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स्क्रब टायफस की चपेट में छोटे बच्चे, स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप

Sun, 02 Sep 2018 01:36 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 02 Sep 2018 01:36 PM IST
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स्क्रब टायफस

आईजीएमसी में स्क्रब टायफस के मरीजों की संख्या दिनप्रतिदिन बढ़ रही है। अब स्कूली बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। आईजीएमसी के बाल रोग वार्ड में इस बीमारी की जद्द में आए बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। इससे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। इन बच्चों की उम्र पांच से पंद्रह साल के बीच बताई जा रही है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अश्वनी कुमार सूद ने कहा कि यह बैक्टीरियल इंफेक्शन है। इसकी चपेट में स्कूली बच्चे भी आए हैं। अस्पताल में औसतन

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चार से पांच बच्चे रोजाना दाखिल हो रहे हैं। यह बच्चे सुन्नी, बिलासपुर, रामपुर और हमीरपुर से संबंधित हैं। पहले भी स्क्रब टायफस के कई मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन अधिकतर मामले अपर शिमला क्षेत्र से होते हैं। लेकिन बच्चों में इस तरह के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि विभाग का कहना है कि उनके पास इस बीमारी से निपटने के पर्याप्त इंतजाम हैं तथा मरीजों को बेहतर उपचार दिया जा रहा है।
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वहीं शनिवार को अस्पताल प्रशासन की ओर से शनिवार को इस पर मेडिकल बुलेटिन भी जारी किया गया। इस दौरान कॉलेज प्राचार्य डॉ. रविचंद शर्मा, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जनकराज, मेडिसन विशेषज्ञ डॉ. संजय महाजन और मेडिकल स्टोर इंचार्ज डॉ. राहुल गुप्ता मौजूद रहे। इन डॉक्टरों ने स्क्रब टायफस, मिरगी और स्तन कैंसर के लक्षणों तथा बचाव बारे जानकारी दी।
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पिस्सु के काटने से फैलता है स्क्रब टायफस
मेडिसन विशेषज्ञ डॉक्टर संजय महाजन ने बताया कि घास में पाए जाने वाले पिस्सू के काटने से स्क्रब टायफस होता है। पांच से बारह दिन के भीतर रोग के लक्षण सामने आते हैं। रोगों को सिरदर्द, भूख न लगना और जी मिचलाने जैसी दिक्कतें होती हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी का पता शरीर में काटी जाने वाली जगह से भी लगाया जा सकता है।

यह पिस्सु शरीर के जिस हिस्से में काटता है वहां काला निशान पड़ जाता है। इसमें हल्की खारिश होती और खेतों में काम करने वाली महिलाओं के छाती के नीचे इस तरह के निशान पाए जाते हैं। इस तरह के लक्षण पाए जाने पर तुरंत अस्पताल आकर चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए। समय रहते इलाज शुरू होने से जल्द राहत मिल जाती है।


यह दवा दी जाती है मरीजों को
मेडिसन विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. संजय ने बताया कि मरीज को स्क्रब टायफस होने पर तुरंत सलाह के बाद दवाएं लेनी चाहिए। इनमें एंटीबायोटिक, डॉक्सीसाइक्लीन और एजीथ्रोमाइसिन दवाएं दी जाती हैं।

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