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प्राइवेट बस ऑपरेटराें ने दर्जनों रूटों पर नहीं चलाई बसें, लोग हुए परेशान
Updated Mon, 29 Jan 2018 09:45 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। संडे को प्राइवेट बस ऑपरेटरों की मनमर्जी के कारण शहर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को शहर में प्राइवेट बस ऑपरेटराें ने दर्जनों रूटों पर पर बसें नहीं चलाई। हालांकि नियमों के अनुसार बस ऑपरेटरों को हफ्ते के सभी दिन बसों का संचालन करना अनिवार्य है।
रविवार को मुद्रिका रूट पर करीब 4 बसें नहीं चलीं। इतना ही नहीं संजौली ओल्ड बस स्टैंड वाया छोटा शिमला रूट पर रविवार को 12 बसें, पंथाघाटी ओल्ड बस स्टैंड वाया विकासनगर रूट पर 14 बसें, समरहिल ओल्ड बस स्टैंड वाया बालूगंज रूट पर 6 बसें नहीं चलीं। इसके अलावा शहर के अन्य रूटों पर भी बसें न चलने के कारण पब्लिक को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर में लोकल रूटों पर चलने वाली प्राइवेट बसें शहर की लाइफ लाइन है। शहर के लगभग सभी रूटों पर हर पांच से दस मिनट के बाद प्राइवेट बस ऑपरेटर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन रविवार के दिन रश कम होने के कारण प्राइवेट बसें खड़ी कर दी जाती हैं। ऐसे में लोगों को घंटों बसों के इंतजार में बस स्टॉप पर खड़ा रहना पड़ता है। रविवार को शाम छह बजे के बाद अधिकतर प्राइवेट बसें खड़ी कर दी जाती हैं। इसके चलते शहर के लोगों को पैदल ही सड़के नापनी पड़ती है।
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मनमर्जी से रूट मिस किए तो कार्रवाई
मनमर्जी से रूट मिस करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। मनमाने तरीके से रूट मिस करने का बस आपरेटरों को कोई अधिकार नहीं है। अगर लोग लिखित में विभाग को शिकायत करते हैं तो संबंधित बस आपरेटर से जवाब तलब कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - भूपेंद्र अत्री, आरटीओ, शिमला।
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बसों की मेंटेनेंस के लिए साल में 46 ऑफ डे
बसों की मेंटेनेंस के लिए परिवहन विभाग प्राइवेट बसों को सालाना 46 दिन ऑफ डे देता है। अधिकतर बस ऑपरेटर संडे को बसों की मेंटेनेंस करवाते हैं क्योंकि संडे को लोगों का रश कम होता है। अगर संडे को लोगों को पर्याप्त बस सुविधा नहीं मिल पा रही तो ऑपरेटरों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
- अमित चड्ढा, महासचिव, प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन।
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शिमला। संडे को प्राइवेट बस ऑपरेटरों की मनमर्जी के कारण शहर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रविवार को शहर में प्राइवेट बस ऑपरेटराें ने दर्जनों रूटों पर पर बसें नहीं चलाई। हालांकि नियमों के अनुसार बस ऑपरेटरों को हफ्ते के सभी दिन बसों का संचालन करना अनिवार्य है।
रविवार को मुद्रिका रूट पर करीब 4 बसें नहीं चलीं। इतना ही नहीं संजौली ओल्ड बस स्टैंड वाया छोटा शिमला रूट पर रविवार को 12 बसें, पंथाघाटी ओल्ड बस स्टैंड वाया विकासनगर रूट पर 14 बसें, समरहिल ओल्ड बस स्टैंड वाया बालूगंज रूट पर 6 बसें नहीं चलीं। इसके अलावा शहर के अन्य रूटों पर भी बसें न चलने के कारण पब्लिक को परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर में लोकल रूटों पर चलने वाली प्राइवेट बसें शहर की लाइफ लाइन है। शहर के लगभग सभी रूटों पर हर पांच से दस मिनट के बाद प्राइवेट बस ऑपरेटर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन रविवार के दिन रश कम होने के कारण प्राइवेट बसें खड़ी कर दी जाती हैं। ऐसे में लोगों को घंटों बसों के इंतजार में बस स्टॉप पर खड़ा रहना पड़ता है। रविवार को शाम छह बजे के बाद अधिकतर प्राइवेट बसें खड़ी कर दी जाती हैं। इसके चलते शहर के लोगों को पैदल ही सड़के नापनी पड़ती है।
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मनमर्जी से रूट मिस किए तो कार्रवाई
मनमर्जी से रूट मिस करने वालों के खिलाफ परिवहन विभाग कड़ी कार्रवाई करेगा। मनमाने तरीके से रूट मिस करने का बस आपरेटरों को कोई अधिकार नहीं है। अगर लोग लिखित में विभाग को शिकायत करते हैं तो संबंधित बस आपरेटर से जवाब तलब कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - भूपेंद्र अत्री, आरटीओ, शिमला।
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बसों की मेंटेनेंस के लिए साल में 46 ऑफ डे
बसों की मेंटेनेंस के लिए परिवहन विभाग प्राइवेट बसों को सालाना 46 दिन ऑफ डे देता है। अधिकतर बस ऑपरेटर संडे को बसों की मेंटेनेंस करवाते हैं क्योंकि संडे को लोगों का रश कम होता है। अगर संडे को लोगों को पर्याप्त बस सुविधा नहीं मिल पा रही तो ऑपरेटरों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
- अमित चड्ढा, महासचिव, प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन।