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लिथोट्रिप्सी मशीन पर कंपनी और आईजीएमसी में ठनी

Tue, 09 Apr 2019 10:20 AM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 09 Apr 2019 10:20 AM IST
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अस्पताल प्रबंधन से ठनी
अमर उजाला ब्यूरो
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शिमला। यूरोलॉजी विभाग में खराब पड़ी लिथोट्रिप्सी मशीन ठीक हो गई है। मरीजों को राहत मिलना भी शुरू हो गई है। लेकिन अब इस मशीन को लेकर आईजीएमसी प्रबंधन और कंपनी के बीच पेनल्टी जमा करने को लेकर ठन गई है। अस्पताल प्रबंधन ने कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है।
आईजीएमसी प्रबंधन का कहना है कि कंपनी जब तक टेंडर नियमों के मुताबिक पेनल्टी जमा नहीं करवाती तब तक उन्हें मशीन के माध्यम से किए जा रहे काम को लेकर संतोषजनक रिपोर्ट नहीं सौंपा जाएगी। प्रबंधन का तर्क है कि कंपनी ने मशीन को ठीक करने में करीब डेढ़ माह का अतिरिक्त समय लगा दिया। इस कारण आईजीएमसी आने वाले प्रदेशभर के मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी थी। मरीजों को लेजर के जरिये चीरफाड़ के जरिये उपचार करवाना पड़ा। इस इलाज में मरीजों को अतिरिक्त पैसा भी इलाज पर खर्च करना पड़ा। अस्पताल में स्थापित इस मशीन की रिपेयर के बाद कंपनी को संतोषजनक रिपोर्ट हासिल करना जरूरी है।
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आईजीएमसी में हर रोज कंपनी के प्रतिनिधि संतोषजनक रिपोर्ट हासिल करने को आ रहे हैं लेकिन अस्पताल प्रबंधन रिपोर्ट नहीं दे रहा। आईजीएमसी के यूरोलॉजी विभाग में लिथोट्रिप्सी मशीन कुछ समय पूर्व खराब हो गई थी। मशीन को दुरुस्त करने में कंपनी ने तीन माह का समय लगा दिया। अब मशीन दुरुस्त हो गई है तो कंपनी के प्रतिनिधि मशीन द्वारा कार्य करने को लेकर अस्पताल प्रबंधन से संतोषजनक रिपोर्ट की मांग कर रहे हैं लेकिन प्रबंधन टेंडर के नियमों की बात कह रहा है। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज ने बताया कि वह संतोषजनक रिपोर्ट तभी देंगे जब कंपनी पहले पेनल्टी भरेगी।
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किडनी स्टोन के ऑपरेशन होते हैं अहम
लिथोट्रिप्सी मशीन एकमात्र आईजीएमसी में लगी है। इससे पहले यहां से मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था। इस मशीन से किडनी स्टोन के मरीजों का बिना चीरफाड़ किए लेजर तकनीक से पत्थरी को तोड़ कर निकाला जाता है। मशीन से 30 एमएम तक की पत्थरी को निकाला गया है। इससे पहले बड़ी पत्थरी होने पर डॉक्टर ऑपरेशन करने से इंकार करते थे, मशीन आने के बाद ऐसे में मरीजों को लाभ मिला है।
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