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शहर के लोगों में तेंदुओं की दहशत
Updated Sat, 25 Nov 2017 10:22 PM IST
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अमर उजाला ब्यूूरो
शिमला। राजधानी शिमला शहर और उसके आसपास के क्षेत्र लोगों में तेंदुओं का खौफ बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन सड़कों और पगडंडियों में चलते हुए लोगों को तेंदुआ मिल रहा है। जाखू, नवबहार, खलीणी, भराड़ी, बड़श, अन्नाडेल, कैथू, चक्कर के आसपास के क्षेत्र में शाम ढलने से पहले ही तेंदुए के गुर्राने की आवाजें सुनाई देती हैं। आए दिन तेंदुआ शहर के रिहायशी क्षेत्रों में धावा बोलता है और कुत्तों को अपना शिकार बना रहा है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुुश्किल हो गया है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शाम डलने से पहले ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। वहीं, वन्य प्रभाग के डीएफओ राजेश शर्मा ने बताया कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए शहर में आठ जगहों पर पिंजरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तेंदुआ आवारा कुत्तों के शिकार के लिए जंगलों से शहर की ओर रुख करता है। उन्होंने शहर की जनता से आग्रह किया है कि बच्चों को अकेले घरों से बाहर न भेजें। उन्होंने कहा कि तेंदुआ इंसान पर तभी हमला करता है, जब कभी अचानक उसका किसी से आमना-सामना हो जाए। उन्होंने कहा कि शाम ढलने के बाद सुनसान रास्तों में मोबाइल पर गाने बजाते हुए चलें। हो सके तो दो तीन लोग एक साथ सफर करें।
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शिमला। राजधानी शिमला शहर और उसके आसपास के क्षेत्र लोगों में तेंदुओं का खौफ बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन सड़कों और पगडंडियों में चलते हुए लोगों को तेंदुआ मिल रहा है। जाखू, नवबहार, खलीणी, भराड़ी, बड़श, अन्नाडेल, कैथू, चक्कर के आसपास के क्षेत्र में शाम ढलने से पहले ही तेंदुए के गुर्राने की आवाजें सुनाई देती हैं। आए दिन तेंदुआ शहर के रिहायशी क्षेत्रों में धावा बोलता है और कुत्तों को अपना शिकार बना रहा है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुुश्किल हो गया है। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शाम डलने से पहले ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। वहीं, वन्य प्रभाग के डीएफओ राजेश शर्मा ने बताया कि तेंदुओं को पकड़ने के लिए शहर में आठ जगहों पर पिंजरे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि तेंदुआ आवारा कुत्तों के शिकार के लिए जंगलों से शहर की ओर रुख करता है। उन्होंने शहर की जनता से आग्रह किया है कि बच्चों को अकेले घरों से बाहर न भेजें। उन्होंने कहा कि तेंदुआ इंसान पर तभी हमला करता है, जब कभी अचानक उसका किसी से आमना-सामना हो जाए। उन्होंने कहा कि शाम ढलने के बाद सुनसान रास्तों में मोबाइल पर गाने बजाते हुए चलें। हो सके तो दो तीन लोग एक साथ सफर करें।