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ठेकेदारों ने बकाया भुगतान न होने पर किया टेंडर का बहिष्कार
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एचपीयू के निर्माण कार्यों का
ठेकेदारों ने किया बहिष्कार
दो सालों से भुगतान न होने पर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। विश्वविद्यालय में ठेके पर निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों ने टेंडरों का बहिष्कार कर दिया है। ठेकेदारों का आरोप है कि दो सालों से उनका भुगतान नहीं किया जा रहा। सिक्योरिटी तक नहीं दी जा रही है। बकाया भुगतान जल्द करने की मांग को लेकर अड़े करीब दस ठेकेदारों ने एक्सईएन के कार्यालय के बाहर बैठकर धरना दिया और बुधवार को तय की गई निर्माण कार्य के टेंडर की अंतिम तिथि के रोज आवेदन न कर टेंडर का बहिष्कार किया। इस कारण विवि के लाखों रुपये के किए जाने वाले निर्माण और मरम्मत कार्य अटक गए हैं। धरने पर बैठे ठेकेदारों का आरोप है कि विवि निर्माण मंडल के तहत दो साल से काम कर बैठे ठेकेदारों को उनके किए कार्य की एवज में लाखों की राशि का भुगतान नहीं किया है।
आरोप है कि एलएडी लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट से बार-बार बिना किसी ठोस तर्क के आपत्तियां लगाकर भुगतान रोका जा रहा है। मुताबिक जायज आब्जेक्शन को दूर करने के बावजूद भुगतान करने में दो सालों से आनाकानी की जा रही है। आवेदन के लिए के लिए बुधवार को एक बजे तक तय की गई आवेदन की समय सीमा समाप्त होने तक ठेकेदार कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। विवि की निर्माण विंग के एक्सईएन अशोक राणा ने माना कि विवि ने पांच निर्माण व मरम्मत कार्य को बारह जून दोपहर एक बजे तक आवेदन करने के लिए समय सीमा तय की थी। इन कार्यों के लिए एक भी आवेदन नहीं मिला है। इससे अब दोबारा आवेदन आमंत्रित करने पड़ सकते हैं।
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ठेकेदारों ने किया बहिष्कार
दो सालों से भुगतान न होने पर दिया धरना
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। विश्वविद्यालय में ठेके पर निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों ने टेंडरों का बहिष्कार कर दिया है। ठेकेदारों का आरोप है कि दो सालों से उनका भुगतान नहीं किया जा रहा। सिक्योरिटी तक नहीं दी जा रही है। बकाया भुगतान जल्द करने की मांग को लेकर अड़े करीब दस ठेकेदारों ने एक्सईएन के कार्यालय के बाहर बैठकर धरना दिया और बुधवार को तय की गई निर्माण कार्य के टेंडर की अंतिम तिथि के रोज आवेदन न कर टेंडर का बहिष्कार किया। इस कारण विवि के लाखों रुपये के किए जाने वाले निर्माण और मरम्मत कार्य अटक गए हैं। धरने पर बैठे ठेकेदारों का आरोप है कि विवि निर्माण मंडल के तहत दो साल से काम कर बैठे ठेकेदारों को उनके किए कार्य की एवज में लाखों की राशि का भुगतान नहीं किया है।
आरोप है कि एलएडी लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट से बार-बार बिना किसी ठोस तर्क के आपत्तियां लगाकर भुगतान रोका जा रहा है। मुताबिक जायज आब्जेक्शन को दूर करने के बावजूद भुगतान करने में दो सालों से आनाकानी की जा रही है। आवेदन के लिए के लिए बुधवार को एक बजे तक तय की गई आवेदन की समय सीमा समाप्त होने तक ठेकेदार कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। विवि की निर्माण विंग के एक्सईएन अशोक राणा ने माना कि विवि ने पांच निर्माण व मरम्मत कार्य को बारह जून दोपहर एक बजे तक आवेदन करने के लिए समय सीमा तय की थी। इन कार्यों के लिए एक भी आवेदन नहीं मिला है। इससे अब दोबारा आवेदन आमंत्रित करने पड़ सकते हैं।
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