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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   10 meetings will be held in the monsoon session of Himachal Assembly,

हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र में होंगी 10 बैठकें, तिथियां घोषित

Tue, 18 Aug 2020 08:04 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 18 Aug 2020 08:04 PM IST
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10 meetings will be held in the monsoon session of Himachal Assembly,
हिमाचल विधानसभा

कोरोना संकट के बीच हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र 7 से 18 सितंबर तक चलेगा। सत्र में कुल 10 बैठकें होंगी। संक्रमण को देखते हुए इस बार समस्याएं लेकर आने वाले आगंतुकों पर रोक रहेगी। विधायकों को छोड़ने के बाद उनका निजी स्टाफ भी परिसर में नहीं रुकेगा। विस सदस्यों की सीट के बीच पॉलीकार्बोनेट शीट लगाई जाएगी। जिस दिन जो विषय चर्चा या प्रश्नकाल में लगा हो, उनसे संबंधित अफसर ही ही बुलाए जाएंगे। 10 सितंबर को गैर सरकारी दिवस कार्य होगा।

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विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने बताया कि राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय की संस्तुति के बाद मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। विस अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना की वजह से विधानसभा का बजट सत्र 23 मार्च को स्थगित करना पड़ा था। बजट सत्र में 15 बैठकें ही हो सकीं थीं। चूंकि वित्त वर्ष में विधानसभा की 35 बैठकें कराना जरूरी होता है, इसलिए मानसून सत्र में 10 बैठकें होंगी, जबकि शेष विधानसभा के शीत सत्र में होंगी। परमार ने कहा कि कोविड को लेकर एसओपी का विस सचिवालय शत-प्रतिशत पालन कराएगा।
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प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति को सैनिटाइजर और मास्क मिलेगा। विधायकों की हर सीट के बीच चार से पांच फीट की दूरी होगी और पॉलीकार्बोनेट शीट लगाकर अलग बैठाया जाएगा। विस परिसर हर दिन सैनिटाइज होगा। विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि अधिसूचना के बाद विधायक आज से ही सवाल लगा सकते हैं। हर विधायक अधिकतम पचास प्रश्न पूछ सकता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों से अपील है कि वे सत्र का सुचारु संचालन करने में सहयोग करें और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करें। 

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कोरोना काल के खर्चों के लेकर एक-एक रुपए का हिसाब लेगा विपक्ष

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र बुलाना सरकार की मजबूरी है। दस दिन तक चलने वाल सत्र में सरकार पिछले छह माह की अवधि के दौरान एक-एक रुपए के खर्चे का पूरा हिसाब लेगी। मुकेश ने कहा कि प्रदेश में भी कोरोना संकट बना हुआ है और  कोरोनकाल में सरकार ने कितना खर्चा किया और इसकी आड़ में भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष सदन में पूरी तरह से घेरेगा।

विपक्ष के पास पिछले छह माह के दौरान के जनता के अहित में लिए फैसले ज्वलंत मुद्दों के हथियार साथ में रहेंगे। इन हथियारों से सरकार को पूरी तरह से घेरा जाएगा। सरकार ने विधायक निधि में कटौती की और सरकार ने अपने फिजूलखर्ची तक नहीं रोकी। जनता पर बिजली, पानी और तेल की महंगी दरें थोपी गई। ऐसे संकट काल में ऐसी क्या मजूरी थी कि जयराम सरकार को मंत्रिमंडल विस्तार करना पड़ा और मंत्रियों के विभाग बदलने पड़े।

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