कोटा में एक और प्रसूता की मौत: परिजनों का बवाल, क्या सिजेरियन ऑपरेशन से फेल हुई किडनी या इंफेक्शन ने ली जान?
Kota Hospital Death Case: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक और प्रसूता की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। सिजेरियन ऑपरेशन के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में लापरवाही के आरोपों से चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
विस्तार
राजस्थान के कोटा जिले स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशलिटी विंग में भर्ती प्रसूताओं की मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है। गुरुवार सुबह उपचार के दौरान एक और प्रसूता की मौत हो गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर में परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाया जाएगा।
वेंटिलेटर पर थी भर्ती महिला
जानकारी के अनुसार, न्यू मेडिकल अस्पताल में भर्ती महिला की हालत गंभीर होने के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। बताया गया कि डॉक्टरों ने पहले ही इस मामले में जवाब दे दिया था। अस्पताल के गायनिक वार्ड में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद कई महिलाओं की किडनी फेल होने की स्थिति सामने आई थी। इनमें एक महिला पायल की 5 मई को मौत हो चुकी थी, जबकि दूसरी महिला ने गुरुवार को दम तोड़ दिया।
घटनाक्रम के बाद अस्पताल प्रशासन ने चार अन्य महिलाओं को जयपुर रेफर करने की तैयारी शुरू की है। हालांकि परिजनों ने महिलाओं को जयपुर ले जाने से इनकार कर दिया है। इस पूरे मामले के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और इलाज प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल परिसर में माहौल तनावपूर्ण हो गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही की वजह से महिलाओं की हालत बिगड़ी। उनका कहना है कि समय रहते उचित उपचार और निगरानी मिलती तो शायद जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया।
घायल युवक के मामले ने भी बढ़ाई नाराजगी
इसी बीच अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक और सवाल तब खड़ा हुआ, जब छाबड़ा इलाके में सड़क हादसे में घायल युवक को उपचार के लिए कोटा लाया गया। परिजनों के अनुसार युवक को पहले छाबड़ा अस्पताल ले जाया गया था, जहां से उसे कोटा रेफर किया गया। आरोप है कि एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचने के बाद घायल युवक करीब 45 मिनट तक एंबुलेंस में ही तड़पता रहा, लेकिन उसे संभालने वाला कोई नहीं आया।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल के कर्मचारी उन्हें फाइल लेकर इधर-उधर भटकाते रहे, जबकि घायल युवक दर्द से कराहता रहा। इस घटना के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है।
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अस्पताल प्रबंधन पर बढ़ा दबाव
लगातार सामने आ रहे मामलों के बाद अस्पताल प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रसूताओं की मौत और घायल युवक के इलाज में देरी के आरोपों ने चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले को लेकर लोगों में आक्रोश बना हुआ है और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
तबीयत बिगड़ने के मामले पर सख्त हुए स्पीकर ओम बिरला
कोटा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गंभीरता से लिया है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश देते हुए कहा कि उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
स्पीकर ओम बिरला ने अस्पताल पहुंचकर प्रभावित महिलाओं की स्थिति का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान उन्होंने चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन से उपचार व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा सभी मरीजों को बेहतर और त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। मामले की जांच के लिए जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कोटा पहुंच रही है। राज्य सरकार ने भी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।
चिकित्सा मंत्री खींवसर ने क्या कदम उठाया
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने घटना की जानकारी लेने के बाद सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज जयपुर से विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को तत्काल कोटा भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
जयपुर से भेजी गई टीम में निश्चेतना विभाग के डॉ. निहार शर्मा, मेडिसिन विभाग के डॉ. सुनील कुमार महावर, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के डॉ. पवन अग्रवाल और नेफ्रोलॉजी विभाग के डॉ. संजीव कुमार शर्मा शामिल हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रसूताओं की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा आवश्यकतानुसार उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।