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104 से ज्यादा परिवारों को मुफ्त पानी पिला रहा निगम, हंगामा
Updated Thu, 28 Dec 2017 10:37 PM IST
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शिमला। शहरवासियों से फ्लैट रेट पर पानी के बिल वसूलने वाला नगर निगम 104 से ज्यादा परिवारों को मुफ्त पानी पिला रहा है। दस साल से निगम ने इनसे पानी के बदले एक भी पैसा बिल का नहीं वसूला।
बसंत विहार की सचिवालय कर्मचारी सहकारी कल्याण समिति की ओर से बनाई गई कॉलोनियों पर आखिर निगम इतनी मेहरबानी क्यों दिखाता रहा, इसका जवाब अब देते नहीं बन रहा है। नगर निगम की मासिक बैठक में वीरवार को इस मामले पर जमकर हंगामा हुआ। कसुम्पटी वार्ड के पार्षद राकेश चौहान ने जैसे ही सदन में अफसरों से इसका जवाब मांगा कि हंगामा शुरू हो गया। पार्षद बोले कि आखिर इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों पर इतनी मेहरबानी क्यों की जा रही है। दस साल में करीब 40 लाख पानी बिल बनता है, लेकिन आज तक इनसे बिल क्यों नहीं वसूला गया। प्रशासन ने सफाई दी कि मामला अब ध्यान में आया है। इस जवाब से पार्षद और भड़क गए। राकेश चौहान ने कहा कि इस मामले पर डिप्टी मेयर क्यों चुप हैं, उन्हें तो सब पता है। कहा कि निगम को यह तक नहीं पता कि बिल दिए हैं या नहीं। पार्षद अर्चना धवन और आनंद कौशल ने तुरंत मामले की जांच की मांग की।
प्रशासन ने दी यह सफाई
पार्षद के सवाल के जवाब में निगम ने पहले बताया कि ऑफिस शिफ्ट होने से इसकी फाइल नहीं मिल रही। सदन में अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने कहा कि वर्तमान में कॉलोनी के 104 फ्लैट्स में ही लोग रह रहे हैं। यहां के लिए साल 2005 में आधा इंच की लाइन दी गई थी। मामला ध्यान में आने पर मीटर टेली किए जा रहे हैं। उधर, पार्षद राकेश चौहान का कहना है कि कॉलोनी में 100 से ज्यादा फ्लैट्स हैं जिनमें निगम के पानी का इस्तेमाल होता है।
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जांच के लिए बनाई कमेटी
मामले की जांच के लिए मेयर कुसुम सदरेट ने निगम अभियंता, डिप्टी मेयर राकेश शर्मा और पार्षद राकेश चौहान की तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। कमेटी दो हफ्ते में पता लगाएगी कि आखिर क्यों इन्हें बिल नहीं जारी हो रहे थे।
यह है पूरा मामला
कसुम्पटी वार्ड के तहत आने वाली इस कॉलोनी में सचिवालय से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों ने फ्लैट्स बना रखे हैं। यह कॉलोनी सहकारी कल्याण समिति के तहत आती है। पार्षद राकेश चौहान का आरोप है कि समिति यहां रहने वाले लोगों से तो बिल लेती है लेकिन निगम में जमा नहीं करती। वहीं, अब कॉलोनी में सभी रिटायर कर्मी नहीं रहते। कइयों ने इसे आगे बेच दिया है।
मेयर और पार्षद में नोंकझोंक
मेयर ने पार्षद राकेश चौहान से पूछा कि दस साल से यह मामला क्यों नहीं उठाया गया। इस पर बाकी पार्षद भड़क गए। खलीणी पार्षद पूर्णमल ने कहा कि मामला क्यों नहीं उठाया, ये जरूरी नहीं है। अब अगर कोई पार्षद मामला उठा रहे हैं, तो उसकी जांच होनी चाहिए। शैली शर्मा ने कहा कि मेयर और अफसर हफ्ते पहले पूछे गए सवाल को भी पढ़कर नहीं आते। किमी सूद ने भी मामले की जल्द जांच की मांग की।
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बसंत विहार की सचिवालय कर्मचारी सहकारी कल्याण समिति की ओर से बनाई गई कॉलोनियों पर आखिर निगम इतनी मेहरबानी क्यों दिखाता रहा, इसका जवाब अब देते नहीं बन रहा है। नगर निगम की मासिक बैठक में वीरवार को इस मामले पर जमकर हंगामा हुआ। कसुम्पटी वार्ड के पार्षद राकेश चौहान ने जैसे ही सदन में अफसरों से इसका जवाब मांगा कि हंगामा शुरू हो गया। पार्षद बोले कि आखिर इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों पर इतनी मेहरबानी क्यों की जा रही है। दस साल में करीब 40 लाख पानी बिल बनता है, लेकिन आज तक इनसे बिल क्यों नहीं वसूला गया। प्रशासन ने सफाई दी कि मामला अब ध्यान में आया है। इस जवाब से पार्षद और भड़क गए। राकेश चौहान ने कहा कि इस मामले पर डिप्टी मेयर क्यों चुप हैं, उन्हें तो सब पता है। कहा कि निगम को यह तक नहीं पता कि बिल दिए हैं या नहीं। पार्षद अर्चना धवन और आनंद कौशल ने तुरंत मामले की जांच की मांग की।
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प्रशासन ने दी यह सफाई
पार्षद के सवाल के जवाब में निगम ने पहले बताया कि ऑफिस शिफ्ट होने से इसकी फाइल नहीं मिल रही। सदन में अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने कहा कि वर्तमान में कॉलोनी के 104 फ्लैट्स में ही लोग रह रहे हैं। यहां के लिए साल 2005 में आधा इंच की लाइन दी गई थी। मामला ध्यान में आने पर मीटर टेली किए जा रहे हैं। उधर, पार्षद राकेश चौहान का कहना है कि कॉलोनी में 100 से ज्यादा फ्लैट्स हैं जिनमें निगम के पानी का इस्तेमाल होता है।
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जांच के लिए बनाई कमेटी
मामले की जांच के लिए मेयर कुसुम सदरेट ने निगम अभियंता, डिप्टी मेयर राकेश शर्मा और पार्षद राकेश चौहान की तीन सदस्यीय कमेटी बना दी है। कमेटी दो हफ्ते में पता लगाएगी कि आखिर क्यों इन्हें बिल नहीं जारी हो रहे थे।
यह है पूरा मामला
कसुम्पटी वार्ड के तहत आने वाली इस कॉलोनी में सचिवालय से सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों ने फ्लैट्स बना रखे हैं। यह कॉलोनी सहकारी कल्याण समिति के तहत आती है। पार्षद राकेश चौहान का आरोप है कि समिति यहां रहने वाले लोगों से तो बिल लेती है लेकिन निगम में जमा नहीं करती। वहीं, अब कॉलोनी में सभी रिटायर कर्मी नहीं रहते। कइयों ने इसे आगे बेच दिया है।
मेयर और पार्षद में नोंकझोंक
मेयर ने पार्षद राकेश चौहान से पूछा कि दस साल से यह मामला क्यों नहीं उठाया गया। इस पर बाकी पार्षद भड़क गए। खलीणी पार्षद पूर्णमल ने कहा कि मामला क्यों नहीं उठाया, ये जरूरी नहीं है। अब अगर कोई पार्षद मामला उठा रहे हैं, तो उसकी जांच होनी चाहिए। शैली शर्मा ने कहा कि मेयर और अफसर हफ्ते पहले पूछे गए सवाल को भी पढ़कर नहीं आते। किमी सूद ने भी मामले की जल्द जांच की मांग की।