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Hindi News ›   Rajasthan ›   Udaipur News ›   Dungarpur Kinnar Yashwanti became first transgender college student of district passing 12th in 2016

Dungarpur: जिले की पहली ट्रांसजेंडर कॉलेज स्टूडेंट बनी यशवंती, साल 2016 में 12वीं पास के बाद अब मिला एडमिशन

Wed, 03 Jul 2024 04:05 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर/उदयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, डूंगरपुर/उदयपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 03 Jul 2024 04:05 PM IST
सार

यशवंती ने बीए में इतिहास, राजनीति शास्त्र और भूगोल विषय चुना है। निदेशक भरत जोशी ने बताया कि साल 2016 में 12वीं के बाद करीब आठ साल का लंबा अंतराल हो गया था।

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Dungarpur Kinnar Yashwanti became first transgender college student of district passing 12th in 2016
कॉलेज स्टूडेंट बनी यशवंती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'मुझे नापसंद है ताली बजाकर बख्शीश लेना, मेरी ख्वाहिश है कलम चलाकर सम्मान से जीना' यह ख्वाहिश है एक किन्नर यशवंती की, जो ताली बजाकर बख्शीश लेने के बजाय उच्च शिक्षा प्राप्त कर सम्मानित जीवन जीना चाहती है। मगर हमारी सामाजिक और कानूनी व्यवस्थाएं उसके शिक्षा और रोजगार प्राप्त करने में अब तक बाधक बनी हुई हैं।

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बता दें कि 12वीं पास यशवंती को लाख जतन करने पर बुधवार को कॉलेज में दाखिला मिला है। सागवाड़ा के गुरुकुल कॉलेज में उसे बीए प्रथम वर्ष में प्रवेश दिया गया। कॉलेज के डायरेक्ट भरत जोशी व शरद जोशी के प्रयासों की बदौलत यूनिवर्सिटी ने यशवंती को प्रवेश देने की अनुमति प्रदान की। इससे पूर्व यशवंती ने उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, सागवाड़ा, सलुम्बर के कॉलेजों में प्रवेश के लिए प्रयास किए। मगर आवेदन पत्र में महिला या पुरुष के अलावा जेंडर का कॉलम नहीं होता। जबकि वह थर्ड जेंडर से ताल्लुक रखती हैं। यशवंती ने 12वीं पास करने के बाद राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल पद के लिए आवेदन किया था। वहां भी मेल या फीमेल न होना उसके कैरियर की राह का रोड़ा बन गया था।
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बहरहाल, यशवंती को सागवाड़ा के गुरुकुल कॉलेज में प्रवेश मिल गया। उसे इतिहास, राजनीति शास्त्र और भूगोल विषयों को पढ़ने की इजाजत दी गई है। कॉलेज प्रबंधन ने तीन साल तक उसकी फीस माफ करने और निःशुल्क किताबें मुहैया कराने का नेक काम किया है।
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यशवंती मूल रूप से सागवाड़ा के पास स्थित कोकापुर गांव की रहने वाली है। घर में शिक्षा की उपेक्षा और बचपन से बख्शीश के सहारे जीवन जीने के दबाव के चलते वह अपने मामा के घर पाडवा चली गई थी। मामा स्वभाव से सुधारवादी थे, अतः उन्होंने यशवंती को अपने घर रहकर पढ़ने की इजाजत दे दी। यशवंती ने कक्षा एक से 12वीं तक की शिक्षा अपने मामा के घर पाडवा रहकर प्राप्त की। उसके मार्गदर्शक बने जयपुर निवासी नूर शेखावत जो स्वयं किन्नर बिरादरी के हैं।


नूर शेखावत राजस्थान में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले किन्नर हैं। वे यशवंती को उसके मानवाधिकार की जानकारी देते हैं। समाज और व्यवस्थाओं से लड़ने की प्रेरणा देते हैं। यशवंती के मन में आज भी कसक है कि वह सरकारी व्यवस्थाओं में खामियों के चलते योग्य पात्र होने के बावजूद पुलिस कांस्टेबल बनने से वंचित कर दी गई। अब वह ग्रेजुएशन करके पुलिस सब इंस्पेक्टर बनके अपनी मुराद पूरी करेगी।

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