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राजस्थान: एसएमएस अस्पताल में पहली बार जटिल बोन मैरो ट्रांसप्लांट सफल, 49 वर्षीय मरीज को मिली नई जिंदगी
Tue, 15 Sep 2026 08:39 PM IST
जयपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
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Published by: जयपुर ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2026 08:39 PM IST
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चिकित्सकों के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट करवाने वाले मरीज
- फोटो : अमर उजाला
सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के क्लिनिकल हेमेटोलॉजी विभाग ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विभाग में पहली बार एचएलए-मिसमैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट मेजर एबीओ ब्लड ग्रुप मिसमैच के साथ सफलतापूर्वक किया गया। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और स्वस्थ होने पर मंगलवार को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दुर्लभ अवस्था में पहुंच चुका था मरीज
यह जटिल ट्रांसप्लांट 49 वर्षीय पुरुष मरीज में किया गया, जो क्रॉनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया से पीड़ित था। बीमारी बढ़ने के बाद मरीज लिम्फॉइड ब्लास्ट फेज में पहुंच गया था। चिकित्सकों के अनुसार, सीएमएल की यह दुर्लभ और अत्यधिक जोखिम वाली अवस्था है, जिसमें गहन एवं विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है।
कीमोथेरेपी के बाद ट्रांसप्लांट की तैयारी
ट्रांसप्लांट से पहले मरीज को ल्यूकेमिया को नियंत्रित करने के लिए गहन कीमोथेरेपी और लक्षित उपचार दिया गया। उपचार के बाद मरीज ने एमआरडी निगेटिव स्थिति प्राप्त की। इसके बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू की गई। मरीज का एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट एचएलए-मिसमैच्ड पारिवारिक डोनर से किया गया।
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ब्लड ग्रुप मिसमैच ने बढ़ाई चुनौती
इस मामले में चुनौती इसलिए और बढ़ गई थी, क्योंकि मरीज और डोनर के बीच मेजर एबीओ ब्लड ग्रुप मिसमैच भी था। ऐसी स्थिति में ट्रांसप्लांट के दौरान विशेष चिकित्सकीय प्रबंधन, उचित पूर्व तैयारी और लगातार सघन निगरानी की आवश्यकता होती है। चिकित्सकीय टीम ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यक उपचार एवं सहायक सेवाएं उपलब्ध कराईं।
इस पूरी चिकित्सा प्रक्रिया की खास बात यह रही कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट और उससे संबंधित उपचार राज्य सरकार की निःशुल्क एमएए योजना के तहत किया गया। इससे मरीज को अत्यंत जटिल और महंगे उपचार के लिए कोई आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा।
डॉक्टरों और टीम की अहम भूमिका
इस उपलब्धि में क्लिनिकल हेमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. विष्णु शर्मा, डॉ. देवेश पाराशर तथा बोन मैरो ट्रांसप्लांट टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नर्सिंग, प्रयोगशाला, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और अन्य सहयोगी टीमों ने भी उपचार के दौरान अहम योगदान दिया।
राजस्थान में अत्याधुनिक इलाज को मजबूती
एसएमएस अस्पताल में इस तरह के जटिल बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सफलता राजस्थान में रक्त संबंधी कैंसर के अत्याधुनिक उपचार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही, एमएए योजना के जरिए पात्र मरीजों को महंगी और जीवनरक्षक चिकित्सा निःशुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह उपलब्धि अहम है।
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दुर्लभ अवस्था में पहुंच चुका था मरीज
यह जटिल ट्रांसप्लांट 49 वर्षीय पुरुष मरीज में किया गया, जो क्रॉनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया से पीड़ित था। बीमारी बढ़ने के बाद मरीज लिम्फॉइड ब्लास्ट फेज में पहुंच गया था। चिकित्सकों के अनुसार, सीएमएल की यह दुर्लभ और अत्यधिक जोखिम वाली अवस्था है, जिसमें गहन एवं विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है।
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कीमोथेरेपी के बाद ट्रांसप्लांट की तैयारी
ट्रांसप्लांट से पहले मरीज को ल्यूकेमिया को नियंत्रित करने के लिए गहन कीमोथेरेपी और लक्षित उपचार दिया गया। उपचार के बाद मरीज ने एमआरडी निगेटिव स्थिति प्राप्त की। इसके बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी शुरू की गई। मरीज का एलोजेनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट एचएलए-मिसमैच्ड पारिवारिक डोनर से किया गया।
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ब्लड ग्रुप मिसमैच ने बढ़ाई चुनौती
इस मामले में चुनौती इसलिए और बढ़ गई थी, क्योंकि मरीज और डोनर के बीच मेजर एबीओ ब्लड ग्रुप मिसमैच भी था। ऐसी स्थिति में ट्रांसप्लांट के दौरान विशेष चिकित्सकीय प्रबंधन, उचित पूर्व तैयारी और लगातार सघन निगरानी की आवश्यकता होती है। चिकित्सकीय टीम ने पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज की स्थिति पर लगातार नजर रखी और आवश्यक उपचार एवं सहायक सेवाएं उपलब्ध कराईं।
इस पूरी चिकित्सा प्रक्रिया की खास बात यह रही कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट और उससे संबंधित उपचार राज्य सरकार की निःशुल्क एमएए योजना के तहत किया गया। इससे मरीज को अत्यंत जटिल और महंगे उपचार के लिए कोई आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ा।
डॉक्टरों और टीम की अहम भूमिका
इस उपलब्धि में क्लिनिकल हेमेटोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. विष्णु शर्मा, डॉ. देवेश पाराशर तथा बोन मैरो ट्रांसप्लांट टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। नर्सिंग, प्रयोगशाला, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और अन्य सहयोगी टीमों ने भी उपचार के दौरान अहम योगदान दिया।
राजस्थान में अत्याधुनिक इलाज को मजबूती
एसएमएस अस्पताल में इस तरह के जटिल बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सफलता राजस्थान में रक्त संबंधी कैंसर के अत्याधुनिक उपचार को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। साथ ही, एमएए योजना के जरिए पात्र मरीजों को महंगी और जीवनरक्षक चिकित्सा निःशुल्क उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह उपलब्धि अहम है।