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ट्रायल, टूर्नामेंट को मांग कर लेना पड़ता है मैदान
Updated Thu, 14 Jun 2018 11:12 PM IST
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ट्रायल को मांग कर लेना पड़ता है मैदान : सेन
जिला फुटबाल संघ के अध्यक्ष वीर विक्रम सेन का मानना है पहाड़ी जिला होने पर यहां के युवाओं में खेल प्रतिभा की कमी नहीं है। शिमला के गोल कीपर सुनील कायथ इंडिया टीम में भी खेलते आ रहे हैं। लीग मुकाबलों में भी वह खेल चुके हैं। उन्होंने कहा कि साल में एक जिला स्तरीय टूर्नामेंट और अलग अलग वर्ग की टीम ट्रायल तक शहर के दो कान्वेंट स्कूलों से मैदान मांगना पड़ता है। प्रशिक्षण और खेले अभ्यास को मैदान उपलब्ध नहीं होता है। इसके बावजूद जिला संघ हर साल जिला प्रतियोगिता करवाता है। खेल विभाग से सालाना मिलने वाली आठ हजार की राशि भी पिछले करीब पांच सालों से जिला संघ को नहीं मिली है। ऐसे में कैसे फुटबाल खेल को बढ़ावा मिलेगा? बीते वर्ष जिला की टीम ने फाइनल तक में प्रवेश किया था। उनका कहना है कि सरकार से प्रोत्साहन और सुविधाएं मिलें तो शिमला के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा सकते हैं।
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जिला फुटबाल संघ के अध्यक्ष वीर विक्रम सेन का मानना है पहाड़ी जिला होने पर यहां के युवाओं में खेल प्रतिभा की कमी नहीं है। शिमला के गोल कीपर सुनील कायथ इंडिया टीम में भी खेलते आ रहे हैं। लीग मुकाबलों में भी वह खेल चुके हैं। उन्होंने कहा कि साल में एक जिला स्तरीय टूर्नामेंट और अलग अलग वर्ग की टीम ट्रायल तक शहर के दो कान्वेंट स्कूलों से मैदान मांगना पड़ता है। प्रशिक्षण और खेले अभ्यास को मैदान उपलब्ध नहीं होता है। इसके बावजूद जिला संघ हर साल जिला प्रतियोगिता करवाता है। खेल विभाग से सालाना मिलने वाली आठ हजार की राशि भी पिछले करीब पांच सालों से जिला संघ को नहीं मिली है। ऐसे में कैसे फुटबाल खेल को बढ़ावा मिलेगा? बीते वर्ष जिला की टीम ने फाइनल तक में प्रवेश किया था। उनका कहना है कि सरकार से प्रोत्साहन और सुविधाएं मिलें तो शिमला के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमा सकते हैं।