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कुलपति की स्थायी नियुक्ति नहीं की तो आंदोलन
Updated Thu, 22 Feb 2018 09:56 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार को 28 फरवरी तक हर हाल में कुलपति, अधिष्ठाता अध्ययन, कुलसचिव, डीन प्लानिंग सहित सभी प्रशासनिक पदों पर स्थायी नियुक्ति करने का अल्टीमेटम दिया है। एसएफआई के नेताओं ने चेताया है कि यदि इन पदों पर नियुक्तियां न हुई तो एसएफआई एचपीयू परिसर में सरकार के खिलाफ निर्णायक आंदोलन खड़ा करेगी। वीरवार को विवि में पत्रकारों से बातचीत करते हुए इकाई अध्यक्ष जीवन ठाकुर और सचिव अनिल नेगी सहित अन्य मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार को सत्ता संभाले दो माह बीतने को हैं।
अभी तक सरकार एक कुलपति तक की स्थायी रूप से तैनाती नहीं कर पाई है। सरकार के बदल जाने के बाद ईसी भी निष्किय ही है। इसके लिए कार्यकाल पूरा होने पर सरकार और राज्यपाल की ओर से सदस्य मनोनयन नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय में 11 जनवरी से अकादमिक मामलों के मुखिया डीएस तक का पद रिक्त चल रहा है। कार्यवाहक कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी डीएसडब्लू को न सौंप कर अपने पास रखी है।
इसके चलते 19 फरवरी को खुले विश्वविद्यालय में विधि विभाग को छोड़ अन्य विभागों में कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। कक्षाओं का शेड्यूल तक फाइनल नहीं हुआ है। कु लपति और कुलसचिव दोनों प्रशासनिक मुखियाओं के पदों पर काम चलाऊ इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय का हर प्रशासनिक अकादमिक मामलों पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा है। इससे पेश आ रही समस्याओं को गिनाते हुए जीवन ने कहा कि छात्रावासों में मेस शुरू नहीं हुई है। स्थायी डीएस न होने से विभागों में कक्षाओं का शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया की तैयारियां भी राम भरोसे ही चल रही हैं। यूजी छात्रों की रिवेल्यूएशन और रि-अपीयर की सुविधा देने सहित छात्रावास मरम्मत कार्य पूरा करवाने के साथ ही सभी उठाई गई मांगे पूरी नहीं की गई है।
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चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए हो रहा काम
एसएफआई नेताओं ने कहा कि एक ओर पदों पर बिठाए अधिकारी शक्तियां न होने का बहाना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चहेतों को लाभ देने के लिए धांधली हो रही है। ग्यारह माह में पीएचडी करवाने का मामला इसका उदाहरण है। इसमें डीन, विभागाध्यक्ष और गाइड एक ही व्यक्ति ने पूर्व वीसी के बेटे को ग्यारह माह में कुलपति से थिसीज जमा करवाने की अनुमति दिलवा दी। पूर्व में ईसी के दो सदस्यों ने पद के प्रभाव में चहेतों को पीएचडी में प्रवेश दिलवाया है, जिसकी न तो आज तक जांच हुई और न ही प्रवेश रद़द करवाया गया।
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शिमला। एसएफआई की विश्वविद्यालय इकाई ने प्रदेश में सत्तासीन भाजपा सरकार को 28 फरवरी तक हर हाल में कुलपति, अधिष्ठाता अध्ययन, कुलसचिव, डीन प्लानिंग सहित सभी प्रशासनिक पदों पर स्थायी नियुक्ति करने का अल्टीमेटम दिया है। एसएफआई के नेताओं ने चेताया है कि यदि इन पदों पर नियुक्तियां न हुई तो एसएफआई एचपीयू परिसर में सरकार के खिलाफ निर्णायक आंदोलन खड़ा करेगी। वीरवार को विवि में पत्रकारों से बातचीत करते हुए इकाई अध्यक्ष जीवन ठाकुर और सचिव अनिल नेगी सहित अन्य मौजूद पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार को सत्ता संभाले दो माह बीतने को हैं।
अभी तक सरकार एक कुलपति तक की स्थायी रूप से तैनाती नहीं कर पाई है। सरकार के बदल जाने के बाद ईसी भी निष्किय ही है। इसके लिए कार्यकाल पूरा होने पर सरकार और राज्यपाल की ओर से सदस्य मनोनयन नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय में 11 जनवरी से अकादमिक मामलों के मुखिया डीएस तक का पद रिक्त चल रहा है। कार्यवाहक कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान ने पद की अतिरिक्त जिम्मेदारी डीएसडब्लू को न सौंप कर अपने पास रखी है।
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इसके चलते 19 फरवरी को खुले विश्वविद्यालय में विधि विभाग को छोड़ अन्य विभागों में कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। कक्षाओं का शेड्यूल तक फाइनल नहीं हुआ है। कु लपति और कुलसचिव दोनों प्रशासनिक मुखियाओं के पदों पर काम चलाऊ इंतजाम किए गए हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय का हर प्रशासनिक अकादमिक मामलों पर कोई फैसला नहीं हो पा रहा है। इससे पेश आ रही समस्याओं को गिनाते हुए जीवन ने कहा कि छात्रावासों में मेस शुरू नहीं हुई है। स्थायी डीएस न होने से विभागों में कक्षाओं का शेड्यूल जारी नहीं हुआ है। नए सत्र की प्रवेश प्रक्रिया की तैयारियां भी राम भरोसे ही चल रही हैं। यूजी छात्रों की रिवेल्यूएशन और रि-अपीयर की सुविधा देने सहित छात्रावास मरम्मत कार्य पूरा करवाने के साथ ही सभी उठाई गई मांगे पूरी नहीं की गई है।
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चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए हो रहा काम
एसएफआई नेताओं ने कहा कि एक ओर पदों पर बिठाए अधिकारी शक्तियां न होने का बहाना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चहेतों को लाभ देने के लिए धांधली हो रही है। ग्यारह माह में पीएचडी करवाने का मामला इसका उदाहरण है। इसमें डीन, विभागाध्यक्ष और गाइड एक ही व्यक्ति ने पूर्व वीसी के बेटे को ग्यारह माह में कुलपति से थिसीज जमा करवाने की अनुमति दिलवा दी। पूर्व में ईसी के दो सदस्यों ने पद के प्रभाव में चहेतों को पीएचडी में प्रवेश दिलवाया है, जिसकी न तो आज तक जांच हुई और न ही प्रवेश रद़द करवाया गया।