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Rajasthan: कोटा गवर्नमेंट कॉलेज में छात्र संघ शपथ ग्रहण पर विवाद, बीजेपी और कांग्रेस उलझन में

Mon, 05 Dec 2022 04:33 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 05 Dec 2022 04:33 PM IST
सार

राजस्थान के कोटा गवर्नमेंट कॉलेज में छात्र संघ के शपथ ग्रहण समारोह से पहले विवाद पैदा हो गया है। छात्र संघ की कार्यकारणी और कॉलेज प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। समारोह में मुख्य अतिथि बुलाने को लेकर यह विवाद बना है।

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Rajasthan Controversy over swearing in of student union in Kota Government College
छात्र संघ शपथ ग्रहण पर विवाद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोटा जिले के गवर्नमेंट कॉलेज में छात्र संघ के शपथ ग्रहण समारोह से पहले विवाद हो गया। विवाद के चलते छात्र संघ कार्यकारिणी और कॉलेज प्रशासन आमने-सामने आ गए। मामले में इतनी तनातनी हो गई कि दोनों में से कोई भी किसी की बात सुनने को राजी ही नहीं हो रहे।

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दरअसल, मामला है छात्र संघ शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य अथिति को बुलाने का। कॉलेज में चुनाव के बाद एबीवीपी का पैनल जीतकर आया है और अब छात्र संघ कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह होने जा रहा है। लेकिन कॉलेज प्रशासन किसी कांग्रेस नेता को मुख्य अथिति के तौर पर बुलाना चाहता है, जबकि एबीवीपी का पैनल बीजेपी के किसी केंद्रीय मंत्री को मुख्य अथिति को बुलाना चाहता है।
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कोटा कॉलेज से एबीवीपी के मनीष सामरिया ने जीत दर्ज की थी और इनके साथ ही अन्य पदों पर एबीवीपी के उम्मीदवार ही विजयी हुए थे। अब मसला ये हो गया कि कॉलेज प्रशासन राजस्थान सरकार की गाइडलाइन का अनुसरण करता है और इस कारण से कॉलेज प्रशासन कांग्रेस के किसी नेता को समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बुलाकर राजस्थान कांग्रेस में अपने नंबर बढ़ाना चाहता है। जबकि एबीवीपी का पैनल इस बात पर किसी भी सूरत में तैयार नहीं हो रहा।
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उसका कहना है कि जब शपथ ग्रहण एबीवीपी का है तो कोई कांग्रेस नेता को मुख्य अतिथि के तौर पर क्यों बुलाया जाए? एबीवीपी का पैनल किसी केंद्रीय मंत्री को शपथ ग्रहण समारोह का मुख्य अतिथि बनाना चाहता है। एबीवीपी का कहना है कि जब कार्यक्रम एबीवीपी का है तो कॉलेज प्रशासन क्यों हस्तक्षेप क्यों कर रहा है।


बता दें कि ये वही मनीष सामरिया हैं, जो छात्र संघ चुनाव जीतने के बाद अपनी कार पर लाल बत्ती लगाकर कॉलेज जा धमके थे और विवादों में घिर गए थे। मनीष को जानने वाले बताते हैं कि ये बचपन से ही बड़े जिद्दी स्वभाव के हैं। इन्हें जो करना होता है, उसे करके ही दम लेते हैं। अब ये बात तो कॉलेज प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। देखते है कि समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस का नेता बुलाया जाता है या बीजेपी का कोई केंद्रीय मंत्री। कॉलेज प्रशासन अपनी प्रशासनिक क्षमता की साख को बचाने में कामयाब हो पाता है या मनीष के जिद्दीपने के सामने घुटने टेक देता है।

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