेहा साइनस और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित है। पल्मोनरी विभाग के चिकित्सक लड़की का इलाज कर रहे थे। जब दिल और शरीर के अन्य अंगों के बदलाव के बारे में जानकारी मिली तो उसे कार्डियोलॉजी विभाग में रेफर किया गया। डॉक्टरों ने लड़की का एक्सरे और ईको टेस्ट करवाया। कार्डियोलाजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरविंद कंदौरिया तथा उनकी टीम ने लड़की का सफल ऑपरेशन किया और चौबीस घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इससे पहले लड़की का मंडी के क्षेत्रीय अस्पताल में इलाज चल रहा था। लड़की को आईजीएमसी रेफर किया गया था।
...
चिकित्सकों की टीम
वरिष्ठ डॉक्टर अरविंद कंदौरिया के साथ एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज गंजू, सीनियर रेजिडेंट डॉ. नरेश गौर व डॉ. सचिन सोंधी ने सहयोग दिया।
विज्ञापन
शिमला।
आईजीएमसी के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने सोलह साल की लड़की के दिल में छेद का इलाज महज पंद्रह मिनट में बिना सर्जरी के किया। लड़की का दिल उल्टी दिशा में था। इसमें छेद था। डॉक्टरों ने लड़की के दिल के छेद को भरने के लिए सेप्टल आक्यूलेडर डिवाइस फिट किया है। कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों का दावा है इस तकनीक से इलाज का यह पहला मामला है।
मंडी जिले की रहने वाली नेहा साइनस और फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित है। पल्मोनरी विभाग के चिकित्सक लड़की का इलाज कर रहे थे। जब दिल और शरीर के अन्य अंगों के बदलाव के बारे में जानकारी मिली तो उसे कार्डियोलॉजी विभाग में रेफर किया गया। डॉक्टरों ने लड़की का एक्सरे और ईको टेस्ट करवाया। कार्डियोलाजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अरविंद कंदौरिया तथा उनकी टीम ने लड़की का सफल ऑपरेशन किया और चौबीस घंटे डॉक्टरों की निगरानी में रखने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विज्ञापन
इससे पहले लड़की का मंडी के क्षेत्रीय अस्पताल में इलाज चल रहा था। लड़की को आईजीएमसी रेफर किया गया था।
...
चिकित्सकों की टीम
वरिष्ठ डॉक्टर अरविंद कंदौरिया के साथ एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नीरज गंजू, सीनियर रेजिडेंट डॉ. नरेश गौर व डॉ. सचिन सोंधी ने सहयोग दिया।