13 साल तक बेटी के इलाज के लिए कोटा से दिल्ली के चक्कर: एम्स में तन्वी ने तोड़ा दम; परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
कोटा की तन्वी का 13 साल से दिल्ली एम्स में हार्ट का इलाज चल रहा था। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन की तारीख लगातार टलती रही। 24 अगस्त से भर्ती तन्वी ने बुधवार सुबह दम तोड़ दिया। परिवार ने एम्स पर लापरवाही का आरोप लगाया।
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राजस्थान के कोटा जिले में रहने वाले एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। परिवार पिछले 13 साल से अपनी बेटी तन्वी के इलाज के लिए कोटा से दिल्ली एम्स के चक्कर लगा रहा था। लंबी बीमारी और इलाज के इंतजार के बीच तन्वी ने बुधवार सुबह दिल्ली एम्स में दम तोड़ दिया। परिवार ने एम्स के चिकित्सकों पर इलाज में गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
कोटा निवासी मुकेश परियानी की बेटी तन्वी को जन्म से ही हार्ट की बीमारी थी। उसका दिल्ली स्थित एम्स में लंबे समय से इलाज चल रहा था। परिवार का आरोप है कि बेटी के ऑपरेशन की तारीख लगातार बदलती रही, जिसके कारण समय पर उसका उपचार नहीं हो सका। बुधवार सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान तन्वी की मौत हो गई।
तन्वी के चाचा भारत परियानी ने बताया कि भतीजी के इलाज के लिए परिवार को महीने में कई बार दिल्ली एम्स के चक्कर लगाने पड़ते थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में इलाज के लिए रुपये भी जमा करवा दिए गए थे। परिवार ने अपनी ओर से राजनीतिक स्तर पर भी सिफारिश लगवाई, लेकिन इसके बावजूद इलाज नहीं हो सका।
भारत परियानी के अनुसार, तन्वी को जन्म से ही हार्ट की बीमारी थी। एम्स में उसके हार्ट की एक नस नहीं होने के कारण कंड्यूट डालकर नस को दोबारा तैयार किया जाना था। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन तन्वी के पिता ने बेटी के इलाज के लिए अपनी पूरी कमाई लगा दी।
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परिवार के मुताबिक, तन्वी पढ़ाई में काफी अच्छी थी। हालांकि, हार्ट की बीमारी के कारण वह ज्यादा तेज नहीं चल पाती थी। 24 अगस्त को तन्वी के पिता मुकेश परियानी और उनकी पत्नी भाविका उसे इलाज के लिए दिल्ली लेकर गए थे। इसके बाद से तन्वी एम्स में भर्ती थी।
परिवार का आरोप है कि इलाज में लगातार देरी और कथित लापरवाही को लेकर पीएम पोर्टल पर एम्स के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। पिता का आरोप है कि एम्स के चिकित्सक सचिन तलवार शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बना रहे थे।
मुकेश परियानी का कहना है कि बेटी के इलाज के लिए परिवार को लगातार दिल्ली बुलाया जाता रहा, लेकिन उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि तन्वी के हार्ट की एक नस नहीं थी और उसमें कंड्यूट डालना था। इसके लिए एम्स में रुपये भी जमा करवाए गए थे।
परिवार के अनुसार, तन्वी का दिल्ली एम्स में 10 अक्टूबर 2012 से इलाज चल रहा था। वर्ष 2014 में ऑपरेशन के लिए रुपये जमा कराने के बावजूद उसे 2 सितंबर 2015 की तारीख दी गई, लेकिन उस समय भी उसका इलाज नहीं किया गया। अब 13 साल की लंबी जद्दोजहद के बाद तन्वी की मौत से परिवार सदमे में है।