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Rajasthan News: सतीश पूनिया को राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें तेज, पार्टी के नए प्रभारियों की सूची में नाम नहीं

Mon, 17 Jun 2024 03:39 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Mon, 17 Jun 2024 03:39 PM IST
सार

हालिया लोकसभा चुनावों में हरियाणा के प्रभारी रहे सतीश पूनिया को प्रभार मुक्त करने के बाद अब उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की अटकलें तेज होने लगी हैं। संभावना यह भी बताई जा रही है कि भाजपा उन्हें झुंझुनू से उपचुनाव का प्रत्याशी बना सकती है।

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Rajasthan News: Chances of sending Punia to Rajya Sabha increased, name not in the list of new in-charges
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय जनता पार्टी में आगामी चुनावों के लिए तैयारियों का दौर जारी है। इसी क्रम में भाजपा ने हरियाणा के लिए लोकसभा प्रभारी बनाए गए सतीश पूनिया को हरियाणा प्रभार से मुक्त कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूनिया के राज्यसभा में जाने की अटकलें तेज हो रही हैं। संभावना है कि भाजपा उन्हें झुंझुनू से उपचुनाव लड़वा दे।

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गौरतलब है कि राजस्थान में भाजपा के प्रमुख नेता सतीश पूनिया लोकसभा चुनावों में अजमेर और नागौर से लोकसभा सीट के लिए टिकट मांग रहे थे। हालांकि भाजपा ने उन्हें दोनों ही जगहों से टिकट नहीं दिया और जाट समुदाय को साधने के उद्देश्य से उन्हें हरियाणा लोकसभा चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया था। लेकिन अब विधानसभा चुनावों की नई जिम्मेदारियों के चलते पूनिया को हरियाणा प्रभार से मुक्त कर दिया गया है।
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आमेर से विधानसभा चुनाव हारने के बाद सतीश पूनिया राजस्थान में अपने लिए नए अवसर तलाश रहे थे। अब जब उन्हें हरियाणा लोकसभा चुनाव के प्रभारी पद से हटा दिया गया है तो पूनिया के राजनीतिक करियर की दिशा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। संभावना है कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है या फिर झुंझुनू से उपचुनाव लड़वाने का निर्णय लिया जा सकता है।
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भाजपा की इन निर्णयों के पीछे का प्रमुख कारण आगामी चुनावों में जाट समुदाय का समर्थन प्राप्त करना और पार्टी की स्थिति को मजबूत करना माना जा रहा है। सतीश पूनिया की लोकप्रियता और अनुभव को देखते हुए पार्टी उनकी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण रणनीतियां बना रही है।


भाजपा द्वारा घोषित किए गए नए प्रभारी और सह-प्रभारियों की सूची में पूनिया का नाम अब शामिल नहीं है, जिससे यही संकेत मिलता है कि पार्टी उन्हें नई और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप सकती है।

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