शेखावाटी में कांग्रेस का दम, भाजपा पिछड़ी: सीकर में बहुमत तो झुंझुनूं में निर्दलीयों ने बिगाड़ा पूरा गणित
राजस्थान नगर निकाय चुनाव के नतीजों में शेखावाटी के सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों में कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा के मुकाबले मजबूत रहा है। सीकर नगर परिषद में कांग्रेस ने 65 में से 38 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा को 22 सीटें मिलीं।
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राजस्थान के नगर निकाय चुनावों के नतीजों के बाद शेखावाटी की सियासी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। सीकर, झुंझुनूं और चूरू जिलों के परिणामों को एक साथ देखें तो यहां कांग्रेस का प्रदर्शन भाजपा के मुकाबले बेहतर रहा है। हालांकि, कई निकायों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। इससे दोनों प्रमुख दलों के लिए बोर्ड गठन का गणित कई जगह उलझ गया है। राज्य स्तर पर भाजपा सबसे अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बनी है, लेकिन शेखावाटी के इन तीन जिलों में चुनावी तस्वीर इससे अलग नजर आई।
सीकर में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत
सीकर नगर परिषद का परिणाम शेखावाटी में कांग्रेस के प्रदर्शन का सबसे बड़ा उदाहरण है। 65 वार्डों वाली सीकर नगर परिषद में कांग्रेस ने 38 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा को 22 सीटें मिलीं, जबकि चार वार्ड निर्दलीयों और एक सीट आरएलपी के खाते में गई है। इस तरह कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले 16 सीटों की बढ़त बनाई है।
वहीं वार्ड 17 में चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस और निर्दलीय समर्थकों के बीच विवाद हो गया। इस दौरान पथराव की घटना भी सामने आई, जिससे चुनाव के बाद माहौल गरमा गया। दूसरी ओर खाटूश्यामजी में भाजपा और कांग्रेस दोनों को आठ-आठ सीटें मिलीं। यहां निर्दलीय और आरएलपी पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है।
झुंझुनूं में निर्दलीय सबसे आगे
झुंझुनूं जिले के चुनाव परिणामों ने कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीयों की ताकत भी सामने रखी है। जिले की 19 निकायों के कुल 555 वार्डों में कांग्रेस ने 193 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा 157 सीटों पर रही। वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों ने 205 वार्डों में जीत हासिल की। यानी झुंझुनूं जिले में सबसे ज्यादा सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं। हालांकि भाजपा और कांग्रेस की तुलना करें तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है।
झुंझुनूं नगर परिषद में कांग्रेस ने 30 वार्ड जीते, जबकि भाजपा और निर्दलीयों को 15-15 सीटें मिलीं। चिड़ावा में कांग्रेस को 13 और भाजपा को 10 सीटें मिलीं, जबकि निर्दलीयों ने 22 वार्डों में जीत दर्ज की। नवलगढ़ में कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा के खाते में 15 सीटें आईं। इन परिणामों से झुंझुनूं में कांग्रेस के संगठनात्मक प्रदर्शन की स्थिति साफ होती है, लेकिन बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों की ताकत भी बड़ा फैक्टर बन गई है।
चूरू में भी निर्दलीयों ने बढ़ाई चुनौती
चूरू में भी चुनावी मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं रहा। जिले के 11 निकायों के कुल 429 वार्डों में मतदान हुआ था। कई निकायों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों के समीकरण प्रभावित किए हैं।
चूरू नगर परिषद के 60 वार्डों में चुनाव से पहले ही करीब 10 वार्ड ऐसे थे, जहां निर्दलीय प्रत्याशी भाजपा और कांग्रेस के प्रमुख उम्मीदवारों के सामने चुनौती बने हुए थे। चुनाव परिणाम के बाद भी कई जगह निर्दलीयों की भूमिका अहम बनी हुई है।
कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत, निर्दलीय बने गेमचेंजर
सीकर, झुंझुनूं और चूरू तीनों जिलों के परिणामों को एक साथ देखें तो शेखावाटी में भाजपा के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत नजर आता है। खास तौर पर सीकर में कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत और झुंझुनूं में भाजपा से अधिक सीटें हासिल करना इसकी तस्वीर साफ करता है। हालांकि, इन चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशी भी बड़े फैक्टर के रूप में उभरे हैं। झुंझुनूं में तो निर्दलीयों ने भाजपा और कांग्रेस दोनों से अधिक सीटें जीती हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम आने के बाद अब बोर्ड गठन की अगली कवायद में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कई निकायों में महत्वपूर्ण रहने वाली है। शेखावाटी में कांग्रेस का प्रदर्शन भले ही मजबूत रहा हो, लेकिन बोर्ड गठन के दौरान समर्थन और समीकरणों का असली असर सामने आएगा।