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Hindi News ›   Rajasthan ›   Jaipur News ›   Rajasthan election 2023: Not a single woman candidate in 81 assembly constituencies in Rajasthan

Rajasthan Poll: वादा 33% आरक्षण का और टिकट 15% भी नहीं, 81 विधानसभा क्षेत्रों में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं

Sat, 11 Nov 2023 06:32 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Sat, 11 Nov 2023 06:32 PM IST
सार

Rajasthan election: महिला और युवा ये दोनों ही वर्ग कांग्रेस-बीजेपी की टिकट सूची में इस बार सबसे ज्यादा उपेक्षित हैं। कांग्रेस ने उदयपुर डिक्लेरेशन में जहां युवाओं को 50% टिकट देने का वादा किया था। वहीं, बीजेपी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले महिला आरक्षण का बिल लाई थी।

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Rajasthan election 2023: Not a single woman candidate in 81 assembly constituencies in Rajasthan
राजस्थान विधानसभा चुनाव। - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

200 विधायकों वाली राजस्थान विधानसभा के चुनावों में महिला और युवा वोटरों की हिस्सेदारी 80 फीसदी से ज्यादा होगी। टिकट बंटवारे में ये दोनों ही वर्ग घोर उपेक्षित हैं। कांग्रेस के सबसे ज्यादा टिकट 60 से ज्यादा उम्र के लोगों को बांटे गए हैं। ठीक यही स्थिति बीजेपी की भी है।

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काबिले गौर है कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के एलान से पहले देश में महिला आरक्षण को संसद में विधेयक का क्रेडिट लेने को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में जबरदस्त तकरार देखने को मिली। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी तक ने भाषण देकर बताया कि महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए उनकी पार्टी की क्या सोच है, लेकिन विधानसभा चुनावों का एलान होते ही सियासी दावों और वादों की पोल खुल गई। महिलाओं की बात करें तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही कुल 15 प्रतिशत टिकट भी महिलाओं को नहीं दिए हैं। विधानसभा चुनावों से पहले संसद में महिला आरक्षण बिल पारित कराने वाली बीजेपी ने राजस्थान में विधानसभा चुनावों के लिए सिर्फ 20 महिलाओं को टिकट दिए हैं। वहीं, कांग्रेस की बात करें तो इसने हालांकि 28 महिलाओं को टिकट दिए हैं।
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राजस्थान की विधानसभा से लेकर देश की संसद तक महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल भले ही जोर-शोर से पास किया गया हो, लेकिन राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस की ओर से महिलाओं को 15 प्रतिशत टिकट भी नहीं दिए गए हैं।
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81 विधानसभाओं में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं
वहीं, ऐसा लग रहा है कि स्वयं महिलाएं भी अभी मुख्य धारा की राजनीति में सक्रिय होने की बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि राजस्थान में चुनाव लड़ रहे कुल प्रत्याशियों में से महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत से भी कम है। प्रदेश के 200 में से 81 विधानसभा क्षेत्र तो ऐसे हैं, जहां एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है।

पीएम की सभाओं में दिखी नारी शक्ति
देश में महिलाओं को विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार ने हाल में ही नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित किया है। भाजपा इसे जबरदस्त ढंग से भुना भी रही है। हाल ही में राजस्थान में पीएम मोदी की सभाओं इसका असर नजर भी आया, जहां महिलाओं को सभाओं की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, कांग्रेस ने भी इस बिल का समर्थन किया और यह दावा भी किया कि इसकी शुरुआत हमने ही की थी। कांग्रेस ने इस बात के लिए भाजपा की आलोचना भी की कि इस बिल का लाभ दस साल बाद देने की बात क्यों कही जा रही है। नीयत ठीक है तो इसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

ट्रैक रिकॉर्ड पहले से खराब
ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ इस बार है। पिछले चुनावों में भी स्थिति लगभग यही रही है। भाजपा की बात करें तो 2008 में 22, 2013 में 19 और 2018 में सिर्फ 17 महिलाओं को टिकट दिए। यानी इसका आंकड़ा 10 प्रतिशत से थोड़ा कम ज्यादा ही रहा है। वहीं, कांग्रेस की बात करें तो इसका रिकॉर्ड इस मामले में कुछ बेहतर है। इसने 2008 में 22, 2013 में 22 और 2018 में 26 महिलाओं को टिकट दिए।

स्वयं महिलाओं का रुझान भी कम दिख रहा है कम
स्वयं महिलाओं की बात करें तो उनका रूझान चुनाव लड़ने की ओर कम ही दिख रहा है। इस बार कुल 1875 प्रत्याशियों में से सिर्फ 183 महिलाएं हैं। यानी दस प्रतिशत महिलाएं भी चुनाव मैदान में नहीं हैं। पिछले चुनाव यानी 2018 के मुकाबले संख्या कम ही हुई है। उस समय 189 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था। इस बार छह महिलाएं कम हो गई हैं।

2003 से पहले सौ का आंकड़ा भी नहीं होता था
राजस्थान के चुनाव में महिलाओं की भागीदारी की स्थिति ये है कि 2003 के चुनाव से पहले कुल जमा 100 महिलाएं भी चुनाव मैदान में नहीं उतरती थीं। हालांकि इनकी संख्या लगातार बढ़ी है। वर्ष 1952 के पहले विधानसभा चुनाव में चार महिलाओं ने चुनाव लड़ा था जो बढ़ते-बढ़ते 180 से ऊपर तक तो पहुंचा है, लेकिन अभी भी पूरी 200 सीटों पर एक महिला प्रत्याशी का औसत भी हासिल नहीं हो पा रहा है।


81 सीटों पर नहीं है एक भी प्रत्याशी
प्रदेश में इस बार के चुनाव की स्थिति यह है कि 81 विधानसभा सीटों पर एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है। चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ तो ऐसे जिले हैं, जहां पूरे जिले में ही एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है।

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