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शिमला
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ताराहाल स्कूल के फरमान से
अभिभावक और छात्र परेशान
ओवरलोडिंग के चलते पास रिन्यू न करने का फरमान
टैक्सियां करने पर अभिभावकों पर पड़ेगा आर्थिक बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के एक निजी स्कूल के फरमान से अभिभावक परेशान हैं। शहर के लोरेटो कान्वेंट स्कूल ने अभिभावकों को सत्र के बीच मेसेज भेजकर छात्राओं को एचआरटीसी चार्टेड बसों के पास रिन्यू न करवाने का सुझाव दिया है। इससे अभिभावक मुश्किल में है। पहले जो एचआरटीसी की बसों का 800 रुपये प्रतिमाह परिवहन का खर्च आता था अब निजी टैक्सी कर यह खर्चा ढाई हजार हो जाएगा।
दस जून से पहले यह व्यवस्था करने को कहा है। अभिभावकों का कहना है कि इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। कहा कि जब ओवलोडिंग से एचआरटीसी को परेशानी नहीं है तो स्कूल इस तरह के मैसेज क्यों भेज रहा है? वहीं स्कूल प्रबंधन का कहना है कि रोजाना स्कूल परिसर में आने वाली परिवहन निगम की चार्टेड बसों में 40 के बजाय 65 से 65 छात्राएं सफर कर रही हैं। छात्राओं को रोज भीड़ वाली बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ता है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इसमें स्कूल का कोई लेना देना नहीं है। अभिभावक अपने स्तर पर परिवहन निगम की बसों के पास बनवाते हैं लेकिन स्कूल को लगाई बसों में क्षमता से अधिक छात्राएं रहती हैं। परिवहन निगम ने अतिरिक्त बसें देने से असमर्थता जताई है। इसके लिए स्कूल प्रशासन कई बार लिखित में आग्रह कर अतिरिक्त बसें चलाने की मांग करता रहा है। स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि उन्होंने अभिभावकों को बच्चे की रोज की परेशानी दूर करने के लिए यह व्यवस्था करने का मेसेज भेजा है।
अतिरिक्त बसें चलाने के कर रहे प्रयास
शिमला। लोरेटो कान्वेंट ताराहाल स्कूल के प्रवक्ता ने कहा कि न्यायालय के आदेशों पर छात्राओं के लिए निजी बसें स्कूल टाइम में चलवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदा विज्ञापन भी निकाले गए हैं। इसके लिए आवेदन आने के बाद ही साफ होगा कि छात्राओं के लिए कितनी बसें चलवा पाएंगे।
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बस में नहीं होती ओवरलोडिंग : आरएम
परिवहन निगम के डिपो नंबर दो (शिमला लोकल) के क्षेत्रीय प्रबंधक देवासेन नेगी ने कहा कि निगम छात्राओं के बनाए पास के मुताबिक और तय पैसेंजर लिमिट के हिसाब से बसें चला रहा है। ताराहाल की किसी बस भी में ओवरलोडिंग नहीं होती। छात्राएं जितने पास बनवाएंगी उसके मुताबिक निगम बस सुविधा देगा। वर्तमान में 13 से अधिक बसें इस स्कूल की छात्राओं के लिए चलाई जा रही हैं। किसी एक व्यक्ति की डिमांड पर बसों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएंगी, पास बनेंगे तो और बसें भी छात्राओं के लिए चला दी जाएंगी।
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अभिभावक और छात्र परेशान
ओवरलोडिंग के चलते पास रिन्यू न करने का फरमान
टैक्सियां करने पर अभिभावकों पर पड़ेगा आर्थिक बोझ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के एक निजी स्कूल के फरमान से अभिभावक परेशान हैं। शहर के लोरेटो कान्वेंट स्कूल ने अभिभावकों को सत्र के बीच मेसेज भेजकर छात्राओं को एचआरटीसी चार्टेड बसों के पास रिन्यू न करवाने का सुझाव दिया है। इससे अभिभावक मुश्किल में है। पहले जो एचआरटीसी की बसों का 800 रुपये प्रतिमाह परिवहन का खर्च आता था अब निजी टैक्सी कर यह खर्चा ढाई हजार हो जाएगा।
दस जून से पहले यह व्यवस्था करने को कहा है। अभिभावकों का कहना है कि इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। कहा कि जब ओवलोडिंग से एचआरटीसी को परेशानी नहीं है तो स्कूल इस तरह के मैसेज क्यों भेज रहा है? वहीं स्कूल प्रबंधन का कहना है कि रोजाना स्कूल परिसर में आने वाली परिवहन निगम की चार्टेड बसों में 40 के बजाय 65 से 65 छात्राएं सफर कर रही हैं। छात्राओं को रोज भीड़ वाली बसों में खड़े होकर सफर करना पड़ता है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि इसमें स्कूल का कोई लेना देना नहीं है। अभिभावक अपने स्तर पर परिवहन निगम की बसों के पास बनवाते हैं लेकिन स्कूल को लगाई बसों में क्षमता से अधिक छात्राएं रहती हैं। परिवहन निगम ने अतिरिक्त बसें देने से असमर्थता जताई है। इसके लिए स्कूल प्रशासन कई बार लिखित में आग्रह कर अतिरिक्त बसें चलाने की मांग करता रहा है। स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि उन्होंने अभिभावकों को बच्चे की रोज की परेशानी दूर करने के लिए यह व्यवस्था करने का मेसेज भेजा है।
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अतिरिक्त बसें चलाने के कर रहे प्रयास
शिमला। लोरेटो कान्वेंट ताराहाल स्कूल के प्रवक्ता ने कहा कि न्यायालय के आदेशों पर छात्राओं के लिए निजी बसें स्कूल टाइम में चलवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए बाकायदा विज्ञापन भी निकाले गए हैं। इसके लिए आवेदन आने के बाद ही साफ होगा कि छात्राओं के लिए कितनी बसें चलवा पाएंगे।
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बस में नहीं होती ओवरलोडिंग : आरएम
परिवहन निगम के डिपो नंबर दो (शिमला लोकल) के क्षेत्रीय प्रबंधक देवासेन नेगी ने कहा कि निगम छात्राओं के बनाए पास के मुताबिक और तय पैसेंजर लिमिट के हिसाब से बसें चला रहा है। ताराहाल की किसी बस भी में ओवरलोडिंग नहीं होती। छात्राएं जितने पास बनवाएंगी उसके मुताबिक निगम बस सुविधा देगा। वर्तमान में 13 से अधिक बसें इस स्कूल की छात्राओं के लिए चलाई जा रही हैं। किसी एक व्यक्ति की डिमांड पर बसों की संख्या नहीं बढ़ाई जाएंगी, पास बनेंगे तो और बसें भी छात्राओं के लिए चला दी जाएंगी।