फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Kota News ›   reasons behind students suicide in Kota Coaching

Kota Coaching: किस दुष्चक्र में फंसकर बच्चे लगा रहे मौत को गले, कोचिंग छात्रों ने खुद बताई इसके पीछे की वजहें

Wed, 21 Dec 2022 02:38 PM IST
रोमा रागिनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: रोमा रागिनी Updated Wed, 21 Dec 2022 02:38 PM IST
सार

Kota Coaching Suicide- 2019 में 18 और 2020 में 20 छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी। ऐसे में कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले बच्चे मानते हैं कि ऐसे कई फैक्टर हैं, जो उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेलता है। यही फैक्टर कमजोर पलों को जन्म देता है। जिसमें बच्चे मौत को गले लगा लेते हैं। 

विज्ञापन
reasons behind students suicide in Kota Coaching
कोटा कोचिंग छात्रों का सुसाइड - फोटो : Social Media

विस्तार

कोचिंग नगरी कोटा में छात्रों के सुसाइड के मामले बढ़ गए हैं। पिछले दिनों एक साथ तीन छात्रों ने आत्महत्या कर लिया था। जिसके बाद हंगाम खड़ा हो गया। बहस छिड़ी कि क्यों सुनहरे भविष्य का सपना लेकर कोटा आने वाले बच्चे सुसाइड करने को मजबूर हो रहे हैं।

विज्ञापन


प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चे हर रोज व्यस्त दिनचर्या, गलाकाट प्रतियोगिता और होमसिकनेस ये सभी फैक्टर अवसाद को बढ़ाते हैं और कमजोर क्षणों में छात्रों के लिए आत्मघाती बन सकते हैं। ये बातें नीट की तैयारी कर रही मध्यप्रदेश की प्रगति गुप्ता ने कही। तीन छात्रों के सुसाइड मामला सामने आने के बाद बहस छिड़ी है कि ऐसा क्या है कि छात्र आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। इसके जवाब में प्रगति ने कहा कि कोटा आने वाले कहीं न कहीं कठिन सफर के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं लेकिन प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का समय लंबा होता है। ऐसे में हम में से कई पहली बार परिवार को छोड़कर पढ़ने के लिए दूर आते हैं। इसलिए होमसिकनेस के साथ पढ़ाई का दवाब अक्सर हमारे लिए कमजोर पल का निर्माण करता है। जिसमें हम खुद को अकेला महसूस करते हैं।

विज्ञापन

पढ़ाई का शेड्यूल इतना बिजी की घर भी नहीं जा पाते
उत्तर प्रदेश के इटावा के संदीप तिवारी ने बताया कि 10 महीने की तैयारी का शेड्यूल इतना व्यस्त होता है कि ब्रेक के दौरान घर भी नहीं जा पाते हैं। हमेशा छुट्टियों में हमें पढ़ाई में पिछड़ जाने का डर सताता रहता है। यह ट्रेडमिल पर दौड़ने जैसा है और आप एक कदम भी नहीं चूक सकते। यदि आप दो दिनों की क्लास मिस करते हैं तो आपकी पढ़ाई दो सप्ताह पीछे जा सकती है। संदीप ने बताया कि वो जब से कोटा आए हैं, वो एक बार भी घर नहीं जा पाए। संदीप अप्रैल में कोटा आए थे।

बच्चे दुष्चक्र में फंसकर तनाव में चले जाते हैं
बिहार के मोतिहारी के 17 साल के अनिमेष कुमार भी व्यस्त क्लास शेड्यूल का हवाला देते हैं। अनिमेष नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की दूसरी बार तैयारी कर रहे हैं। अनिमेष का कहना है कि ये एक दुष्चक्र है। व्यस्त क्लास के बीच तालमेल बिठाने में छात्र फंस जाता है और खुद को दोष देता है और तनाव में चला जाता है।


अनिमेष ने आगे कहा कि 'पढ़ाई का तनाव रियल है। जब एक छात्र चीजों के साथ तालमेल बिठाने में फेल हो जाता है और छूटे हुए लेक्चर का बैगलॉग बढ़ता जाता है। ऐसे में छात्र अपने पढ़ाई के तरीके को दोष देता है और डिप्रेशन में चला जाता है।

विज्ञापन

मम्मी-पापा का पैसा बेकार न चला जाए
एक अन्य छात्र अफजल ने कहा कि मां-बाप का पढ़ाई में लगाया पैसा बेकार न चला जाए, ऐसे में छात्र और तनाव में रहने लगते हैं। अफजल ने बताया कि 'मैंने सोचा था कि यहां आने के बाद मैं अपनी तैयारी पर अधिक ध्यान दूंगा लेकिन यह पूरी तरह से एक अलग दुनिया है। अब न केवल मुझे खुद सब कुछ मैनेज करना पड़ता है बल्कि मैं यह भी सोचता रहता हूं कि मेरे माता-पिता ने पैसा लगाया है और अगर मैं देने में असमर्थ रहा तो क्या होगा।'

 

दोस्तों के बीच भी टफ प्रतियोगिता
नाम नहीं बताने की शर्त पर एक छात्र ने बताया कि दो छात्र दोस्त होने के बावजूद एक दूसरे से कॉम्पिटिशन करते हैं। सबमें यही भावना होती है कि कॉम्पिटिशन एक ही सीट के लिए है और यही भावना बच्चों में होमसिकनेस और अवसाद को जन्म देती है।


बिहार के दो और मध्यप्रदेश के एक छात्र ने किया था सुसाइड
कोटा में लगभग दो लाख बच्चे कोचिंग संस्थानों में पढ़ रहे हैं। जिसमें से कम से कम 14 छात्रों ने इस साल सुसाइड कर लिया। पिछले सप्ताह आत्महत्या करने वाले तीन छात्रों में से दो छात्र बिहार के थे। अंकुश आनंद (18) नीट और उज्ज्वल कुमार (17) जेईई की तैयारी कर रहा था। दोनों एक पीजी के कमरे में रहते थे, जहां उन्होंने पंखे में फंदा लगाकर जान दे दी। तीसरा छात्र प्रणव वर्मा मध्यप्रदेश का रहने वाला था, जिसने जहर खाकर जान दे दी। 

कोरोना में नहीं आए थे सुसाइड के मामले
2021 में किसी भी छात्र की आत्महत्या की सूचना नहीं मिली थी। कोरोना के कारण कोचिंग सेंटर बंद थे। छात्रों ने अपने घरों से ऑनलाइन क्लास के जरिए पढ़ाई की थी। 2019 में 18 और 2020 में 20 छात्रों ने अपनी जान दे दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed