दिव्यांग शिक्षक संजय सेन के जोश, जुनून और जज्बे को सलाम, वायरल फोटो का सच
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कहते हैं जोश, जुनून और जज्बे से इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है। सोशल मीडिया में इन दिनों राजस्थान की एक फोटो बहुत तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें एक दिव्यांग अध्यापक बड़ी ही शिद्दत से बच्चों को पढ़ा रहा है। आपको बताते हैं राजस्थान के शिक्षक संजय सेन के बारे में। राजस्थान के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले संजय सेन की लोग सोशल मीडिया में बहुत तारीफ कर रहे हैं।
संजय सेन की तारीफ करना वाजिब भी है क्योंकि संजय सेन दिव्यांग होने के बाद भी बच्चों को शिक्षा देने में पूरी तनमयता से लगे रहते हैं। उन्हें दिव्यांग होने का कभी अहसास ही नहीं होता है। बच्चों को पढ़ाते हुए इन दिनों उनकी तस्वीर खूब वायरल हो रही है। जिसे लोग काफी सराह रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि संजय सेन के इस जज्बे को सलाम। ऐसे लोग ही समाज की मिशाल बनते हैं।
आपको बता दें कि वायरल हो रही इस तस्वीर को 9 सितंबर के दिन संजीब घोष नाम के एक ट्विटर यूजर ने अपने अकाउंट पर शेयर किया था। उन्होंने इस फोटो के साथ लिखा था कि 'मिलिए संजय सेन से, जो दिव्यांग हैं। वह शिक्षा संबल प्रोजेक्ट के साथ साल 2009 से राजस्थान के एक गांव के स्कूल में पढ़ा रहे हैं।’
Meet Sanjay Sen, a physically challenged man, teaching at a village school in Rajasthan under the Shiksha Sambal Project since 2009...salute for his dedication.👏#Respect 🙏 pic.twitter.com/GuBU8wdjqJ
— Sanjib Ghosh🔥সঞ্জীব (@sampadscales) September 9, 2018
तस्वीर बताती है कि बिना सुविधाओं के भी संजय छात्रों को पढ़ाने में किस कदर मशगूल हैं, उनके इस जोश, जुनून और जज्बे की लोग तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। सोशल मीडिया में संजय सेन की तस्वीर पर अपनी भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं। फोटो में आप देख सकते हैं कि संजय अपने पैरों पर खड़े नहीं हो सकते लेकिन इसके बावजूद भी वह ब्लैक बोर्ड पर लिखकर छात्रों को कितनी शिद्दत के साथ पढ़ाने में लगे हुए हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि सरकार को संजय सेन के बारे में सोचना चाहिए , कम से कम उन्हें इलेक्ट्रिक व्हिल चेयर और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए ताकि उनके जैसे तमाम लोग आगे आएं और समाज में अपना योगदान दें।
भारत सरकार की ओर से बच्चों की शिक्षा को लेकर 'शिक्षा संबल' प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है, जिसका मकसद आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की मदद करना और उन स्कूलों को सहायता प्रदान करवाना है, जिनके पास छात्रों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त अध्यापक नहीं है। यह कार्यक्रम राजस्थान के अजमेर, भिलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और उदयपुर के कई जिलों में चलाया जा रहा है। शिक्षा संबल का लाभ नौवीं से 11वीं तक के लगभग सात हजार छात्रों को मिल रहा है।