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Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट से डी.डी. कुमावत को बड़ी राहत, RCA कन्वीनर पद से हटाने की याचिका खारिज
Mon, 16 Mar 2026 07:04 PM IST
Himanshu Priyadarshi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
Published by: Himanshu Priyadarshi
Updated Mon, 16 Mar 2026 07:04 PM IST
सार
Rajasthan High Court: राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने RCA कन्वीनर डी.डी. कुमावत को राहत देते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि जब आपराधिक आरोप पहले ही निरस्त हो चुके हैं, तो अयोग्यता नहीं मानी जा सकती।
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राजस्थान हाईकोर्ट से डी.डी. कुमावत को बड़ी राहत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (RCA) से जुड़े एक महत्वपूर्ण विवाद में राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने एड-हॉक कार्यकारिणी समिति के कन्वीनर डी.डी. कुमावत (दीनदयाल कुमावत) को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें पद से हटाने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि जब किसी व्यक्ति के खिलाफ तय किए गए आपराधिक आरोप ही अदालत द्वारा निरस्त कर दिए गए हों, तो उनके आधार पर अयोग्यता नहीं मानी जा सकती।
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फैसले के बाद कुमावत ने संभाला कार्यभार
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद डी.डी. कुमावत ने सोमवार को दोबारा RCA कन्वीनर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल ली। इस दौरान उनके समर्थक और RCA से जुड़े कई लोग कार्यालय पहुंचे। समर्थकों ने उनका माला पहनाकर स्वागत किया और मिठाई खिलाकर खुशी व्यक्त की। कार्यभार ग्रहण करने से पहले कुमावत ने भगवान के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद लिया और इसके बाद औपचारिक रूप से पदभार संभाला।
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नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका का मामला
यह मामला RCA की एड-हॉक कार्यकारिणी समिति के कन्वीनर डी.डी. कुमावत की नियुक्ति से संबंधित था। याचिकाकर्ता देवी सिंह ने अदालत में दावा किया था कि सांभर लेक, जयपुर की अदालत ने 18 सितंबर 2025 को कुमावत के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और 149 के तहत आरोप तय किए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि RCA के उपनियमों के अनुच्छेद 26 के अनुसार आरोप तय होने के बाद कुमावत पद पर बने रहने के लिए अयोग्य हो गए थे।
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याचिका में फैसलों को अवैध बताने की मांग
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा था कि आरोप तय होने के बाद कुमावत द्वारा कन्वीनर के रूप में लिए गए सभी निर्णय अवैध हैं। साथ ही रजिस्ट्रार सोसायटीज को उन्हें पद से हटाने के निर्देश देने की मांग भी की गई थी।
प्रतिवादी पक्ष की दलीलें
कुमावत की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य, रवि भंसाली, पी.आर. मेहता और एन.एस. राठौड़ ने अदालत को बताया कि जिन आरोपों के आधार पर अयोग्यता का दावा किया जा रहा है, उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ पहले ही 1 नवंबर 2025 को निरस्त कर चुकी है। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि जब आरोप तय करने का आदेश ही रद्द हो चुका है, तो RCA के उपनियमों के तहत अयोग्यता का आधार भी स्वतः समाप्त हो जाता है।
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अदालत की टिप्पणी
जोधपुर पीठ के न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि जब आरोप तय करने का आदेश पहले ही निरस्त किया जा चुका है, तो उसके आधार पर किसी पदाधिकारी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि 18 सितंबर 2025 से 1 नवंबर 2025 के बीच कुमावत द्वारा लिए गए फैसलों को अब चुनौती देना उचित नहीं है, क्योंकि उस समय उनकी नियुक्ति को चुनौती नहीं दी गई थी और काफी समय बीत चुका है।
याचिका खारिज, राहत बरकरार
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि जब याचिका का मुख्य आधार ही समाप्त हो चुका है, तो मामले में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं बनता। फैसले के बाद डी.डी. कुमावत ने फिर से RCA कन्वीनर के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाल ली।
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