{"_id":"5a11b5f34f1c1ba7668b50d2","slug":"11511110131-shimla-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनजीटी के फैसले से बदल सकता है स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनजीटी के फैसले से बदल सकता है स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
Updated Sun, 19 Nov 2017 10:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिमला। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के फैसले का असर शिमला के ड्रीम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर भी पड़ने वाला है। 2905 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट के तहत लोअर बाजार से लेकर कृष्णानगर वार्ड तक कई नए आवासीय भवन, कामर्शियल कांपलेक्स, होटल, सर्विस अपार्टमेंट जैसी इमारतों का निर्माण होना है। इन पर कुल बजट से करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च होने हैं। लेकिन, एनजीटी के फैसले के बाद अब इन भवनों के निर्माण के प्लान में बदलाव करना पड़ सकता है। पिछले तीन माह में अब तक जो प्रस्ताव तैयार हुआ है, उसके अनुसार इस एरिया में करीब चार मंजिल मकान बनाए जाने थे। लेकिन अब एनजीटी के फैसले के बाद दोबारा तय करना होगा कि कृष्णानगर जैसे ढलानदार क्षेत्र में कितने मंजिला भवन बनाए जा सकते हैं। साथ ही सब्जी मंडी एरिया के लेबर हॉस्टल समेत रामबाजार और लोअर बाजार जैसे कोर एरिया में भी जो नए भवन बनने हैं, वे अब बनाए जाएंगे या नहीं। अगर बनने हैं तो कितनी मंजिल के होंगे। निगम प्रशासन एनजीटी के आदेशों का अध्ययन कर जरूरी बदलाव करने की तैयारी में जुट गया है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि अभी इसका प्लान फाइनल नहीं हुआ था लेकिन अब तक जो प्लान बना था, उसमें अब नियमों के तहत जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
हजारों लोगों के लिए बनने हैं आवासीय भवन
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कृष्णानगर वार्ड में हजारों लोगों को बसाने के लिए नए आवासीय भवन बनने हैं। पीएम आवास योजना और राजीव आवास योजना के बजट को भी इन पर खर्च किया जाएगा। इसके लिए अर्बन रिनुअल पॉलिसी लाकर ज्यादातर ढारों को तोड़कर उनकी जगह नए आवासीय भवन बनाए जाने हैं। इसके अलावा 161 करोड़ से होटल डेवलपमेंट, 351 करोड़ से कामर्शियल कांपलेक्स और 170 करोड़ से सर्विस अपार्टमेंट के प्लान पर भी दोबारा होमवर्क करना होगा।
नहीं किए बदलाव तो लेनी पड़ेगी विशेष अनुमति
हालांकि, नगर निगम एनजीटी के फैसले के तहत ही अब इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने का दावा कर रहा है। लेकिन यदि प्लान बदलता है तो इससे प्रोजेक्ट का बजट भी गड़बड़ा सकता है। ऐसे में निगम यह भी देख रहा है कि यदि बजट बिगड़ता है तो फिर कोर्ट से विशेष अनुमति लेकर इसे लागू किया जाएगा। अध्ययन किया जा रहा है कि किन-किन प्रोजेक्टों को एनजीटी के आदेश प्रभावित कर रहे हैं।
विज्ञापन
क्या कहते हैं नोडल ऑफिसर
शिमला में प्रोजेक्ट के तहत जो भी नए निर्माण होने हैं, उनके प्रस्ताव को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। अभी यह कहना मुश्किल है कि इन आदेशों का किस प्रोजेक्ट पर क्या असर होगा। प्रयास यही है कि एनजीटी के आदेशों के तहत नियमों में रहकर ही प्रोजेक्ट का काम शुरू किया जाए। लेकिन आर्थिक तौर पर यदि यह संभव नहीं होता है तो कोर्ट से विशेष अनुमति लेने पर भी विचार किया जा सकता है।
प्रशांत सरकैक, नोडल ऑफिसर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट
विज्ञापन
हजारों लोगों के लिए बनने हैं आवासीय भवन
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कृष्णानगर वार्ड में हजारों लोगों को बसाने के लिए नए आवासीय भवन बनने हैं। पीएम आवास योजना और राजीव आवास योजना के बजट को भी इन पर खर्च किया जाएगा। इसके लिए अर्बन रिनुअल पॉलिसी लाकर ज्यादातर ढारों को तोड़कर उनकी जगह नए आवासीय भवन बनाए जाने हैं। इसके अलावा 161 करोड़ से होटल डेवलपमेंट, 351 करोड़ से कामर्शियल कांपलेक्स और 170 करोड़ से सर्विस अपार्टमेंट के प्लान पर भी दोबारा होमवर्क करना होगा।
विज्ञापन
नहीं किए बदलाव तो लेनी पड़ेगी विशेष अनुमति
हालांकि, नगर निगम एनजीटी के फैसले के तहत ही अब इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा तैयार करने का दावा कर रहा है। लेकिन यदि प्लान बदलता है तो इससे प्रोजेक्ट का बजट भी गड़बड़ा सकता है। ऐसे में निगम यह भी देख रहा है कि यदि बजट बिगड़ता है तो फिर कोर्ट से विशेष अनुमति लेकर इसे लागू किया जाएगा। अध्ययन किया जा रहा है कि किन-किन प्रोजेक्टों को एनजीटी के आदेश प्रभावित कर रहे हैं।
विज्ञापन
क्या कहते हैं नोडल ऑफिसर
शिमला में प्रोजेक्ट के तहत जो भी नए निर्माण होने हैं, उनके प्रस्ताव को अभी अंतिम रूप दिया जा रहा है। अभी यह कहना मुश्किल है कि इन आदेशों का किस प्रोजेक्ट पर क्या असर होगा। प्रयास यही है कि एनजीटी के आदेशों के तहत नियमों में रहकर ही प्रोजेक्ट का काम शुरू किया जाए। लेकिन आर्थिक तौर पर यदि यह संभव नहीं होता है तो कोर्ट से विशेष अनुमति लेने पर भी विचार किया जा सकता है।
प्रशांत सरकैक, नोडल ऑफिसर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट