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महिला दिवस: शत्रु संपत्तियों पर कब्जेदारों की ‘शत्रु’ हैं कैसर जहां, बोलीं- मरते दम तक रहेगी ये कोशिश

Mon, 08 Mar 2021 02:46 PM IST
शिखा पांडेय सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 08 Mar 2021 02:46 PM IST
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Women’s Day 2021 Special story, kanpur news
कैसर जहां - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तानी नागरिकों की कानपुर में पड़ीं संपत्तियों को लड़कर शत्रु संपत्ति घोषित कराने और उन पर कब्जा करने वाले भूमाफियाओं पर एफआईआर कराने के पीछे महिला कैसर जहां है। जो खुद भी बशीर इस्टेट स्थित शत्रु संपत्ति में बतौर किरायेदार रहती हैं लेकिन उनका कहना है कि यह संपत्तियां अब सरकार की हैं। मोदी सरकार ने 2017 में इस पर कानून भी बना दिया है।
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घर पर कब्जा करने के दुस्साहस ने बनाया साहसी
57 साल की कैसर जहां अपने परिवार के साथ कई दशकों से बशीर इस्टेट में बतौर किरायेदार रहती हैं। यह संपत्ति पाकिस्तानी नागरिक शाहिद हलीम की है। उनके पाकिस्तान जाने के बाद पॉवर ऑफ अटॉर्नी बेकनगंज चौराहे पर बाबा बिरयानी सेंटर के संचालक मुख्तार अहमद उर्फ बाबा के पास थी।
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कैसर बताती हैं बाबा ने शत्रु संपत्ति का एक हिस्सा गुलाम मुहिउद्दीन उर्फ छिद्दन पड़वा और उसके भाई जामी पड़वा को दे दिया। 2001 में कैसर जहां शहर के बाहर एक शादी में गई थीं, तभी दोनोें भाइयों ने उनके बड़े हॉल में कब्जा कर लिया। इस दुस्साहसिक घटना ने ही कैसर को साहसी बना दिया।
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कैसर जहां की कोशिशों से 18 मार्च 2001 को तत्कालीन डीएम बीएस भुल्लर ने इन संपत्तियों को शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया। हालांकि इसके बाद तत्कालीन एडीएम एफआर रहे एसके सिंह ने डीएम का ऑर्डर पलट दिया। कैसर जहां ने राजस्व परिषद में इसे चुनौती दी तो तीन जुलाई 2003 में एडीएम का आदेश निरस्त करने के साथ ही एसके सिंह के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए।


शत्रु संपत्तियों का दाखिल-खारिज भी डीएम के नाम
कैसर जहां ने बताया कि तीन साल पहले शत्रु संपत्तियों की खरीद फरोख्त की सभी रजिस्ट्रियां निरस्त कर दी गईं। नगर निगम में दाखिल-खारिज भी जिलाधिकारी के नाम पर हो गया। राजस्व परिषद के आदेश पर बजरिया, बेकनगंज, अनवरगंज और कल्याणपुर थाने में एफआईआर कराई गई हैं। इसके बावजूद नामजद आरोपियों की गिरफ्तारियां नहीं हुई हैं। कैसर कहती हैं जब तक आरोपी जेल नहीं चले जाते वे खामोश नहीं बैठेंगी।
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