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कंपनी के पास पानी के 3626 मीटरों का रिकॉर्ड नहीं
Sun, 24 Mar 2019 12:01 PM IST
अरविन्द ठाकुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 24 Mar 2019 12:01 PM IST
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शहरवासियों को पहली बार पानी के बिल जारी कर रही शिमला जल प्रबंधन निगम लिमिटेड कंपनी के सामने अब नई मुसीबत खड़ी हो गई है। शहर में 3626 मीटर ऐसे मिले हैं जिनका कोई मालिक नहीं है। इनसे पानी की सप्लाई तो हो रही है लेकिन बिल लेने कोई नहीं आ रहा। कंपनी के पास भी इनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। मजबूरन अब पुराने कीमैन को बुलाकर इनकी वेरिफिकेशन करवानी पड़ रही है।
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कंपनी ने जनवरी से पानी के बिल जारी करना शुरू किया था। इस दौरान कुल 5507 मीटर ऐसे पाए गए जिनका कोई रिकॉर्ड ही नहीं है। कंपनी ने जांच शुरू की तो चौंकाने वाले खुलासे होने लगे हैं। कई उपभोक्ताओं ने यह कहकर बिल लौटा दिए कि यह उनके मीटर नहीं है। वहीं सैकड़ों ऐसे उपभोक्ता भी मिले हैं जिन्हें अपने मीटर का पता ही नहीं है।
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शहर के कोर एरिया में गलियों और बाजारों में एक ही जगह 10 से 15 मीटर लगे हैं। ऐसे में उपभोक्ता नहीं बता पा रहे कि इनमें से आखिर उनका मीटर कौन सा है। अब तक की वेरिफिकेशन में 1881 मीटरों के उपभोक्ताओं की पहचान हो पाई है। बाकी 3626 का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा।
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कई मीटर दब गए, कई बदले ही नहीं
शहर में कई मीटर ऐसे भी हैं जो भूस्खलन और टारिंग में दब गए हैं। कई मीटर ऐसी जगह लगे हैं जिनका पता ही नहीं। यह बदले तक नहीं गए हैं। निगम ने साल 2017 में पानी के मीटर बदलना शुरू किया था। मीटर बदलने का काम एक कंपनी को दिया गया। कंपनी के कर्मचारियों ने वार्डों में मीटर तो बदल दिए लेकिन यह रिकॉर्ड नहीं लिया कि जो मीटर बदले हैं वह किसके नाम से दर्ज हैं।
वहीं पिछले साल मई-जून में जब रीडिंग का काम शुरू हुआ तब भी ठेकेदार के कर्मचारी मीटरों से रीडिंग तो ले आए लेकिन यह नहीं पूछा कि आखिर यह मीटर किसके नाम से दर्ज हैं। कंपनी के पास अब 32 हजार से अधिक उपभोक्ताओं की रीडिंग तो है लेकिन इनमें 3626 मीटर ऐसे हैं, जिनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा।
पहले इसलिए सबको जारी होते थे बिल
पहले फ्लैट रेट पर लोगों को बिल जारी होते थे। ऐसे में जिन लोगों को अपने मीटरों का पता नहीं था वह सीधे निगम आकर अपने नाम से बिल जारी करवा लेते थे। मीटर रीडिंग न होने से निगम फ्लैट रेट पर बिल जारी कर देता था। अब जब रीडिंग लेने लगे तो हजारों उपभोक्ता ऐसे भी मिले जिन्हें अपने मीटर तक का पता नहीं।
चल रही है वेरिफिकेशन
सैकड़ों मीटर ऐसे मिले हैं जिनके उपभोक्ताओं का पता नहीं चल रहा। इसकी वेरिफिकेशन करवाई जा रही है। लोगों से अपील है कि जिन्हें बिल नहीं मिले हैं वह वार्ड कार्यालय या कंपनी की वेबसाइट पर शिकायत दें। कंपनी घर पर बिल पहुंचाएगी। - धर्मेंद्र गिल, प्रबंध निदेशक शिमला जल प्रबंध निगम लिमिटेेड