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RJ LS Polls: बांसवाड़ा का पॉलिटिकल गेम हिट, डोटासरा और रंधावा के आदेशों की उम्मीदवारों ने धज्जियां उड़ाई
Mon, 08 Apr 2024 06:04 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 08 Apr 2024 06:04 PM IST
सार
RJ LS Polls: लोकसभा चुनाव में नाम वापसी के दिन ऐसा पॉलिटिकल गेम हो गया कि देश भर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। हुआ यूं कि कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और प्रदेश प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा के बाप पार्टी से गठबंधन के निर्णय को पार्टी प्रत्याशियों ने ठुकरा दिया।
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राजस्थान लोकसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डूंगरपुर-बांसवाड़ा लोकसभा के कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद डामोर और बागीदौरा से विधानसभा उपचुनाव प्रत्याशी कर्पूर सिंह को सोमवार को नामांकन पत्र वापसी के दिन अपने पर्चे वापस लेने थे। कांग्रेस ने बांसवाड़ा जिले की इन दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार न लड़ाकर भारतीय आदिवासी पार्टी यानी बाप से गठबंधन किया था।
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा और प्रदेश प्रभारी रंधावा ने रविवार को जयपुर में पत्रकारों को कहा था कि उनका मकसद भारतीय जनता पार्टी के जीत के सिलसिले को रोकना है। लेकिन कांग्रेस के दोनों आलानेताओं के वादे सोमवार को हवा में उड़ गए, जब नामांकन वापस लेने वाले दोनों प्रत्याशी भूमिगत हो गए। बांसवाड़ा के कांग्रेस जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र पंड्या सुबह से दोनों प्रत्याशियों को फोन लगाते हुए हताश हो गए। हर बार दोनों के फोन स्विच ऑफ़ बता रहे थे।
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जिलाध्यक्ष पंड्या ने दोनों प्रत्याशियों की तलाश में उनके मित्रों, रिश्तेदारों के यहां कार्यकर्ताओं को दौड़ा दिया, मगर कोई लाभ नहीं हुआ। जिलाध्यक्ष जिला निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर खड़े चमत्कार की प्रतीक्षा करते रहे कि दोनों प्रत्याशी अचानक प्रकट होकर अपने नामांकन उठा लेंगे। मगर ऐसा होना था न हुआ। नामांकन वापसी का समय समाप्त हो जाने पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रमेश चंद्र पंड्या मुंह लटकाए हुए घर रवाना हो गए।
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मालवीया की चाल हुई कामयाब
चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी के बांसवाड़ा लोकसभा प्रत्याशी महेन्द्र जीत सिंह मालवीया की कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों के पर्चे न उठवाने की चाल कामयाब रही। दरअसल, एक माह पूर्व मालवीया कांग्रेस के ही सदस्य थे। प्रदेश में जब भी कांग्रेस की सरकार बनी मालवीया कैबिनेट मंत्री रहे। चर्चा है कि ईडी की कार्रवाई के डर से मालवीया भाजपा में शामिल हो गए। उनकी खुशनसीबी रही कि भाजपा ज्वॉइन करने के दो दिन बाद ही उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट मिल गया।
मालवीया को भाजपा का टिकट मिलने के बाद बाप पार्टी के राजकुमार रोत ने नामांकन भर दिया। रोत की लोकप्रियता को देख मालवीया को अपनी हार स्पष्ट दिखाई देने लगी। उन्होंने अपनी पोजीशन मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस प्रत्याशियों को नामांकन उठाने से रोकने का षड्यंत्र रचा। बता दें कि नामांकन वापस न लेने वाले बांसवाड़ा लोकसभा के कांग्रेस प्रत्याशी अरविंद डामोर को छह वर्ष के लिए कांग्रेस की सदस्यता से निष्कासित करने का आदेश पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जारी किया।