सरकार के 100 दिन: सीएम जयराम ने अमर उजाला को बताया क्या है आगे की योजना
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अपना पहला बजट पेश कर चुके मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सौ दिन के टारगेट को महज एक शुरुआत मानते हैं। उनका कहना है कि विपक्ष के कमजोर वित्तीय प्रबंधन के आरोप का जवाब पहले बजट और अब सौ दिन की उपलब्धियों में हर विभाग के अभिनव आइडिया पर आधारित नई योजनाओं से देंगे।
दो दशकों से हिमाचल की सत्ता में रही एकरसता को उनकी सरकार ने कैसे तोड़ा, इसे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने ‘अमर उजाला’ के विशेष संवाददाता अरुणेश पठानिया से बातचीत में साझा किया।
प्रश्न - सौ दिन के एजेंडे में आपका फोकस किन क्षेत्रों पर है?
मुख्यमंत्री - सौ दिन का कॉन्सेप्ट केवल छोटी सी शुरुआती लक्ष्य है। जनहित की सरकार देना हमारा सबसे बड़ा एजेंडा है। यह सरकार पांच वर्ष के लिए चुनी गई है और कई वर्षों का विजन लेकर उतरी है। बजट ने सरकार के अभिनव विचार और नई पहल को लेकर कई चीजें साफ कर दी हैं।
सौ दिन के एजेंडे को उसी से जोड़कर सरकार की एक अच्छी शुरुआत देने की कोशिश के तौर पर लिया जाना चाहिए। पहले सौ दिन में विभागों के पूरे किए टारगेट और उनकी योजनाएं व पहल 9 अप्रैल को आपके सामने आएंगी।
शुरुआती फोकस तीन एरिया पर है। पर्यटन के क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रोजगार से जोड़ना, नई खनन नीति लाकर प्रदेश में आय के संसाधन विकसित करना और लंबे समय से ऊर्जा के क्षेत्र में आए ठहराव को पावर पॉलिसी में बदलाव से आगे लेकर आना है। हमें प्रदेश का राजस्व बढ़ाना है और जनहित में विकास कार्य तेज करने हैं।
बढ़ते कर्ज के बीच नई योजनाओं के लिए फंड कहां से लाएंगे?
प्रश्न - बढ़ते कर्ज के बीच नई योजनाओं के लिए फंड कहां से लाएंगे?
मुख्यमंत्री - यह सही है कि प्रदेश पर कर्ज 47 हजार करोड़ पहुंच गया है, पर हमने सारा होमवर्क किया है। हर योजना के लिए थोड़ा ही सही पर बजट प्रावधान किया है। पहले सिर्फ घोषणाएं होतीं थीं। सरकार कर्ज लेती थी, लेकिन उसका दुरुपयोग होता था। हम जो भी कर्ज लेंगे उसका इस्तेमाल सिर्फ प्रदेश और जन विकास में करेंगे। केंद्र से भी हमें मदद का पूरा आश्वासन मिला है।
प्रश्न - मुख्य सचेतक जैसे पद सृजित करने के पीछे क्या राजनीतिक मजबूरी है? फिर तो आप सीपीएस भी बनाएंगे?
मुख्यमंत्री - सीपीएस को लेकर मामला न्यायिक प्रक्रियाधीन है। दिल्ली सरकार दिक्कत में आई थी। ऐसे में हम सीपीएस अभी तैनात नहीं कर रहे। रही पद सृजित करने की बात, तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार राजनीतिक नियुक्तियों को अनदेखा नहीं कर सकती। वीरभद्र सरकार ने तो नौ सीपीएस बनाए थे, हम सिर्फ दो पद सृजित कर रहे हैं, फिर भी यह महज औपचारिक नियुक्तियां नहीं होंगी, बल्कि इनका काम भी तय होगा।
प्रश्न - पहले सिर्फ निगमों-बोर्डों में ताजपोशी होती रहीं, आप तो नई परंपरा डाल रहे हैं?
मुख्यमंत्री - निगमों-बोर्डों में हमने अभी तक अधिक नियुक्तियां नहीं की हैं। हम चरणबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं। मुख्य सचेतक और उप मुख्य सचेतक से अगली सरकार को भी रास्ता मिला है, यह बात भी सही है, लेकिन हम ज्यादा राजनीतिक नियुक्तियां नहीं करेंगे। कांग्रेस की तरह 45 निगमों-बोर्डों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नहीं बना रहे।
तय लक्ष्य पाने में नौकरशाही कितनी कारगर दिख रही?
प्रश्न - तय लक्ष्य पाने में नौकरशाही कितनी कारगर दिख रही?
मुख्यमंत्री -अफसरशाही को लेकर प्रदेश में धारणा थी कि यह दो खेमों में बंटी है। सरकार बनने के बाद शुरुआती दौर में नौकरशाही देख रही थी कि सरकार चलेगी या नहीं। अफसर संशय में थे। दो विधानसभा सत्रों ने साबित किया है कि अफसर सरकार के होते हैं। सदन में विषयों पर जिस तरह अफसरों ने बजट से लेकर दूसरी चर्चाओं में सहभागिता दी, उससे साफ हो गया कि अफसर काम करने का मन बना चुके हैं। उन्हें समझ आ गई है कि काम पार्टी विशेष वाली इमेज से नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस से चलेगा।
प्रश्न- वीरभद्र सरकार के खिलाफ दी चार्जशीट पर आप कार्रवाई से क्यों बच रहे?
मुख्यमंत्री - ऐसा नहीं है कि भाजपा की सौंपी चार्जशीट पर सरकार कुछ नहीं कर रही, लेकिन यह ठीक नहीं है कि हर बात को जांच के नाम पर उलझाया जाए। सरकार बदले की भावना से भी काम नहीं करेगी। कई चीजें ऐसी हैं, जिसमें पूरे दस्तावेज और तथ्य हैं, चार्जशीट के उन मामलों पर कार्रवाई होगी। बस हम यही कह रहे हैं कि जिन मामलों में पर्याप्त तथ्य हैं, उन पर कार्रवाई हो। इसमें राजनीति नहीं होगी।
प्रश्न- ट्रांसफर एक्ट, निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने जैसे मामलों में अनिर्णय की स्थिति क्यों है?
मुख्यमंत्री -अनिर्णय की स्थिति कहीं नहीं है। सही तरीके से काम करने में समय लगता है। ऐसा नहीं है कि हम तबादलों को लेकर ट्रांसफर एक्ट बनाने को गंभीर नहीं हैं। शिक्षा मंत्री इस पर बहुत कुछ कर चुके हैं। तबादलों के नाम पर कर्मचारियों को परेशान करने की मंशा नहीं होनी चाहिए। हर किसी को बराबर मौका मिले और पारदर्शी तबादला प्रक्रिया हो, इसी उद्देश्य से ट्रांसफर एक्ट बना रहे हैं। समय जरूर लग रहा है, लेकिन आश्वस्त कर दूं कि सरकार तबादलों में पुरानी व्यवस्था खत्म करेगी। यह बात सही है कि निजी स्कूलों की मनमानी नहीं होनी चाहिए, उसके लिए व्यवस्था लगभग तैयार हो चुकी है।
प्रश्न - सरकार और भाजपा की अगली चुनौती लोकसभा चुनाव के लिए कितने तैयार हैं?
मुख्यमंत्री -यह सही बात है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार चुनाव से नहीं बच सकती, चाहे वे किसी भी तरह के चुनाव हों। अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव हर भाजपा शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री के लिए चुनौती हैं। जनता के बीच हम केंद्र में पांच साल में किए अभूतपूर्व कार्यों और राज्य सरकार के काम को लेकर जाएंगे। भाजपा निश्चित तौर पर चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करेगी।