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आज की नारी हर चुनौती पर प्रहार है, पढ़िए उद्यमिता के क्षेत्र में नाम कमाने वाली महिलाओं के संघर्ष की कहानी

Mon, 08 Mar 2021 01:27 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 08 Mar 2021 01:27 PM IST
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International Women’s Day 2021, Special story, story of struggle
प्रतिभा, दिव्या व निधि अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला
अब न चुप रहती है, न गम सहती है और न ही लाचार है...। ये आज की नारी है, मुखर है, मजबूत है, हर चुनौती पर प्रहार है। अब घूरने पर आंख झुकाती नहीं, आंख दिखाती है। डरती नहीं, डराती है। उद्यमिता के क्षेत्र में भी महिलाओं ने नाम कमाया है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर ऐसी ही अपराजिताओं की संघर्ष और साहस की कहानियों से रूबरू कराते हैं, जिन्होंने तमाम विरोधों और अवरोधों के बाद भी खुद को स्थापित किया है। पुरुष प्रधान कहे जाने वाले क्षेत्रों में भी अपनी सफलताओं के झंडे गाड़े हैं...
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पहले बनाती थीं रॉ मैटीरियल, अब लगा ली पूरी यूनिट 
कानपुर के आवास-विकास हंसपुरम में रहने वाली एमकॉम पास प्रतिभा कुमारी ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर महिला उद्यमिता के क्षेत्र में बेहद कम समय में बड़ा नाम कर लिया है। पहले वे घर से फ्राक आदि बनाकर बेचती थीं। साथ ही अपने पति सुनील कुमार के साथ प्लास्टिक के फाइबर से धागा और बोतलों का निर्माण करती थीं।
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यह धागा आदि टेक्सटाइल और होजरी में उपयोग में आता था। डेढ़ साल पहले जब सरकार ने एक जिला एक उत्पाद योजना में टेक्सटाइल और होजरी को शामिल कर लिया तो उन्होंने सरकार से डेढ़ करोड़ लोन लिया। अब इन्होंने पनकी इस्पात नगर में टेक्सटाइल और होजरी उत्पादों की मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाई है।
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इसमें 70 लोगों को रोजगार मिला है। कंपनी में बेडशीट, कुशन कवर समेत 11 तरह के उत्पाद बनते हैं। कंपनी का कारोबार ढाई करोड़ से ऊपर हो गया है। इनके उत्पाद पूरे प्रदेश में बिक्री के लिए जाते हैं। इनकी यूनिट के वीडियो मुख्यमंत्री के पोर्टल पर भी चल रहे हैं। 

12वीं पास थी लेकिन कुछ करने की थी तमन्ना
यशोदा नगर के शंकराचार्य मोहल्ले में रहने वाली निधि अग्रवाल 12वीं पास हैं। लेकिन उनके मन में कुछ अलग करने की तमन्ना हमेशा से ही थी। परिवार ने साथ दिया और उन्होंने अपने बच्चों से मोबाइल फोन चलाना सीखा और निधि क्रिएशन नाम से ऑनलाइन व्यापार शुरू कर दिया। आज उनके इस ऑनलाइन प्लेटफार्म पर एक हजार से अधिक ग्राहक हैं।

उनकी बेटी सोनल अग्रवाल ने हाल में सीएस एक्जीक्यूटिव की परीक्षा में शहर में दूसरा स्थान पाया था। जबकि सोनल का भाई ट्रिपल आईआईटी कर रहा है। निधि ने बताया कि गृहिणी होने के साथ ही उनके मन में हमेशा यह चलता था कि क्या मैं कुछ नहीं कर सकती, मैं ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी।

इसके बाद भी हिम्मत नहीं हारी और अपनी भतीजी की मदद से ऑनलाइन प्लेटफार्म पर काम करना शुरू किया। बच्चों ने ऑनलाइन होलसेलरों, उत्पादकों को सर्च करना सिखाया। साइटों के बारें में जानकारी दी। पति मनोज अग्रवाल का आटोमोबाइल के पार्ट्स बनाने का काम है। उन्होंने भी हमेशा काम करने के लिए प्रेरित किया।

उनके मुताबिक मौजूदा समय में कोलकाता, सूरत, जयपुर, दिल्ली के होल सेलरों से आर्टीफिशियल ज्वैलरी, कपड़े खरीदकर ऑनलाइन बिक्री करती हैं। हर महीने अच्छी कमाई हो जाती है। पहली बार उन्होंने 160 रुपये की कमाई की थी। अब व्यापार में कई लाख रुपये का निवेश किया है। शुरूआत में कोई पूंजी भी नहीं थी। लॉक डाउन में अच्छा व्यापार भी मिला था।

प्राइवेट स्कूल की नौकरी छोड़ बन गई उद्यमी
साकेत नगर में रहने वाली दिव्या तिवारी ने एमबीए किया है। एक निजी स्कूल में कंप्यूटर की टीचर थी लेकिन इनमें भी कुछ अलग करने का जज्बा था। और नौकरी छोड़कर अब होजरी उत्पादों की ट्रेडिंग कर रही हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 13 लोगों को रोजगार भी दे रहीं हैं।

दिव्या के पति आशुतोष शुक्ला, बड़ौदा यूपी बैंक रनियां शाखा में कार्यरत हैं। इनके परिवार में सभी नौकरी पेशा हैं। दूर-दूर तक कारोबार से नाता नहीं था लेकिन अब उनका सपना मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने का सपना है। दिव्या ने 2011 में बीसीए, 2013 में एमबीए किया था।









इसके बाद वैंडी एकेडमी में दो साल कंप्यूटर टीचर के तौर पर नौकरी की। इसके बाद उनकी शादी हो गई। फिर 2018 में उन्होंने पढ़ाना शुरू किया। इस बीच उन्होंने होजरी उत्पादों की ट्रेडिंग शुरू कर दी। पिछले साल नवंबर में फर्म का पंजीकरण कराया। पूंजी की जरूरत हुई तो एक जिला एक उत्पाद ओडीओपी योजना के तहत आवेदन किया।

उन्हें साढ़े नौ लाख रुपये लोन के तौर पर मिले। अब वो अपने दो होजरी के ब्रांडों को कानपुर व आसपास के दो सौ किलोमीटर में बिक्री कर रही हैं। मौजूदा समय में 12 लाख का टर्नओवर हो चुका है। उनके मुताबिक नौकरी के दौरान ही खुद का कारोबार करने की ठानी थी। पति के मित्र के सहयोग से होजरी के उत्पादों का काम करना शुरू किया। अभी तीन लोगों का स्टाफ है। जबकि 10 अन्य लोग अप्रतत्यक्ष तौर पर रोजगार पा रहे हैं।
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