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भवन मालिक बोले, एनजीटी के फैसले को चुनौती दे सरकार
Updated Sun, 26 Nov 2017 10:22 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भवन निर्माण और इन्हें नियमित करवाने को लेकर आए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले को लेकर शहर के भवन मालिक एकजुट होने लगे हैं। मर्ज एरिया से लेकर कोर एरिया तक के लोग सरकार से इस फैसले को चुनौती देने की मांग कर रहे हैं।
सरकार के पास 15 नवंबर तक इस फैसले के खिलाफ रिव्यू-पिटीशन का समय है। अगर सरकार आवेदन नहीं करती है तो 90 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी रास्ता रह जाएगा। एनजीटी के फैसले को लेकर तीन संगठनों ने रविवार को बैठकें कर भवन मालिकों को एकजुट किया। उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति, आवासीय जन कल्याण समिति टुटू और शिमला नागरिक सभा की ओर से करवाई गई बैठकों में पार्षदों समेत शहर के सैकड़ों भवन मालिकों ने हिस्सा लिया। इनका कहना था कि एनजीटी के फैसले में भवन मालिकों के पक्ष को सुना ही नहीं गया है। ऐसे में सरकार भवन मालिकों का पक्ष उठाते हुए इस फैसले पर चुनौती दे। ये सभी संगठन आने वाले दिनों में सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने जा रहे हैं।
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कोर, ग्रीन एरिया की बजाय पूरे शहर पर थोप दिया
आवासीय जन कल्याण समिति की बैठक में पहुंचे मर्ज एरिया के भवन मालिकों ने कहा कि इस मामले को लेकर जो पिटीशन हुई थी, उसमें शहर के कोर और ग्रीन एरिया का जिक्र था। लेकिन यह फैसला पूरे शहर पर ही लागू कर दिया गया। जो गलत है। मर्ज एरिया के तहत आने वाले 80 फीसदी मकानों के नक्शे पास नहीं, या ये नियमित नहीं हुए हैं। ये क्षेत्र पहले पंचायतों और साडा के अधीन थे। नक्शे और भवन नियमितीकरण की सख्त शर्ते न होने के चलते ज्यादातर लोगों ने मनमर्जी से मकान बना रखे हैं। बाद में इन्हें निगम ने अपने अधीन किया तो ये नई शर्ते लगा दी। कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र बाटला ने कहा कि अब इन्हें नियमित करवाने के लिए लाखों रुपये सेस के चुकाने होंगे। बैठक में मज्याठ वार्ड पार्षद दिवाकर शर्मा और टुटू वार्ड पार्षद विवेक शर्मा ने भी हिस्सा लिया। समिति अब प्लानिंग एरिया में पंपलेट बांटकर भवन मालिकों को इस फैसले से अवगत करवाएगी। समिति 30 नवंबर को टुटू लक्ष्मी नारायण मंदिर में शाम साढ़े पांच बजे एक और बैठक भी करने जा रही है।
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उप नगरीय जनकल्याण समिति की बैठक में छलका जनता का दर्द
उप नगरीय जन कल्याण समिति की बैठक में पहुंचे भवन मालिक इस फैसले से खासे नाराज दिखे। इनका कहना था कि पहले नगर निगम ने मर्ज एरिया के तहत कई गांवों को जबरदस्ती अपने अधीन कर लिया। फिर इन क्षेत्रों को घरेलू दरों पर बिजली, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं देने में नाकाम रहा। अब भवन नियमित करवाने के लिए भारी भरकम सेस वसूलने का फरमान आ गया। बैठक में पहुंचे भवन मालिक रणधीर वर्मा, बीडी चंदेल, सुरेंद्र सिंह, विक्रम, दलजीत सिंह ने कहा कि यह फैसला लागू होने से उन्हें भारी नुकसान होगा।
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100 फीट के कमरे के देने होंगे पांच लाख
भवन मालिक बोले कि सेस की दर बहुत ज्यादा है। 5 हजार प्रति वर्ग फीट के अनुसार एक सौ मीटर के कमरे को ही नियमित करवाने के लिए पांच लाख सेस भरना होगा। इसी तरह 1300 वर्ग फीट के फ्लैट को नियमित करवाने के लिए भवन मालिक को 65 लाख देने होंगे।
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शिमला। भवन निर्माण और इन्हें नियमित करवाने को लेकर आए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले को लेकर शहर के भवन मालिक एकजुट होने लगे हैं। मर्ज एरिया से लेकर कोर एरिया तक के लोग सरकार से इस फैसले को चुनौती देने की मांग कर रहे हैं।
सरकार के पास 15 नवंबर तक इस फैसले के खिलाफ रिव्यू-पिटीशन का समय है। अगर सरकार आवेदन नहीं करती है तो 90 दिन के अंदर सुप्रीम कोर्ट ही आखिरी रास्ता रह जाएगा। एनजीटी के फैसले को लेकर तीन संगठनों ने रविवार को बैठकें कर भवन मालिकों को एकजुट किया। उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति, आवासीय जन कल्याण समिति टुटू और शिमला नागरिक सभा की ओर से करवाई गई बैठकों में पार्षदों समेत शहर के सैकड़ों भवन मालिकों ने हिस्सा लिया। इनका कहना था कि एनजीटी के फैसले में भवन मालिकों के पक्ष को सुना ही नहीं गया है। ऐसे में सरकार भवन मालिकों का पक्ष उठाते हुए इस फैसले पर चुनौती दे। ये सभी संगठन आने वाले दिनों में सरकार के समक्ष इस मुद्दे को उठाने जा रहे हैं।
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कोर, ग्रीन एरिया की बजाय पूरे शहर पर थोप दिया
आवासीय जन कल्याण समिति की बैठक में पहुंचे मर्ज एरिया के भवन मालिकों ने कहा कि इस मामले को लेकर जो पिटीशन हुई थी, उसमें शहर के कोर और ग्रीन एरिया का जिक्र था। लेकिन यह फैसला पूरे शहर पर ही लागू कर दिया गया। जो गलत है। मर्ज एरिया के तहत आने वाले 80 फीसदी मकानों के नक्शे पास नहीं, या ये नियमित नहीं हुए हैं। ये क्षेत्र पहले पंचायतों और साडा के अधीन थे। नक्शे और भवन नियमितीकरण की सख्त शर्ते न होने के चलते ज्यादातर लोगों ने मनमर्जी से मकान बना रखे हैं। बाद में इन्हें निगम ने अपने अधीन किया तो ये नई शर्ते लगा दी। कार्यकारी अध्यक्ष सुरेंद्र बाटला ने कहा कि अब इन्हें नियमित करवाने के लिए लाखों रुपये सेस के चुकाने होंगे। बैठक में मज्याठ वार्ड पार्षद दिवाकर शर्मा और टुटू वार्ड पार्षद विवेक शर्मा ने भी हिस्सा लिया। समिति अब प्लानिंग एरिया में पंपलेट बांटकर भवन मालिकों को इस फैसले से अवगत करवाएगी। समिति 30 नवंबर को टुटू लक्ष्मी नारायण मंदिर में शाम साढ़े पांच बजे एक और बैठक भी करने जा रही है।
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उप नगरीय जनकल्याण समिति की बैठक में छलका जनता का दर्द
उप नगरीय जन कल्याण समिति की बैठक में पहुंचे भवन मालिक इस फैसले से खासे नाराज दिखे। इनका कहना था कि पहले नगर निगम ने मर्ज एरिया के तहत कई गांवों को जबरदस्ती अपने अधीन कर लिया। फिर इन क्षेत्रों को घरेलू दरों पर बिजली, पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं देने में नाकाम रहा। अब भवन नियमित करवाने के लिए भारी भरकम सेस वसूलने का फरमान आ गया। बैठक में पहुंचे भवन मालिक रणधीर वर्मा, बीडी चंदेल, सुरेंद्र सिंह, विक्रम, दलजीत सिंह ने कहा कि यह फैसला लागू होने से उन्हें भारी नुकसान होगा।
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100 फीट के कमरे के देने होंगे पांच लाख
भवन मालिक बोले कि सेस की दर बहुत ज्यादा है। 5 हजार प्रति वर्ग फीट के अनुसार एक सौ मीटर के कमरे को ही नियमित करवाने के लिए पांच लाख सेस भरना होगा। इसी तरह 1300 वर्ग फीट के फ्लैट को नियमित करवाने के लिए भवन मालिक को 65 लाख देने होंगे।