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हिमाचल प्रदेश : 40 हजार किमी पैदल सफर, चंबा पहुंचे तुलसी राम, अब मणिमहेश में करेंगे भोलेनाथ के दर्शन
Sun, 30 Aug 2026 12:09 PM IST
Ankesh Dogra
मोहम्मद अयूब, चंबा।
मोहम्मद अयूब, चंबा।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:09 PM IST
सार
मुंबई से जनवरी 2024 में 14 वर्ष की धार्मिक यात्रा पर निकले 42 वर्षीय तुलसी राम करीब 40 हजार किलोमीटर पैदल सफर कर चंबा पहुंचे हैं। उनका अगला पड़ाव मणिमहेश है, जहां वह पहली बार भगवान भोलेनाथ के दर्शन करेंगे। उनकी यात्रा श्रीलंका की अशोक वाटिका पहुंचने के बाद पूरी होगी। यात्रा के दौरान वह लोगों को सनातन संस्कृति के साथ प्रकृति संरक्षण, पौधरोपण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश दे रहे हैं।
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तुलसी राम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
मुंबई से धार्मिक स्थलों की पैदल यात्रा पर निकले 42 वर्षीय तुलसी राम करीब 40 हजार किलोमीटर का सफर तय करने के बाद शनिवार को चंबा पहुंचे। उनकी इस लंबी यात्रा का अगला पड़ाव भगवान भोलेनाथ की आस्था के प्रमुख केंद्र मणिमहेश है। तुलसी राम पहली बार मणिमहेश यात्रा पर जा रहे हैं और यहां भगवान शिव के दर्शन करने की उनकी लंबे समय से इच्छा थी।
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तुलसी राम के अनुसार उन्होंने जनवरी 2024 में 14 वर्ष की धार्मिक यात्रा शुरू की थी। अब तक वह करीब दो वर्ष आठ माह का सफर पूरा कर चुके हैं। इस दौरान वह देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की पैदल यात्रा कर चुके हैं।
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पहली बार करेंगे मणिमहेश के दर्शन
चंबा पहुंचने पर तुलसी राम ने बताया कि मणिमहेश में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने की उनकी काफी समय से इच्छा थी। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपनी यात्रा का रुख चंबा की ओर किया। अब वह मणिमहेश पहुंचकर अपनी धार्मिक यात्रा के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा का अंतिम लक्ष्य श्रीलंका में स्थित माता सीता की अशोक वाटिका है। वहां पहुंचने के बाद उनकी 14 वर्ष की धार्मिक यात्रा पूरी होगी।
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यात्रा के साथ दे रहे प्रकृति संरक्षण का संदेश
तुलसी राम धार्मिक यात्रा के साथ-साथ लोगों को प्रकृति संरक्षण और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करने का संदेश भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा करना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और जंगलों को बचाने की अपील की। इसके साथ ही बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने का संदेश भी दिया।
तुलसी राम ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण किए बिना मानव जीवन को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। प्राकृतिक संसाधनों का लगातार बढ़ता दोहन आने वाले समय में गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। इसलिए समय रहते पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज को जागरूक होना जरूरी है।
तुलसी राम धार्मिक यात्रा के साथ-साथ लोगों को प्रकृति संरक्षण और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करने का संदेश भी दे रहे हैं। उनका कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण और प्रकृति की रक्षा करना भी प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और जंगलों को बचाने की अपील की। इसके साथ ही बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने का संदेश भी दिया।
तुलसी राम ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण किए बिना मानव जीवन को सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। प्राकृतिक संसाधनों का लगातार बढ़ता दोहन आने वाले समय में गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है। इसलिए समय रहते पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज को जागरूक होना जरूरी है।