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Hindi News ›   Rajasthan ›   A Young Scrap Collector from Reengus Will Now Become a Doctor; Honoured by the MLA

Sikar: कबाड़ का काम, बेटे को खोने का दर्द... फिर भी नहीं टूटा हौसला, नीट में सुनील गाड़िया लुहार ने रचा इतिहास

Mon, 20 Jul 2026 08:47 AM IST
सीकर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर Published by: सीकर ब्यूरो Updated Mon, 20 Jul 2026 08:47 AM IST
सार

राजस्थान के सीकर जिले के रींगस निवासी सुनील गाड़िया लुहार ने कठिन संघर्षों के बीच नीट परीक्षा में 593 अंक हासिल कर ओबीसी वर्ग में 5,680वीं रैंक प्राप्त की। आर्थिक तंगी के कारण पिता के साथ कबाड़ खरीदने का काम करने वाले सुनील ने छह महीने के बेटे को खोने के गहरे दर्द को अपनी ताकत बनाया और डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की।

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A Young Scrap Collector from Reengus Will Now Become a Doctor; Honoured by the MLA
सुनील गाड़िया लुहार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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राजस्थान के सीकर जिले के रींगस से संघर्ष, मेहनत और हौसले की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। वार्ड नंबर-12 निवासी सुनील गाड़िया लुहार ने आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और छह महीने के मासूम बेटे को खोने जैसे गहरे दुख के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने नीट परीक्षा में 593 अंक हासिल कर ओबीसी वर्ग में 5,680वीं रैंक प्राप्त की। उनकी इस सफलता ने न केवल परिवार बल्कि पूरे गाड़िया लुहार समाज का नाम रोशन कर दिया। उनकी उपलब्धि पर खंडेला विधायक सुभाष मील भी उनके घर पहुंचे और भावी डॉक्टर का सम्मान किया।

विधायक ने घर पहुंचकर किया सम्मान

जैतूसर रोड स्थित सुनील के घर पहुंचे विधायक सुभाष मील ने साफा पहनाकर और श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर उनका सम्मान किया। उन्होंने सुनील के माता-पिता को मिठाई खिलाकर बधाई दी और कहा कि विपरीत परिस्थितियों में मिली यह सफलता पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा है। विधायक ने विश्वास जताया कि सुनील आगे चलकर समाज और क्षेत्र का नाम रोशन करेंगे। इस दौरान पूर्व पार्षद विष्णु गंगावत सहित कई लोग मौजूद रहे।

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आर्थिक तंगी के बीच पिता के साथ किया कबाड़ का काम

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सुनील का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे लंबे समय तक अपने पिता के साथ घर-घर जाकर कबाड़ खरीदने का काम करते रहे। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां भी निभाईं और जरूरत पड़ने पर पिता का हाथ बंटाते रहे।

बेटे को खोने का दर्द बना डॉक्टर बनने की प्रेरणा

करीब सात महीने पहले बीमारी के कारण सुनील के छह महीने के बेटे का निधन हो गया। यह दुख किसी भी इंसान को तोड़ सकता था, लेकिन सुनील ने इस दर्द को अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय और अधिक मेहनत की।

सुनील का कहना है कि बेटे को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पाने का दर्द उन्हें हमेशा डॉक्टर बनने के लिए प्रेरित करता रहेगा, ताकि भविष्य में वे जरूरतमंद लोगों का बेहतर इलाज कर सकें और उनकी सेवा कर सकें।

मोबाइल से बनाई दूरी, पढ़ाई पर रखा पूरा फोकस

सुनील ने बताया कि नीट की तैयारी के दौरान उन्होंने मोबाइल फोन से पूरी तरह दूरी बना ली थी। वे हर दिन केवल पढ़ाई पर ध्यान देते थे। खाली समय में पिता के काम में भी मदद करते रहे। लगातार मेहनत और अनुशासन का ही नतीजा रहा कि उन्होंने नीट में 593 अंक हासिल करते हुए ओबीसी वर्ग में 5,680वीं रैंक प्राप्त की।

परिवार ने बताया समाज के लिए प्रेरणा

पिता भगवान सहाय लोहार ने कहा कि उनके समाज में आज भी कई बच्चों को कम उम्र से ही पारंपरिक काम में लगा दिया जाता है, लेकिन सुनील ने अपनी सफलता से इस सोच को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। माता सिकरी देवी और पत्नी इंद्रा देवी ने कहा कि यह उपलब्धि पूरे समाज के लिए गर्व का क्षण है। उनका मानना है कि सुनील की सफलता आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करेगी।

संघर्ष से सफलता तक की मिसाल बने सुनील

सुनील गाड़िया लुहार की सफलता यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो आर्थिक तंगी, पारिवारिक जिम्मेदारियां और जीवन के सबसे बड़े दुख भी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकते। उनकी कहानी आज उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को पूरा करने का हौसला रखते हैं।

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