हिमाचल पर जीडीपी का 38 फीसदी कर्ज, वित्तायोग हैरान सुधरने की दी नसीहत
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हिमाचल पर जीडीपी का 38 फीसदी कर्ज होने से 15वां वित्तायोग हैरान है और सुधरने की नसीहत दे गया है। राज्यका जीडीपी करीब एक लाख 40 हजार करोड़ रुपये है जबकि कर्ज आने वाले वक्त में 50 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करेगा। आयोग ने इसे अस्वीकार्य बताया।
आमदनी बढ़ाने को कहा, वरना हालत चिंताजनक बताई। आयोग अध्यक्ष एनके सिंह ने बुधवार को यह चिंता पीटरहॉफ में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, उनके मंत्रियों, राज्य के अधिकारियों से लंबी चर्चा के बाद पत्रकार वार्ता के दौरान व्यक्त की। हालांकि सिंह ने इसे राहतप्रद बताया कि हाल में हालत सुधरी है। दस वर्ष पहले सबसे ज्यादा कर्ज लिया गया, जिससे यह हाल हुआ।
जीडीपी पर कर्ज 25 से 20 फीसदी तक कम करने की जरूरत है। यही राष्ट्रीय स्तर पर तय है। एनके सिंह बोले कि राज्य को अपनी आर्थिक संभावना को मूर्तरूप देना होगा। उन्होंने हैरानी जताई कि सूबे में अर्थव्यवस्था किस हाल में चलती रही मालूम नहीं। सिंह बोले कि हिमाचल को राजस्व घाटा अनुदान जारी रखने की सिफारिश होगी। उन्होंने माना कि योजना आयोग के खात्मे के बाद हिमाचल को सालाना 3000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है।
मजबूत करने होंगे पर्यटन, ऊर्जा, बागवानी और कर वसूली के क्षेत्र
सिंह ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करना होगा। नए हाइडल प्रोेजक्टों को लगाने होंगे। राज्य पनबिजली के बजाय सौर ऊर्जा पर भी ध्यान दे। बागवानी पर ध्यान दे और कर वसूली विशेषकर जीएसटी प्रणाली को मजबूत करे। इससे कर्जमुक्ति होगी।
कनेक्टिविटी सबसे बड़ी समस्या, ज्यादा बजट आवंटन की सिफारिश करेेंगे
कमजोर कनेक्टिविटी यहां सबसे बड़ी समस्या है। अगर हवाई, रेल और सड़कों की कनेक्टिवविटी हो संसाधन भी विकसित होंगे। हिमाचल को विशेष श्रेणी राज्य मानते हुए अलग से फंडिंग पैट्रन लागू करने की पैरवी करेंगे।
शिक्षा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम पर हिमाचल की पीठ भी थपथपाई
15वें वित्तायोग ने शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव संसाधन विकास पर हिमाचल की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा कि हिमाचल की शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता देना अच्छा है।